पॉल्यूशन टेस्ट के लिए लंबी लाइन, चालान से डर या पर्यावरण की चिंता?

पॉल्यूशन टेस्ट के लिए लंबी लाइन, चालान से डर या पर्यावरण की चिंता?

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वीडियो एडिटर: आशुतोष भारद्वाज

नए कानून का डर कहें या शायद लोग सच में अलर्ट रहना चाहते हैं. 1 सितंबर से मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के लागू होने के बाद लोग ट्रैफिक से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट दुरुस्त कराने में लगे हैं. इन्हीं में एक जरूरी डॉक्यूमेंट है पॉल्यूशन टेस्ट का. कार का PUC सर्टिफिकेट( पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) यानी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र न होने पर 10,000 रुपये की पेनल्टी देनी पड़ेगी.

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इसका नतीजा देखने को मिल रहा है. शहर के पॉल्यूशन टेस्ट सेंटर पर लंबी लाइनें लग रही हैं.

क्या है पॉल्यूशन टेस्ट?
पॉल्यूशन टेस्ट के तहत धुएं, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और एयर पॉल्यूटेंट्स के इमिशन की जांच की जाती है. जिससे ये पता चलता है कि संबंधित वाहन इमिशन एंड पॉल्यूशन कंट्रोल मानकों का पालन करता है या नहीं.

लेकिन गाड़ी का पॉल्यूशन टेस्ट कराने के लिए ये लाइनें चालान से बचने के लिए लग रही हैं या लोगों को पर्यावरण की चिंता है? हमने लोगों से ये जानने की कोशिश की. उनके लिए ज्यादा मायने क्या रखता है पैसा या पर्यावरण?

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