PM मोदी की धंधुका रैली: ये खाली कुर्सियां क्‍या कहती हैं?

PM मोदी की धंधुका रैली: ये खाली कुर्सियां क्‍या कहती हैं?

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गुजरात में चक्रवात ओखी के पहुंचने के बाद बुधवार सुबह मौसम काफी ठंडा रहा और तेज हवाएं चलीं. इस बीच ये रिपोर्टर पीएम नरेंद्र मोदी की रैली कवर करने अहमदाबाद के धंधुका के लिए निकला.

आगे की कहानी रिपोर्टर की जुबानी...

जब मैं 9:30 बजे रैली ग्राउंड में पहुंचा, वो बिल्कुल खाली-बंजर सा दिख रहा था. वहां बीजेपी कार्यकर्ताओं, आयोजकों के अलावा मीडिया को छोड़कर ज्यादा लोग नहीं थे.

9.30 बजे के तय समय पर न तो वहां प्रधानमंत्री दिख रहे थे और न ही भीड़. तब मुझे आयोजकों में से किसी एक ने बताया कि प्रधानमंत्री 11 बजे के बाद पहुंचेंगे. इसके बाद मैं साफ देख सकता था कि किस तरह भीड़ धीरे-धीरे रैली ग्राउंड में पहुंचना शुरू कर रही है. उनमें से ज्यादातर धंधुका तालुका के आसपास के इलाकों के ग्रामीण थे, जिन्होंने अपने आसपास के क्षेत्र में पहली बार आ रहे पीएम मोदी को देखने के लिए 15-20 किलोमीटर की यात्रा की थी.

जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा था, पड़ोसी इलाकों से आने वाले लोग भी बढ़ते जा रहे थे. आने वाले लोगों का मनोरंजन बीजेपी के लिए गाए जा रहे दायरो (लोकगीत) से किया जा रहा था. एक समय में ऐसा लगा कि रैली में बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई है. लेकिन कई सीटें-कुर्सियां खाली दिखीं, क्योंकि कुर्सियों की संख्या लोगों से ज्यादा थी.

12 बजे पीएम मोदी हेलिकॉप्टर से रैली स्थल पर पहुंचे और उन्होंने 20 मिनट बाद रैली शुरू की. आश्चर्य की बात ये थी कि मोदी ने रैली में जैसे ही लोगों से बात करनी शुरू की, लोगों ने वहां से जाना शुरू कर दिया. ये ऐसे हो रहा था, मानो रैली में आगे बैठने वाले लोग पहले निकलेंगे.

जब इस रिपोर्टर ने रैली छोड़ने वाले कुछ लोगों से बात की, तो उन्होंने कहा कि मौसम काफी ठंडा है. कुछ लोगों ने दावा किया कि वो बहुत दूर से आए थे और उन्हें घर लौटने के लिए 2 घंटे की यात्रा करनी थी. जबकि कुछ ने कहा कि भाषण बहुत लंबा था और मोदी के जाने के बाद ट्रैफिक से बचने के लिए उन्हें ग्राउंड जल्दी छोड़ना पड़ा.

धंधुका निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा विधायक लालजीभाई कोली पटेल हैं, लेकिन उन्हें धंधुका में दोबारा मौका नहीं मिला. उनकी जगह टिकट कालुभाई दाभी को मिला. इन दोनों के साथ-साथ राज्य के शिक्षामंत्री भूपिंदरसिंह चुडास्‍मा और राज्य के बीजेपी अध्यक्ष जीतू वाघानीने प्रधानमंत्री के पहुंचने से पहले रैली को संबोधित किया था.

रैली में तैनात कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों ने इस रिपोर्टर को बताया कि उन्होंने कभी भी लोगों को मोदी रैलियों से जाते नहीं देखा है, वो भी इतनी बड़ी संख्या में.

मतदान के पहले चरण की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, लोगों की उत्सुकता बढ़ रही है. लेकिन क्या गुजरात में मोदी की लोकप्रियता कम हो रही है? हालांकि ये सारे नतीजे 18 दिसंबर को ही सामने होंगे.

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