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UK में तेजी से घट रही PM की लोकप्रियता, भारतीय मूल का कोई नेता ले सकता है जगह?

ब्रिटेन में भारतीय चला सकते हैं सरकार, प्रीति पटेल, ऋषि सनक और साजिद जाविद हैं दावेदार!

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UK में तेजी से घट रही PM की लोकप्रियता, भारतीय मूल का कोई नेता ले सकता है जगह?
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पिछले हफ्ते बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) फिर से पिता बने हैं. जहां तक हम जानते हैं ये उनकी सातवीं संतान है. इस बार बोरिस एक बेटी के पिता बने हैं, जिसे जन्म के कुछ घंटे की भीतर द टाइम्स न्यूजपेपर के कार्टून में छापा गया था. कार्टून में प्रधानमंत्री को अपने नवजात शिशु का स्वागत 'the sweetest little diversionary tactic of them all!' ('उन सभी की सबसे प्यारी छोटी डायवर्सनरी रणनीति!') के तौर पर करते हुए दिखाया गया था.

निश्चित तौर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को अपनी बढ़ती हुई समस्याओं से ध्यान हटाने की जरूरत है. वो अपने पद की समस्याओं के सबसे बड़े संकटों से निपट रहे हैं. झगड़े, विवादों और संघर्षों की एक श्रृंखला जिसने प्रधानमंत्री की अखंडता, योग्यता और राजनीतिक प्रवृत्ति के बारे में गंभीर सवाल पैदा किए हैं. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि एक नेता के सभी आवश्यक गुण उससे दूर हो गए हैं.

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बोरिस जॉनसन के अंत की शुरुआत

विपक्षी दलों का दावा है कि वो प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने के लिए अयोग्य हैं. इस पर बोरिस जॉनसन की कंजर्वेटिव पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण सदस्य निजी तौर पर सहमत हैं, तो कुछ अब सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर खुलकर बात कर रहे हैं. एक प्रमुख दक्षिणपंथी राजनीतिक टिप्पणीकार एंड्रयू नील ने गंभीरता से कहा है कि 'हम बोरिस जॉनसन के अंत की शुरुआत में प्रवेश कर चुके हैं.'

किसी को भी उम्मीद नहीं है कि जॉनसन को जल्द ही सरकार से बाहर कर दिया जाएगा, लेकिन इस बात की चर्चा बढ़ रही है कि वो अगले चुनाव में कंजरवेटिव का नेतृत्व नहीं करेंगे. इसके साथ ही इस बात को लेकर भी अटकलें हैं कि क्या उन्हें दक्षिण एशियाई मूल के सांसदों में से एक द्वारा रीप्लेस किया जाएगा, जो उनके देसी-फ्रेंडली कैबिनेट में उच्च पद पर हैं.

कुछ सप्ताह पहले तक ऐसा लग रहा था कि बोरिस उन कई तूफानों से बचे हुए हैं, जिसका लगभग सभी शीर्ष राजनेताओं ने सामना किया था. दो साल पहले बोरिस ने अपनी पार्टी को एक शानदार चुनावी जीत दिलाई और 'Get Brexit Done' के अपने अभियान के संकल्प को पूरा किया. जबकि ब्रिटिश सरकार का COVID महामारी से निपटने का तरीका काफी हद तक अप्रभावी रहा है, इसने हाल ही में एक बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम के तेजी से और प्रभावी रोल-आउट की देखरेख की है.

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बोरिस जॉनसन के लिए 'पार्टी' की समस्याएं

कोविड महामारी ने प्रधानमंत्री की कमजोरियों को भी उजागर किया है. नए ओमिक्रॉन वेरिएंट का सामना करने के लिए ब्रिटेन एक बार फिर मास्क नियमों को सख्त कर रहा है और सभी को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. कई खेल आयोजनों और बड़े मनोरंजन स्थलों में प्रवेश के लिए वैक्सीन पासपोर्ट की आवश्यकता होगी. इस सब ने कंजर्वेटिव पार्टी के लिबरल विंग को भयभीत कर दिया है, जो ये बताए जाने का विरोध करते हैं कि एक सर्वशक्तिमान सरकार को क्या करना चाहिए. उनका धैर्य आखिरकार खत्म हो गया है. पार्टी भीतर चल रही भयानक फूट अब सबके सामने आ गई है.

जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक साल पहले 10 डाउनिंग स्ट्रीट में क्रिसमस पार्टी का आयोजन ऐसे समय पर हुआ था जब सरकार सभी को अपने-अपने घरों के अंदर रहने और लोगों को एक-दूसरे से मिलने से बचने के निर्देश दे रही थी. बोरिस 10 डाउनिंग स्ट्रीट में क्रिसमस पार्टी के आयोजन में भले ही शामिल नहीं हुए थे, लेकिन वो उस समय उसी इमारत में थे. ऐसे में वे कुछ दूर हो रहे आयोजन में अपने कई दर्जन कर्मचारियों के एक साथ होने के बारे में शायद ही अनजान हो सकते थे. लेकिन एक ये COVID-19 से संबंधित एक अलग ही मुद्दा है जिसने लोगों के आक्रोश को भड़काया और प्रधान मंत्री में लोकप्रिय विश्वास को कमजोर किया है.

