कैसा होगा हमारा नया साल - 10 ‘की वर्ड’

उम्मीद है कि ‘न्यू नॉर्मल’, ‘फिजिटल’ समेत कई नए ‘की वर्ड’ और रंगों वाला साल नयी खुशियां और तरक्की लेकर आएगा. 

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Happy New Year : कैसा होगा हमारा नया साल- 10 ‘की वर्ड’

आशंकाओं से भरे 2020 के बाद अब उम्मीदों वाले 2021 की तैयारी है. उम्मीद है कि 'न्यू नॉर्मल', 'फिजिटल' समेत कई नए 'की वर्ड' और रंगों वाला साल नयी खुशियां और तरक्की लेकर आएगा. कोरोना वायरस के इस दौर में चुनौतियां भी खूब हैं, जिनसे दुनिया को दो-दो हाथ करने होंगे. ऐसे में पहले से ही जान लेते हैं वो कीवर्ड जो बताएंगे कि कैसे होगा हमारा नया साल.

'नॉर्मल'- यही सबसे बड़ी चाहत है हम सबकी. कभी आशावादी मन महीनों से कहता है, बस अगले महीने पुराना नॉर्मल लौट आएगा. कभी लोग सच का सामना कराते हैं कि अभी 6 महीने, हो सकता है कि साल भर, अभी थोड़ा और ऐसे ही संभालो. इंसानी मन है, दौड़ रहा है नॉर्मल हालात की तरफ.

सच ये है कि अमीर और गरीब देशों का टाइम टेबल अलग-अलग है. आशावादी अनुमान ये है कि अमीर दुनिया अभी से 6 महीनों में काफी हद तक नॉर्मल जिंदगी की तरफ लौट आएगी. भारत उस सुरक्षित दौर में नए साल के उत्तरार्ध में ही आ पाएगा. हमारी जरूरतमंद और बेसब्र आबादी इतनी बड़ी है कि अभी से ही ऐसा लग रहा है कि आ तो गया सामान्य जीवन वापस- ट्रैफिक जाम और भीड़.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)

बड़ी बात ये है कि जिसे हम नॉर्मल कहेंगे वो भी नया होगा, पुराने जैसा नहीं. यानी जब तक आधे से ज्यादा लोगों को टीके ना लग जाएं, तब तक मास्क (नाक समेत क्योंकि नाक का अश्लील प्रदर्शन आप देखते ही होंगे), आपसी दूरी और हाथ धोने के अलावा हमारे पास बेहतर सुरक्षा कवच नहीं है. हम अगर इस अनुशासन को अपना लें तो ही नॉर्मल कामकाज कर सकते हैं. नए नॉर्मल में हम होटल, रेस्तरां, सिनेमा, खेल के मैदान, स्कूल- कॉलेज को नए रूप में ही खोल पाएंगे. जो नए तरीके अपनाएंगे, वो शायद जल्दी खोल पाएंगे.

लोकल - मुंबई दिल्ली जैसे महानगरों और छोटे शहरों को नयी कल्पनाओं की जरूरत है, जल्दी नॉर्मल गतिविधियां बहाल करनी हैं तो सार्वजनिक जगहों, मैदानों, क्लब जिम खाना जैसी जगहों को लोगों के लिए खोलना चाहिए. सार्वजनिक स्वास्थ्य और कारोबार - ये दोनों के लिए जरूरी है. नए मौके खोल सकता है.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)

इस साल लोगों का फोकस नगर निगमों पर बढ़ेगा क्योंकि नए बदलाव उनके बगैर नहीं हो सकते. हम पब्लिक सर्विस डिलिवरी के मामले में ज्यादा केंद्रीकरण की मानसिकता की तरफ जा रहे हैं. यू-टर्न जरूरी है. लोकल स्तर पर समावेशी रहन-सहन का मॉडल नीतिकारों को बनाना ही होगा. जितनी देर करेंगे महामारी से बढ़ी गैर-बराबरी हमारे लोगों को परेशान करती रहेगी. हम वक्त के साथ हैं या पीछे इसको पहचानने की एक आसान कसौटी है- महामारी के बाद सुरक्षित आवाजाही के लिए निजी वाहनों की चाहत बढ़ी है. क्या आपका शहर साइकिल सवारों के लिए दो पहिया वाहनों के लिए अलग लेन बनाने को प्राथमिकता देगा? इससे पता चलेगा कि हमारे नीति नियोजन में मामूली आदमी केंद्र में है या नहीं.

