शाह ने माना नफरती बयान गलत, तो क्या ऐसे नेताओं पर एक्शन लेगी BJP? 

शाह ने कहा है - ‘गोली मारो गद्दारों को...’ और ‘भारत- पाकिस्तान मैच’ जैसे बयान नहीं देने चाहिए थे

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नजरिया
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अमित शाह ने माना कि हो सकता है कि दिल्ली में नफरत वाले बयानों से पार्टी नुकसान हुआ
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के दो दिन बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आखिरकर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने एक निजी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कहा है -‘हो सकता है पार्टी को नेताओं की विवादित बयानबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ा हो. अब सवाल लाजिमी है कि क्या बीजेपी ऐसे नेताओं पर कोई एक्शन भी लेगी? क्या उनसे इस्तीफा मांगेगीा? सस्पेंड करेगी? पार्टी से निकालेगी? नोटिस देगी या सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ देगी? एक सवाल ये भी है कि कार्रवाई किन-किन लोगों पर होगी? क्योंकि दिल्ली चुनावों के दौरान भड़काऊ बयान देने वाले बीजेपी नेताओं की लिस्ट लंबी है.

मैं दिल्ली चुनाव में हमारी हार स्वीकार करता हूं. ‘गोली मारो गद्दारों को...’ और ‘भारत- पाक मैच’ जैसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे. हो सकता है ऐसे बयानों से पार्टी को नुकसान हुआ हो. हमारी पार्टी ने इस तरह के बयानों से खुद को अलग कर लिया है.
अमित शाह, गृह मंत्री

दिल्ली चुनाव के दौरान बीजेपी के बयानवीरों ने राजनीति का स्तर गिराने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने तो दिल्ली की महिला वोटरों को धमकी तक दे डाली कि अगर नहीं जागे तो शाहीन बाग वाले आकर रेप कर देंगे. कपिल मिश्रा ने इसे भारत पाक के बीच मुकाबला बता दिया और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने 'गोली मारो गद्दारों' के नारे लगवाए.

8 फरवरी यानी वोटिंग के दिन भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला होगा.
कपिल मिश्रा
अगर दिल्ली वाले अब भी नहीं जागे तो शाहीन बाग वाले घर में आकर बेटियों से रेप करेंगे.
प्रवेश वर्मा, बीजेपी सांसद
हम सबकी एकता से “20% वाली वोट बैंक” की गंदी राजनीति की कब्र खुदकर रहेगी.
कपिल मिश्रा

लेकिन नफरत फैलाने वालों की लिस्ट लंबी है

और जब गलत बयानों की बात आएगी तो योगी जी का नाम भी याद आएगा. उन्होंने भी दिल्ली के वोटर को हिंदू बनाम मुस्लिम में बदलने की कोशिश की थी.

उनके पूर्वजों ने भारत को बांटा, इसलिए उन्हें इस उभरते ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ से दिक्कत है.
1 फरवरी को करावलनगर की रैली में आदित्यनाथ योगी

ज्यादातर बयानों पर चुनाव आयोग ने हल्का-फुल्का एक्शन भी लिया. किसी के प्रचार पर रोक लगाई तो किसी को नोटिस भेजा. अब जब बीजेपी भी मान रही है कि ये बयान गलत थे तो उम्मीद बंध सकती है कि कार्रवाई होगी. लेकिन जो अमित शाह ऐसी बयानबाजी को गलत बता रहे हैं उन्होंने खुद क्या बयान दिया, ये भी देख लीजिए

EVM का बटन इतने गुस्से में दबाना कि करंट शाहीन बाग के अंदर लगे.
26 जनवरी को दिल्ली की बाबरपुर रैली में अमित शाह

किस-किस पर लेंगे एक्शन?

तो अगर वाकई अमित शाह मानते हैं कि बीजेपी नेताओं की बयानबाजी ने हराया, अगर वो वाकई मानते हैं कि पार्टी का इन बयानों से कोई लेना देना नहीं है तो उन्हें एक्शन भी लेना चाहिए. उम्मीद तो करनी चाहिए ये कार्रवाई वैसी नहीं होगी, जैसी प्रज्ञा ठाकुर पर की गई थी. प्रज्ञा ने जब नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा तो खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि वो प्रज्ञा को कभी माफ नहीं कर पाएंगे. आज महीनों बाद भी प्रज्ञा संसद में बैठी हैं.

जब अमित शाह कह रहे हैं कि हो सकता कि इन बयानों का खामियाजा भुगतना पड़ा हो तो वो एकदम सही कह रहे हैं. दिल्ली चुनाव के नतीजे बताते हैं कि सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं, हिंदू वोटर ने भी बीजेपी के नेताओं के विष भरे तीरों का जवाब दिया है. जिन इलाकों में CAA के खिलाफ प्रदर्शन हुए या हो रहे हैं वहां तो बीजेपी और बुरी तरह हारी.

हालांकि बीजेपी अपने भड़काऊ बयानबाज नेताओं पर एक्शन लेगी या नहीं, इसका अंदाजा आपको उसी कार्यक्रम में अमित शाह की पूरी बात को सुनकर लग जाता है. इस पूरे चुनाव प्रचार में प्रवेश वर्मा ने सबसे आपत्तिजनक बयान दिया. उन्होंने सीधे-सीधे शाहीन बाग में प्रदर्शन करने वालों को रेपिस्ट बता दिया...इसका वीडियो सबूत भी मौजूद है लेकिन अमित शाह ने कहा कि प्रवेश वर्मा ने ऐसा कहा ही नहीं.

इस वीडियो में प्रवेश वर्मा को 3 मिनट पर सुनिए

खुद अमित शाह ने शाहीन बाग वालों को करंट लगाने की बात कही थी, जब उनसे अपने बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका मतलब बिजली के करंट से नहीं था,बल्कि समझाने के तरीके से था.

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