धारावी ने कैसी लड़ी कोरोना से लड़ाई,बना मुंबई के लिए मॉडल

वर्ली-धारावी हॉटस्पॉट कैसे कोरोना मुक्त होने की कगार पर है ?

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वीडियो एडिटर: कनिष्क दांगी

मुंबई का धारावी स्लम एरिया. जब यहां कोरोना फैला तो मुंबई ही नहीं देश भर में भी हड़कंप मच गया. छोटी सी जगह पर बड़ी आबादी रहती है, तंग गलियां हैं, संकरे घर हैं....यहां कोरोना फैलने का मतलब था पूरी मुंबई को बड़ा खतरा. यही हाल वर्ली कोलीवाड़ा का था. लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि तमाम कमियों के बावजूद इन दोनों इलाकों ने कोरोना को करारा जवाब दिया है.

जुलाई के दूसरे हफ्ते में मुंबई के इन दोनों हॉटस्पॉट में एक्टिव केस की संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. दोनों इलाकों में ये कैसे संभव हुआ? आखिर BMC ने यहां क्या कदम उठाए? पहले बात करते है वर्ली की, जो मुंबई का पहला हॉटस्पॉट बना था.

सबसे अच्छी बात है कि अब वर्ली में महज 811 एक्टिव केस हैं, जो पहले मुकाबले काफी कम हैं
सबसे अच्छी बात है कि अब वर्ली में महज 811 एक्टिव केस हैं, जो पहले मुकाबले काफी कम हैं
(फोटो: क्विंट हिंदी/अर्निका काला )

वर्ली विधानसभा क्षेत्र BMC के जी साउथ वार्ड के तहत आता है. 20 जुलाई तक यहां कुल 4,557 केस सामने आ चुके थे, जबकि 3,416 डिस्चार्ज होकर अपने घर जा चुके थे. 330 लोगों की मौत हुई. सबसे अच्छी बात है कि अब इस इलाके में महज 811 एक्टिव केस हैं. इस वॉर्ड के अंदर वर्ली कोलीवाड़ा भी आता है, जहां 235 केस सामने आ चुके हैं. कभी हॉटस्पॉट कहे जा रहे कोलीवाड़ा में अब केवल 13 एक्टिव केस हैं. डबलिंग रेट की बात करें तो ये 76 दिन हैं, जो मुंबई शहर के रेट से बेहतर है.

BMC के अधिकारियों के मुताबिक कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्वॉरन्टीन और कंटेंनमेंट जोन में कड़े लॉकडाउन और फीवर कैंप के जरिए और लोगों के सहयोग से हॉटस्पॉट बने वर्ली कोलीवाडा को कोरोना मुक्त करने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है. वर्ली सीएम उद्धव ठाकरे के बेटे और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र भी है. वर्ली के NSCI डोम में ही 500 बेड्स का देश का सबसे बड़ा आइसोलेशन सेंटर बनाया गया था, जिसका बहुत फायदा हुआ मरीजों को हुआ.

अप्रैल और मई महीने में धारावी की हालत बहुत बिगड़ गई थी. यहां कोरोना के बढ़ते मामलों ने महाराष्ट्र सरकार की नींद उड़ा रखी थी. धारावी की हालत पर केंद्र सरकार के साथ ही WHO भी नजर बनाए हुए था. धारावी BMC के जी नॉर्थ वार्ड में आता है. यहां समस्या ये थी कि महज 2.5 वर्ग किलोमीटर में करीब 12 लाख लोग रहते हैं. संकरी गलियां, तंग घर, कई घरों के लिए एक कॉमन टॉयलेट और पानी लेने की एक ही जगह. ऐसी जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग लगभग नामुमकिन हो जाती है, ऐसे में यहां कोरोना का संक्रमण वाकई बड़ी चुनौती बन गई थी. लेकिन धारावी ने कोरोना से जबरदस्त लड़ाई लड़ी और उसे पीछे धकेल दिया.

धारावी ने कोरोना से जबरदस्त लड़ाई लड़ी और उसे पीछे धकेल दिया.
धारावी ने कोरोना से जबरदस्त लड़ाई लड़ी और उसे पीछे धकेल दिया.
(फोटो: क्विंट हिंदी/अर्निका काला)

धारावी में वॉर फुटिंग पर काम शुरू हुआ. आइसोलेशन, क्वॉरन्टीन, स्क्रीनिंग और फीवर टेस्टिंग पर जोर दिया गया. बड़े क्वॉरन्टीन सेंटर बनाए गए. कई स्वयंसेवी संस्थाएं सामने आईं और धीर- धीरे हालात सुधरने लगे.

G नॉर्थ वार्ड में टोटल केस - 5532 सामने  आ चुके हैं, जबकि 4322 डिस्चार्ज हो चुके हैं. अब यहां सिर्फ 871 ऐक्टिव केस हैं जबकि धारावी की अगर बात करें तो यहां कुल 2507 केस आए हैं. इसमें से 2116 डिस्चार्ज हो चुके हैं. अभी केवल 141 एक्टिव केस हैं. डबलिंग रेट 61 दिन है, जो जाहिर तौर पर अच्छी है.

मुंबई में फिलहाल KE वार्ड हॉटस्पॉट बना हुआ है. यहां सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं-1329. BMC ने कोरोना के प्रकोप को खत्म करने के लिए 'चेज द वायरस' मुहिम शुरू की है. जिसके तहत टेस्टिंग भी बढ़ाई गई है. धारावी मॉडल को मुंबई के दूसरे इलाकों में भी अपनाया जा रहा है. मुंबई में फिलहाल 23 हजार के करीब एक्टिव केस हैं. जुलाई महीने में इन्फेक्शन रेट 20% पर आ गया है जो जून के 27% के करीब था.

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