प्रधानमंत्री ने एक बार नहीं बल्कि कई बार संसद को बताया है कि वहां कोई क्रिसमस पार्टी नहीं थी और वहां सभी COVID रोकथाम नियमों का पालन किया गया था. उनके सामने समस्या यह है कि कोई उन पर विश्वास नहीं करता है.

मसलन जनता इस बात से नाराज है कि नियम बनाने वाले ही उनका पालन नहीं करते हैं; कंजरवेटिव सांसद इस बात से नाराज हैं कि उनके नेता ने सरकार को एक अनावश्यक संकट में डाल दिया है, जबकि विपक्षी नेताओं ने आखिरकार एक ऐसा मुद्दा ढूंढ लिया है जिसे वे मतदाताओं के साथ एक स्वर में उठा सकते हैं. पिछले कुछ दिनों में हुए ओपिनियन पोल सर्वे में लेबर पार्टी आगे रही है.
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प्रधानमंत्री जो जवाबदेह नहीं हैं

ये याद दिलाता है कि एक राजनेता के लिए अभिमानी और गैर-जिम्मेदार होने की धारणा प्रस्तुत करना बेहद खतरनाक है.

10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री ऑफिस के ऊपर बने भव्य फ्लैट के नवीनीकरण की फंडिंग से जुड़ी अनियमितताओं संबंधित एक अन्य विवाद भी बोरिस के सामने है. जिसमें उपलब्ध सार्वजनिक धन (पब्लिक मनी) की राशि से कहीं अधिक खर्च करने की बात कही जा रही है. बोरिस जॉनसन ने शुरू में एक प्रमुख कंजर्वेटिव डोनर से धन प्राप्त करके लगभग एक करोड़ की कमी को पूरा किया. लेकिन जिस तरीके से उन्होंने इसकी भरपाई की थी वे न तो पारदर्शी थी न ही किसी को संतुष्ट करने वाली थी.

चंदे की घोषणा पर कानून तोड़ने के लिए कंजर्वेटिव पार्टी पर पहले ही जुर्माना लगाया जा चुका है. वहीं अगर यह पता चलता है कि प्रधानमंत्री ने इस अनुचित गड़बड़ी के शर्मनाक पहलुओं को छिपाने की कोशिश की है तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
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प्रीति पटेल, ऋषि सनक या साजिद जाविद?

अगर बोरिस नहीं, तो कौन? कंजर्वेटिव पार्टी उन नेताओं से छुटकारा पाने में थोड़ा क्रूर हो जाती है जो पार्टी के लिए लिबर्टी बन गए हैं. हालांकि, वर्तमान में कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नजर नहीं आ रहा है.

अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने मजबूत रुख के कारण गृह सचिव प्रीति पटेल को दक्षिणपंथियों (राइट विंग) का समर्थन प्राप्त है. लेकिन वे कठिन दौर में हैं, क्योंकि एक जांच में पाया गया कि उन्होंने अपने कर्मचारियों को धमकाया था. ये एक ऐसा मुद्दा था जो आमतौर पर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर देता, लेकिन बोरिस ने नियमों को (फिर से) झुका दिया और उन्हें बचाने का एक तरीका ढूंढ लिया.

अर्थव्यवस्था को महामारी के सबसे बुरे परिणामों से बचाने के उनके अपने प्रयासों के साथ सरकारी खजाने के चांसलर और वित्त मंत्री ऋषि सनक को एक सफलता के रूप में देखा गया है. सनक की अध्यक्षता में कर वृद्धि ने उनके कुछ कंजर्वेटिव साथियों को चिंता में डाल दिया है. हालांकि वो अभी भी ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए प्रबल दावेदारों में से एक हैं.

दक्षिण एशियाई मूल के एक और कंजर्वेटिव भी चुनाव के लिए तैयार है. साजिद जाविद, इनके माता-पिता पाकिस्तानी अप्रवासी थे. इन्होंने खुद को एक स्पष्ट स्वास्थ्य सचिव के रूप में स्थापित किया है.

इसलिए अगर बोरिस जॉनसन का नेतृत्व लगातार बिगड़ता रहा, तो इस बात की काफी संभावना है कि उनकी जगह किसी भारतीय को लाया जाएगा.

(एंड्रयू व्हाइटहेड, बीबीसी इंडिया के पूर्व संवाददाता हैं. इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं. क्विंट न तो इसका समर्थन करता है और न ही इसके लिए जिम्मेदार है.)

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