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बजट 2020 से मंदी का जवाब मिला या नहीं?

बजट 2020 उम्मीदों पर खरी उतरी?

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कैमरापर्सन: सुमित बडोला

वीडियो एडिटर: विशाल कुमार

प्रोड्यूसर: कौशिकी कश्यप

आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट पेश किया है उसे देखकर सबसे पहले तो मुझे ये मान लेना चाहिए कि मेरा अपना अनुमान गलत निकला. मैंने कहा था कि संभावना है कि ‘बिग बैंग’ बजट आएगा. ऐसा अनुमान इसलिए था क्योंकि लगा था कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दिलचस्पी ले रहे हैं, तो इसमें कुछ बड़ी बड़ी चीजें होंगी और कुछ बोल्ड कदम भी उठाए जाएंगे.

लेकिन ये जो बजट आया है इसे देखकर ऐसा लगता है कि जो मंदी, बेरोजगारी और आर्थिक संकट औरों के लिए होगा, सरकार के लिए नहीं है. सरकार को ऐसा लगता है कि ये साधारण समय है, और इसमें कोई बिग बोल्ड कदम उठाने की जरुरत नही हैं. सरकार का मानना है कि ऐसा कोई संकट नहीं आया है कि लीक से हटकर काम करना पड़े. ये बिलकुल साधारण बजट है.

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बाजार का सबसे बढ़िया इंडिकेटर होता है शेयर मार्केट. शेयर मार्केट को देखें तो वो पिछले 5 दिनों से गिरा हुआ था. लग रहा था कि बजट के दिन मार्केट ऊपर जाएगा. लेकिन बजट के बाद शेयर बाजार बुरी तरह से टूटा.

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हम ग्रोथ को रिवाइव करने के लिए कंजंप्शन डिमांड और इन्वेस्टमेंट डिमांड बढ़ाने के लिए कह रहे थे, लेकिन सरकार चाहती है कि कोई विदेशी कंपनी पैसा निवेश करे. अगर वो ऐसा करती है तो उसे 100% की छूट मिल जाएगी. कॉर्पोरेट बॉन्ड में FPI के लिए निवेश सीमा बढ़ाई गई है.

अगर हम इसके दूसरे पहलू कि बात करें जो एक फाइल प्रिंट में है, बजट के भाषण में नहीं था. तो वो ये है कि एनआरआई की परिभाषा बदल दी गई है. जो भारतीय किसी भी देश में टैक्स नहीं दे रहे हैं अगर वो भारत के टैक्स ब्रेकिट में आते हैं, तो उन्हें भारत में टैक्स देना होगा.

बजट का एक बड़ा ऐलान रहा एलआईसी के लिए आईपीओ. एलआईसी के आईपीओ से एक से दो लाख करोड़ रुपये सरकार के पास में आ सकते हैं. लेकिन सरकार के लिए विनिवेश का यह तरीका एक तरह शॉर्ट-कट है. विनिवेश के लिए सरकार ने जो व्यापक कदम उठाने चाहिए थे वे नहीं उठाए. चूंकि सरकार के पास पैसे की कमी है इसलिए एलआईसी के आईपीओ लाकर वह पैसा जुटा सकती है.

इस बजट में सरकार का एक मेजर फोकस जिसपर था, वो इनकम टैक्स पर था. क्योंकि इससे कुछ वर्ग नाराज दिखता है. सरकार के तरफ से उसे खुश करने की पूरी कोशिश की गई है. इनकम टैक्स का एक नया स्लैब लाया गया है. सबसे खास बात ये है कि इसमें कंडिशन अप्लाई हो रहे हैं.

एक तो पुराना रिजीम है, जिसमें आप डिडक्शन और छूट ले सकते हैं. लेकिन अगर टैक्स देने की नई व्यवस्था में जाएंगे तो पुरानी व्यवस्था में मिल रही छूट को छोड़ना होगा. साफ है कि टैक्स के मामले को जटिल बना दिया गया है.

सरकार ने जहां अपना आमदनी और खर्च का हिसाब लगाया है उसके मुताबिक 7 लाख करोड़ का गैप रहेगा.

सरकार कहती है बजट एक जरुरी हिसाब-किताब का दस्तावेज है, जरुरी नहीं है कि इकनॉमी से जुड़े सभी मुद्दे बजट के दौरान ही अनाउंस कर दिए जाएं. इसलिए बहुत से लोग अभी आशा रखेंगे कि सरकार बजट से बाहर कुछ कदम उठाए!

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