K- शेप्ड रिकवरी- महामारी ने सभी देशों की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी. गिरे इतना कि अब जब रिकवरी हो रही है वो भी तेज है, लेकिन ये भ्रामक है. सरकारें और पंडित कई तरह के जुमले फेंक रहे हैं - V शेप, W शेप, U शेप आदि आदि. लेकिन जो फिक्र की बात है वो ये कि हमारा हाल K जैसा हो रहा है.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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बड़े और बड़े, अमीर और अमीर, ताकतवर और ताकतवर, गरीब और गरीब, नंबर वन या टू के बाद की कंपनियां और कमजोर हो रही हैं. गैर-बराबरी 2021 में नई चुनौती बनकर उभेरगी. सरकार इसका हल करते हुए दिखेगी, लेकिन ये उपाय सीधे कैश और दूसरे लाभ ट्रांसफर करने जैसे होंगे. ये दीर्घकालिक समाधान नहीं होंगे. यानी गरीबी दूर करना और स्थायी समृद्धि लाना और भी दूर की कौड़ी हो जाएगी. सरकारें अपनी विफलताएं महामारी के बहाने छिपाकर आगे बढ़ लेंगी.

D-10 - डिमॉक्रेसी शब्द नए सिरे से चर्चा में आएगा. अगले साल G-7 देश, तीन और देशों को जोड़ेंगे. भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया. लोग इसको D-10 कहकर पुकार रहे हैं.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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महामारी में लोकतंत्र कमजोर हुआ है. लोगों की सरकार पर निर्भरता बढ़ी है और नेताओं को मौके मिले तो सरकार से 'माई-बाप सरकार' बनना कौन नहीं चाहता. अमेरिका ने अभी मुश्किल से अपना लोकतंत्र बचाया. अब चीन के मुकाबले अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों की एक नई धुरी बनेगी. जिन देशों में लोकतंत्र खत्म किया जा रहा है ये धुरी उनके खिलाफ व्यापार और स्ट्रैटेजी के मुद्दों के जरिए उन्हें रास्ते पर लाने की कोशिश होगी. कई देशों में लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन हवा पकड़ रहे हैं. मिसाल हॉन्ग कॉन्ग एक केस स्टडी के रूप में 2021 में चर्चा में बना रहेगा. एक तरफ ग्लोबलाइजेशन कमजोर हुआ है लेकिन दूसरी तरफ एक नया ग्लोबलाइजेशन शक्ल लेगा.

चीन- पूरी दुनिया की कहानी इस एक लफ्ज के इर्द-गिर्द घूमेगी. ट्रंप के जाने के बाद बाइडेन क्या रुख अपनाते हैं, ये पूरे 2021 का भविष्य तय करेगा. अमेरिका की कोशिश होगी-सतर्कता लेकिन आपसी सहयोग. चीन पर भरोसा नहीं, लेकिन मिल कर काम करें. ये रास्ता चीन के मकसद के लिए अनुकूल नहीं है .इसलिए कई मोर्चों पर तनातनी होगी.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)

चीन अमेरिका का करेंसी और ग्लोबल वित्तीय सिस्टम पर वर्चस्व खत्म करने के लिए लंबे समय से कम कर रहा है. इस मोर्चे पर इस साल खूब दांव पेंच दिखेंगे. चीन के साथ टेक्नॉलजी के मोर्चे पर अमेरिका और EU की लड़ाई संगीन होने जा रही है. 5G वो मैदान है जहां अगले साल के मैच का रिजल्ट तय हो सकता है. भारत के लिए नए साल चीन का सिर दर्द बना रहेगा. राजनाथ सिंह, जयशंकर और सेना प्रमुख के बयान इस तरफ साफ इशारा कर रहे हैं. नए साल के शुरुआती महीनों में कुछ तनातनी बढ़ सकती है.

