अब जामिया की दीवारें भी बोलती हैं, टूटे दिलों का दर्द बताती हैं

अब जामिया की दीवारें भी बोलती हैं, टूटे दिलों का दर्द बताती हैं

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कैमरामैन: मुकुल भंडारी, दानिश काजी

वीडियो एडिटर: प्रशांत चौहान

“100 साल बाद भी, लोगों को पता चलेगा कि विरोध हुआ था. और कला के जरिये विरोध, असंतोष की आवाज उठाई गई. ”

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के खुरदुरे दीवारों को छात्रों ने प्रतिरोध-विरोध के कैनवास में बदल दिया है. छात्रों ने दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून और कैंपस में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए ब्रश और पेंट उठाया है.

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जामिया में फाइन आर्ट्स में मास्टर्स कर रही छात्र सिमी ने सबसे पहले दीवारों पर पेंट करना शुरू किया. उन्होंने अपने दोस्तों को इकट्ठा किया और 13 दिसंबर को कैंपस के अंदर की दीवारों पर ग्रैफिटी बनाना शुरू किया.

सिमी के साथी और इंटरनेशनल रिलेशन डिपार्टमेंट के साउद अहमद कहते हैं- पूरे देश में विरोध करने वालों का तरह-तरह से दबाया जा रहा है. इस सबके खिलाफ हम ग्रैफिटी बना रहे हैं. हम इसके जरिये लोगों को सच्चाई से रूबरू करना चाहते हैं.

छात्रों का कहना है कि विजुअल एक्सप्रेशन से आसानी से आम आदमी को समझाया जा सकता है. हम कलाकार हैं. इसलिए हमने कला को अपना जरिया बनाया है.

छात्रों की इस कोशिश को कई लोगों का समर्थन मिल रहा है. कुछ लोग टीचर हैं. वे अपनी ड्यूटी के बाद आकर पेंटिंग करते हैं.

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हालांकि छात्रों को विश्वविद्यालय की दीवार पर पेंट करने की इजाजत नहीं है, लेकिन ये उन्हें रोक नहीं रहा है.

तो अगर प्रशासन इन छात्रों की पहचान करे और कार्रवाई करे तो क्या होगा?

सिमी कहती हैं: "हम देखेंगे... हम देखेंगे. ”

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