उर्दूनामा: जानिए कितनी होती है हमारे ‘तसव्वुर’ में ताकत
उर्दूनामा: लफ्ज़ ‘तसव्वुर’ के क्या हैं मायने
उर्दूनामा: लफ्ज़ ‘तसव्वुर’ के क्या हैं मायने(फोटो: क्विंट हिंदी) 

उर्दूनामा: जानिए कितनी होती है हमारे ‘तसव्वुर’ में ताकत

Loading...

जी ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन

बैठे रहे तस्सवुर-ए-जाना किये हुए

मिर्ज़ा ग़ालिब का शेर है ये जिस में वो उन फुर्सत के लम्हात का ज़िक्र कर रहे हैं जब अपने महबूब का तसव्वुर करना पसंद करते हैं.

उर्दू शायरी में ज़्यादातर शायरों ने 'तसव्वुर' हमेशा अपने महबूब का किया है जिसके बारे में सोचते सोचते या तो बहुत ग़मगीन हो जाते हैं, या फिर महबूब के तसव्वुर से शायर जिंदगी में एक पॉजिटिविटी की बात करते हैं. नए कॉन्फिडेंस की बात करते हैं.

उर्दूनामा के इस एपिसोड में हम लफ्ज़ 'तसव्वुर' के मायने उर्दू शायरी में अलग अलग शायरों के ज़रिये समझेंगे.

ये भी पढ़ें : उर्दूनामा: शायर महबूब को कातिल क्यों कहता है?

ये भी पढ़ें : उर्दूनामा: नए साल के स्वागत में समझिए इब्तिदा-इंतेहा के मायने

कोरोनावायरस से जारी जंग के बीच तमाम अपडेट्स और जानकारी के क्लिक कीजिए यहां

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram और WhatsApp चैनल से जुड़े रहिए यहां)

Follow our वीडियो section for more stories.

    Loading...