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‘पूरे पचास हजार’, मैक ये लाइन शूट करने मुंबई से बेंगलुरु गए 27 बार

रील पर विलेन, रियल में ‘हीरो’: 3 शब्द के डायलॉग से अमर बने ‘सांभा’ की कहानी

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एक्टर मैक मोहन
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पूरे पचास हजार...” तीन शब्द का ये डॉयलाग बोल कर एक शख्स अमर हो गया. ये तीन शब्द इतने जोरदार थे कि कलाकार इसके बाद अपने किरदार के नाम से जाना जाने लगा. वही नाम जिससे उसके बॉस गब्बर ने पुकारा था- “अरे ओ सांभा...” लेकिन क्या आपको मालूम है कि इन तीन शब्दों को डायलॉग को शूट करने के लिए मैक 27 बार मुंबई से बेंगलुरु गए थे.  ये उसी सांभा की कहानी है... मैक की कहानी.

बॉलीवुड फिल्मों में यूं तो कई विलेन रहे लेकिन स्क्रीन पर विलेन की गैंग में एक शख्स बार-बार नजर आता था. वो और कोई नहीं बल्कि मैक मोहन थे. मैक ने इंडस्ट्री के हर बड़े स्टार के साथ स्क्रीन शेयर की थी. हालांकि, मैक को उनके असली नाम से कम और ‘सांभा’ के नाम से ज्यादा पहचाना जाता है. फिल्म ‘शोले’ में सांभा का किरदार निभाने वाले मैक को आज भी कोई नहीं भूल पाया है.

1938 में कराची में जन्में मैक ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें असली पहचान फिल्म ‘शोले’ में सांभा का रोल प्ले कर मिली. मैक रिश्ते में एक्ट्रेस रवीना टंडन के मामा लगते हैं.
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सिर्फ एक डायलॉग ने कर दिया फेमस

लगभग तीन घंटे की फिल्म ‘शोले’ में सांभा यानी मैक मोहन ने सिर्फ एक ही संवाद बोला है और वह है “पूरे पचास हजार.” आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस छोटे से डायलॉग की शूटिंग करने के लिए मैक को मुंबई से बेंगलुरु 27 बार जाना पड़ा था. शुरुआत में फिल्म में उनका किरदार थोड़ा लंबा था, लेकिन फिल्म की एडिटिंग होने के बाद सिर्फ तीन शब्द ही बचे. मैक ने फिल्म ‘शोले’ को एडिट होने के बाद जब देखा तो वे बहुत निराशा हुए थे.

फिल्म ‘शोले’ में मैक मोहन
फिल्म ‘शोले’ में मैक मोहन
(फोटो: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

सांभा के नाम से जानती है दुनिया

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था,

“जब मैंने फिल्म को देखा तो मैं रोने लगा था. मैं सीधे डायरेक्टर रमेश सिप्पी के पास गया और उनसे बोला कि मेरा इतना थोड़ा सा रोल भी क्यों रखा? आप चाहते तो इसे भी हटा ही देते. इसपर उन्होंने मुझसे कहा कि अगर यह फिल्म हिट हुई तो दुनिया मुझे सांभा के नाम से जानेगी. और हुआ भी ऐसा ही.”
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क्रिकेटर बनना चाहते थे मैक

मैक मोहन के पिता भारत में ब्रिटिश आर्मी में कर्नल थे. 1940 में उनका ट्रांसफर कराची से लखनऊ हो गया और मैक ने अपनी पढ़ाई यहीं से पूरी की. उनको बचपन से क्रिकेट का शौक था और वो क्रिकेटर बनना चाहते थे. उन्होंने उत्तर प्रदेश की क्रिकेट टीम के लिए भी खेला था.

1952 में मुंबई आ गए. यहां आने के बाद जब उन्होंने रंगमंच देखा तो एक्टिंग में उनकी रुचि बढ़ गई. शबाना आजमी की मां शौकत कैफी को उन दिनों एक नाटक के लिए दुबले-पतले शख्स की जरूरत थी. मैक के किसी दोस्त ने उन्हें इसके बारे में बताया. उन्हें पैसों की जरूरत थी. वे शौकत के पास नाटक में काम मांगने पहुंच गए और यहीं से उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ.

‘पूरे पचास हजार’, मैक ये लाइन शूट करने मुंबई से बेंगलुरु गए 27 बार
(फोटो: विकीपीडिया)
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46 साल का फिल्मी करियर

1964 में उन्होंने फिल्म ‘हकीकत’ से डेब्यू किया था. 46 साल के करियर में उन्होंने करीब 175 फिल्मों में काम किया. उन्होंने अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, ऋषि कपूर, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार, मिथुन चक्रवर्ती, मनोज कुमार, जितेंद्र जैसे सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन शेयर की.

उन्होंने एक आयुर्वेदिक डॉक्टर मिनी से शादी की थी. उनके तीन बच्चे विनती, विक्रांत और मंजरी. मंजरी पेशे से फिल्म निर्माता और निर्देशक हैं. 2010 में जब मैक फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ की शूटिंग कर रहे थे तभी उनकी तबियत खराब हो गई थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके फेफड़े में ट्यूमर है. इसके बाद उनका लंबा इलाज चला लेकिन 10 मई, 2010 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.

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