जिम होंगे कम, तो कैसे देखेगा दिल्ली का दम?

जिम होंगे कम, तो कैसे देखेगा दिल्ली का दम?

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पीएम नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया मूवमेंट में दिल्ली के लोग अब उतना योगदान नहीं दे पाएंगे!

अब अगर मोमोज की चटनी को लेकर दिल्ली वालों का गुस्सा बढ़ जाए तो शिकायत न कीजिएगा. जब जिम ही नहीं होंगे तो कोई कैसे फिट रहेगा? जब योगा और मेडिटेशन सेंटर ही बंद हो जाएंगे तो कैसे कोई अपने गुस्से को काबू में रखना सीखेगा?

दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रेस्तरां और दुकानों के बाद अब सीलिंग का संकट जिम और योग सेंटरों पर आ गया है. सुप्रीम कोर्ट की गठित मॉनिटरिंग कमेटी ने दिल्‍ली में 12 अगस्‍त, 2008 के बाद खोले गए फिटनेस सेंटर, जिम और योग-ध्‍यान केंद्रों को बंद करने के निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का ये फैसला 24 सितंबर को आया.
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मॉनिटरिंग कमेटी ने तीनों नगर निगमों को दिल्ली के रिहायशी, मिक्स्ड लैंड यूज और कमर्शियल इलाकों में बने 1000 से ज्यादा जिम, मेडिटेशन सेंटर और योगा सेंटर को बंद करने का फरमान सुनाया है. ये वो फिटनेस सेंटर हैं जो 12 अगस्त 2008 के बाद खुले हैं.

मगर ऐसा क्यों किया जा रहा है?

फिटनेस सेंटर प्रदूषण नहीं फैलाते. जिम के कारण लंबे-लंबे जाम नहीं लगते. आखिर जिम के कारण आसपास रहने वालों को क्या खतरा हो सकता है? हम आए दिन सुनते हैं कि दिल्ली के फलां रिहायशी इलाके में किसी गोदाम में आग लग गई, कहीं शॉर्ट सर्किट हो गया. लेकिन फिटनेस सेंटर ऐसे खतरनाक तो नहीं हैं.

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जब 2008 से पहले बने जिम चल  सकते हैं, तो उसके बाद बने जिम क्यों नहीं? दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में रिहायशी इलाकों में चल रहे इन फिटनेस सेंटरों के लिए कोई जगह ही नहीं थी. 2013 में एक संशोधन हुआ और 12 अगस्त 2008 तक बने सेंटरों को इजाजत दे दी गई.

फिटनेस सेंटर चलाने वाले कहते हैं कि जब मास्टर प्लान में मिक्स्ड लैंड यूज वाले इलाकों में ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दे दी गई है, वो भी 17 सितंबर 2019 तक बने रेस्टोरेंट्स को भी तो फिर जिम को क्यों नहीं?

फिटनेस सेंटर मालिकों ने इस बारे में आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी से गुहार भी लगाई है. उनसे उम्मीद भी बंधाई गई है कि मास्टर प्लान में 2008 के बाद बने जिम और फिटनेस सेंटरों को शामिल कर लिया जाएगा.

मास्टर प्लान के मुताबिक, डीडीए मार्केट या शॉपिंग मॉल में ही जिम चलने चाहिए.

शॉपिंग मॉल वाले जिम की ज्यादा चार्ज कौन देगा? डीडीए मार्केट में परचून की दुकान चलाना मुश्किल है, कोई जिम कैसे चलाए? वहां जगह ही कितनी होती है? लाखों लोग जो जिम चलाकर अपना घर चला रहे हैं, वो बेरोजगार हो जाएंगे.

मास्टर प्लान में बदलाव कर कभी दिल्ली वालों को मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाने की इजाजत दी गई तो कभी फ्लोर एरिया बढ़ाने की  इजाजत दी गई. सीलिंग के सितम का हल्ला मचा तो क्लिनिक से लेकर ट्यूशन सेंटर चलाने की इजाजत दी गई, तो फिर जिम के लिए ये लॉक-इन पीरियड क्यों?

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