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Elimination of Violence Against Women Day: सुनिए साहिर लुधियानवी की नज्म 'औरत'

जमाने बदल गए, सरकारें बदल गईं, लेकिन नहीं बदली तो 'औरत' की किस्मत.

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"औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया...

जब जी चाहा मसला, कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया..."

दशकों पहले साहिर लुधियानवी की लिखी ये नज्म आज भी समाज को आइना दिखाती है. जमाने बदल गए, सरकारें बदल गईं, लेकिन नहीं बदली तो औरत की किस्मत. सदियों से पितृसत्ता की जलाई आग में झुलसती आ रही औरतों की बदहाली आज भी वैसी ही है.

अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर, सुनिए साहिर लुधियानवी की नज्म 'औरत'.

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1993 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस (International Day for the Elimination of Violence Against Women) घोषित किया था. UN महिलाओं के खिलाफ हिंसा को जेंडर आधारित हिंसा के रूप में परिभाषित करता है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं को शारीरिक, यौन या मनोवैज्ञानिक हिंसा का खतरा रहता है.

भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा कि बात करें, तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के कुल 4,28,278 मामले दर्ज किए गए. इसमें रेप के 31,677 मामले, खुदकुशी से मौत के 23,178 मामले, पति या रिश्तेदारों की हिंसा के 1,36,234 मामले, किडनैपिंग के 75,369 मामले और पॉक्सो एक्ट के तहत केस के 52,836 मामले दर्ज हुए थे.

वीडियो एडिटर: पूर्णेन्दू प्रीतम

कैमरापर्सन: शिव कुमार मौर्य, अतहर राथर, कुलदीप

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