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बजट 2021: सरकार की ‘कथनी और करनी में फर्क’: रथिन रॉय

मशहूर अर्थशास्त्री डॉ. रथिन रॉय का बजट 2021 विश्लेषण

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वीडियो एडिटर: दीप्ती रामदास

वीडियो प्रोड्यूसर: कनिष्क दांगी

1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 संसद में पेश किया. द क्विंट से खास बातचीत में मशहूर इकनॉमिस्ट रथिन रॉय ने कहा कि ‘मोदी सरकार के बजट 2021 का विश्लेषण करने से पहले ये देखना चाहिए कि सरकार ने 2020 में क्या किया? वैश्विक महामारी के बाद भी स्टॉक मार्केट रिकॉर्ड उंचाई पर रहा, सरकार हर साल निजीकरण की बात करती है लेकिन अपने टारगेट हमेशा मिस करती है, इसकी वजह से सरकार को बड़ा झटका लगा है और सरकार ने जो उधार लिया है वो इसलिए क्योंकि वो निजीकरण में फेल हो गई.

आपकी नजर में बजट 2021 पास या फेल?

सरकार के बजट का आकलन करना ठीक होगा अगर हम उनका 2020 देखें, पिछले साल जीडीपी बहुत ज्यादा गिर गई. मार्च 2020 में सरकार ने कहा था कि वो जीडीपी के 3% पर उधार लेंगे, लेकिन अब 9.5% लिया, बड़ी अच्छी बात है क्योंकि खर्च बढ़ा है 4 लाख करोड़, लेकिन ये जो खर्च बड़ा है ये सारा खर्च उधार का सिर्फ एक भाग है. बाकी जो उधार आया है वो इसलिए आया कि जो कर सरकार ने लिया, उसमें थोड़ी कटौती हुई, घाटा हुआ, और ये सब इसलिए हुआ क्योंकि देश में मंदी है, लोग कम कमाते हैं तो कम खर्च करते हैं, इसलिए सरकार ने टैक्स में भी कटौती कर दी.

लेकिन जो पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी थी वो बढ़ा दी गई, इससे समझ आता है कि सरकार ने वहां से काफी मुनाफा कमाया. जहां तक टैक्स का सवाल है वहां पर कुछ कम ही कटौती हुई. लेकिन निजीकरण की जब बात आती है तो सरकार कहती है कि हम जल्द से जल्द PSUs का निजीकरण करेंगे, उससे जो पैसे आएंगे वो बजट में डालेंगे और उससे विकास होगा लेकिन अब तक कुछ हुआ नहीं.

बजट 2021 पेश होने के बाद आगे की राह कैसे होगी?

इस वैश्विक महामारी के कारण ये कहा जा सकता है हम बर्बाद नहीं हुए, लेकिन हमारे जो बड़े-बड़े लक्ष्य थे जैसे 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के वो धरे रह गए. ऐसे बड़े लक्ष्य पूरे करने के लिए हम सिर्फ संकट से बच कर काम नहीं चला सकते, इस लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए कोई प्लान होना चाहिए, जब प्लान की बात आती है तो सरकार का कहना है कि उनका प्लान है कि वो इंफ्रास्ट्रक्चर में और इंवेस्टमेंट में पैसे डालेंगे, मेरा कहना इससे अलग है, ये इस साल भी नहीं हुआ है और ये अगले साल भी नहीं हो पाएगा अगर हम इसकी तुलना करते हैं पिछले साल के मुकाबले, लेकिन मैं ये भी कहूंगा कि सरकार ने दो-तीन काम अच्छे किए हैं जिसमें पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है.

कुछ टैक्स रिफॉर्म्स जरूर किए हैं, लेकिन अगले साल के लिए भी सरकार कह रही है कि ‘हम टैक्स ज्यादा नहीं लेंगे.’ लेकिन इतनी अच्छी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं तो आप टैक्स और कलेक्ट क्यों नहीं कर पाएंगे? जब जीडीपी ठीक हो जाएगा तो आपका टैक्स और जीडीपी रेशियो बढ़ना चाहिए लेकिन जो सरकार ने बजट 2021 ये रेशियो रखा है वो पिछले साल से ही मिलता जुलताहै, ये ठीक नहीं है.

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क्या सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है?

अगर दावों की बात करें तो बड़े-बड़े दावों में कोई कमी नहीं दिख रही है, बजट भाषण देते हुए वित्त मंत्री के भाषणों में भी ऐसा कुछ नहीं दिखा कि वो बड़े दावे नहीं कर रही हों, लेकिन दावों के बाद जमीनी हकीकत देखते हैं उनके काम देखते हैं तो उसमें कमियां जरूर है, सरकार की कथनी और करनी में फर्क है और ये सरकार की आदत हो गई है लेकिन दुख के साथ ये कहना होगा कि उसमें कोई फर्क नहीं दिख रहा है.

मिडिल क्लास को बजट में राहत मिली है?

हां, सरकार टैक्स नहीं बढ़ा रही है तो जरूर मिडिल काल्स को फायदा होगा लेकिन अगर आप 15वां वित्तीय आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देखें तो उसमें लिखा है GST को आसान बनाना चाहिए ये अच्छी बात है लेकिन सरकार ने कहा नहीं है, सरकार ने बहुत कुछ माना है, लेकिन ये बात मंजूर नहीं की क्योंकि ये अभी GST काउंसिल के सामने भी जाएगा, राज्य मंत्री भी होंगे और फिर इस पर निर्णय लिया जाएगा.

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