बिग टेक - अमेरिका और EU टेक्नॉलजी के मोर्चे पर एक तरफ चीन से लड़ रहे होंगे वहीं दूसरी तरफ ये देश बिग टेक कंपनियों पर लगाम डालने के कम में तेजी लाएंगे.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों पर रेग्युलेशन की लगाम डालने के बड़े कदम उठेंगे. टैक्स वसूला जाएगा. बड़ा दंगल होने वाला है. भारत को भी इस मामले में काफी कुछ करने की जरूरत है लेकिन भारत की राह अभी साफ नहीं है.

वैक्सीन पासपोर्ट- रिकवरी के रास्ते पर लौटने के लिए ये एक नया शब्द शायद हमारी जिंदगी में आ जाए.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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कोविड का डर हटाने, भरोसा बढ़ाने के लिए कई कारोबार ऐसे होंगे जो कहेंगे वैक्सीन 'सर्टिफिकेट दिखाइए और प्रिऑरिटी पाइए.'

फिजिटल- स्कूल कालेज, हेल्थ, रीटेल, बैंकिंग ना जाने कितने कामों में डिजिटल टेक नई भूमिका निभा रहा है. सबके हाथों में स्मार्टफोन नहीं, देश में कनेक्टिविटी की समस्या बनी हुई हुई है.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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ऐसे में डिजिटल पहुंच और लोग कहीं आकर इन सेवाओं का लाभ ले सकें, ऐसे फिजिकल सेंटर मिला-जुला मॉडल सामने आएगा.

कमाई - हमारा रोजगार, नौकरी और हमारी कमाई के विषय तो हमारी सोच में हर दिन बसे रहेंगे. पुराने जॉब खत्म होंगे और नए बनेंगे. यानी नया हुनर सीखने की जरूरत बढ़ेगी. सिखाने वालों का नया कारोबार सामने आएगा. घटी आमदनी के कारण बहुत लोग आज कल निवेश की तरफ जा रहे हैं. दीर्घकालीन योजना के साथ जाना भी चाहिए.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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महामारी के दौरान 2020 में निफ्टी में 15% और सोने में 24 % की कमाई हुई, ऐसे में लोगों के मुंह में पानी आएगा. बाजार में एक्स्पर्ट तेजी का अनुमान लगा रहे हैं. बजट के पहले शायद यही रुख रहे. सोना इस साल इतना रिटर्न दे शायद ये संभव नहीं होगा.

टोक्यो - 2021 में नॉर्मल और सब-नॉर्मल जीवन के बीच एक चीज तय है, कोविड की सावधानियों के साथ टोक्यो ओलिंपिक होगा और हम सब इसका इंतजार करेंगे.

(ग्राफिक्स: कामरान अख्तर)
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और भी कई 'की वर्ड' हैं, हम उनके विस्तार में नहीं जा रहे. जैसे अगले बजट का की-वर्ड होगा - गरीब, किसान, महिला, मिडिल क्लास. हिंदू मुसलमान - ये दो लफ्ज और कर्कशता बढ़ाएंगे. विधानसभा चुनावों में बीजेपी अपने नंबर बढ़ा सकती है. अनिल अंबानी की कंपनियों, जेट ऐयरवेज और DHFL को नया मालिक मिलने की संभावना है. कुछ सरकारी कंपनियों का का विनिवेश आखिरकार इस साल हो ही जाएगा

मुझे सबसे पहले इंतजार है -

  • अगले हफ्ते जब भारत में वैक्सीन को इजाजत मिल जाएगी.
  • 20 जनवरी का, जब डोनाल्ड ट्रंप से अमेरिका फाइनली अपना पिंड छुड़ा लेगा.

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