NRI वोटिंग: क्या चुनाव आयोग तोड़ रहा अपने ही नियम?

8 देशों के NRI देश के चुनाव में कर सकेंगे वोट, लेकिन बिना पोल एजेंट के क्यों करवाई जाएगी वोटिंग?

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वीडियो एडिटर: अभिषेक शर्मा

वीडियो प्रोड्यूसर: मौसमी सिंह

चुनाव आयोग (Election Commission) NRIs को देश के चुनावों में वोटिंग (voting in elections) करने में मदद करना चाहता है. जो एक अच्छा खयाल है. इसे 2021 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 8 देशों - यूएसए, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके, मलेशिया, केन्या और सिंगापुर में शुरू किया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में 1 करोड़ NRIs हैं. जिनमें से 60 लाख वोट देने के काबिल हैं.

बिना पोलिंग एजेंट्स के वोटिंग

लेकिन एक समस्या है. चुनाव आयोग ने NRIs के लिए बैलेट पेपर के जरिए वोटिंग का जो सुझाव दिया... वो राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में नहीं होगा और ये द रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1951 और द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 का उल्लंघन है.

पहले बैलट पेपर वोटिंग प्रक्रिया को समझते हैं जिसे EC ने NRIs के लिए सोचा है -

  • स्टेप 1- कोई भी NRI जो विदेश से वोटिंग करना चाहता है वो चुनाव आयोग की वेबसाइट के जरिए चुनाव आयोग के रिटर्निंग ऑफिसर के पास अप्लाई कर सकता है
  • स्टेप 2 - रिटर्निंग ऑफिसर सभी भारतीय उच्चायोगों या दूतावासों में एक सरकारी अधिकारी, नोडल अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैलेट पेपर भेजेगा
  • स्टेप 3 - वोटिंग के दिन, वोटर अपना वोट डालने दूतावास या उच्चायोग जाएगा
  • स्टेप 4 - नोडल ऑफिसर एक सुरक्षित ओटीपी का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे गए पोस्टल बैलेट या ETPB को डाउनलोड करेगा, और वोटर के पहचान को वेरिफाई करने के बाद इसे वोटर को दे देगा
  • स्टेप 5 - वोटर अपने बैलेट पेपर पर अपनी पसंद का टिक लगाएगा. नोडल ऑफिसर एक लिफाफे में बैलेट पेपर को सील करेगा और उसे बैलेट बॉक्स में डाल देगा
  • स्टेप 6 - जब वोटिंग खत्म हो जाएगी, तो नोडल ऑफिसर, बैलेट बॉक्स से लिफाफे को निकालेगा, उन्हें निर्वाचन क्षेत्र के मुताबिक शॉर्ट लिस्ट करेगा और उन्हें राजनयिक मेल के जरिए भारत में रिटर्निंग ऑफिसर को भेज देगा

तो, चुनाव आयोग का इरादा है कि भारत में NRIs के लिए मतदान की प्रक्रिया को भी दिखाया जाए .. लेकिन राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले पोलिंग एजेंटों की गैरमौजूदगी पर सवाल उठते हैं. द रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1951 और द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961, दोनों ही कहते हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पोलिंग एजेंट का होना जरूरी है.

पीपल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट में साफ तौर पर कहा गया है-

अगर पोलिंग एजेंट किसी ऐसे कार्य के दौरान मौजूद नहीं रहते हैं, जो उनकी उपस्थिति में होना जरूरी है, तो उन कार्यों को मान्य नहीं माना जा सकता है.

ये 'कार्य' जिनके लिए एक पोलिंग एजेंट की मौजूदगी जरूरी है, उसे द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 में अच्छी तरह से बताया गया है. उदाहरण के लिए - ये पोलिंग एजेंट के बारे में चार महत्वपूर्ण बातें बताता है.

  1. वोटिंग शुरू होने से पहले, पीठासीन अधिकारी सभी पोलिंग एजेंट्स को वोटर लिस्ट की एक प्रमाणित कॉपी के साथ ये दिखाएगा कि बैलेट बॉक्स खाली है.
  2. कोई भी पोलिंग एजेंट पीठासीन अधिकारी के पास प्रति वोटर दो रुपये नकद जमा करके किसी भी वोटर की पहचान को चुनौती दे सकता है.
  3. वोटिंग के बाद, पीठासीन अधिकारी और वोटिंग एजेंटों की देखरेख में बैलेट बॉक्स को बंद, सील और सुरक्षित किया जाएगा.
  4. अगर NRIs वोट देते हैं और पोलिंग एजेंट मौजूद नहीं होंगे ...तो किसी भी राजनीतिक दल को कैसे आश्वस्त किया जाएगा कि इनमें से किसी भी भारतीय दूतावासों में मतदान स्वतंत्र और निष्पक्ष हुए हैं?

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