ट्रंप के नाम से हरियाणा के गांव में शौचालय ‘सुलभ’ पर ‘विकास’ नहीं

ट्रंप के नाम से हरियाणा के गांव में शौचालय ‘सुलभ’ पर ‘विकास’ नहीं

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वीडियो एडिटर: विवेक गुप्ता

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हरियाणा भले ही विकास के लाख दावे करे, लेकिन दिल्ली-एनसीआर के करीब होने के बावजूद उसका मेवात क्षेत्र आज भी देश का सबसे पिछड़ा जिला है. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 101 पिछड़े जिलों की लिस्ट में मेवात सबसे नीचे है. इस पिछड़े इलाके में बसे एक गांव को 2017 में उम्मीद जगी कि अब शायद उसकी तस्वीर बदलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका.

2017 में गांव मरोड़ा अचानक सुर्खियों में आ गया था. पीएम नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए पब्लिक टाॅयलेट्स बनवाने के लिए मशहूर बिंदेश्वर पाठक के एनजीओ सुलभ इंटरनेशनल ने इस गांव को गोद लिया. गोद लेते ही खुले में शौच को मजबूर गांव के हर घर में शौचालय बनवा दिए गए.

उन्हीं दिनों पीएम मोदी की मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होनी थी, लिहाजा गांव का नाम 'ट्रंप सुलभ ग्राम' रख दिया गया. गांवभर में इस नए नाम के पोस्टर लगवा दिए गए. एनजीओ का कहना था कि डोनाल्ड ट्रंप का नाम इसलिए दिया ताकि इसको देखकर अमेरिका से विकास के लिए मदद मिले.

हालांकि जिला प्रशासन ने कुछ ही दिनों बाद इसपर आपत्ति जताते हुए पोस्टर निकलवा दिए. राज्य सरकार ने दावा किया कि एनजीओं के गोद लेने से पहले ही ये गांव खुले में शौच से मुक्त हो चुका था.

लेकिन सच्चाई ये है कि आज भी यहां लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. वजह है पानी की कमी. पीने से नहाने तक के लिए पूरे गांव को पानी खरीदना पड़ता है. 165 घरों वाले इस गांव में अधिकांश लोग मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं, ऐसे में पानी के लिए पैसे खर्च करना उनके ऊपर बड़ा आर्थिक बोझ है.

जब 10 दिन टैंक (पानी का) न आए तो शौच के लिए बाहर जाएंगे ही. 1000 रुपये तो हम भरेंगे नहीं. हम मजदूर लोग हैं. पानी नहीं आएगा तोहम बाहर ही जाएंगे
सरस्वती, निवासी
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट के मुताबिक मेवात में पीने लायक पानी 30% से भी कम है.

2 साल पहले डोनाल्ड ट्रंप के नाम से अनजान इस गांव को उम्मीद थी कि इसी बहाने गांव का विकास होगा. लेकिन आज भी मरोड़ा में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. गांव के प्राइमरी स्कूल तक जाने वाला रास्ता कच्चा है, जो बरसात के मौसम में गांववालों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. जल निकासी का भी इंतजाम नहीं है.

चुनावी मौसम ने गांववालों में फिर से 'विकास' का पूरा चेहरा देखने की उम्मीद जगाई है, लेकिन नेता यहां वोट मांगने भी नहीं जाते. क्या ये चुनाव लेकर आएगा 'ट्रंप विलेज' तक विकास की रोशनी?

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