‘मालगुडी डेज’ वाले आरके नारायण की वो यादें जो भूली नहीं जा सकतींं
नारायण ने दुनिया को अंग्रेजी में भारतीय लेखन से रूबरू कराया
नारायण ने दुनिया को अंग्रेजी में भारतीय लेखन से रूबरू कराया(फोटो: क्विंट)

‘मालगुडी डेज’ वाले आरके नारायण की वो यादें जो भूली नहीं जा सकतींं

सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले भारतीय लेखकों में एक नाम आरके नारायण का भी है. फेमस 'मालगुडी डेज' टीवी सीरियल जिन कहानियों पर आधारित था, वो सभी नारायण ने ही लिखी हैं. ये कहानियां ‘मालगुडी’ नाम के काल्पनिक कस्बे में स्वामी नाम के किरदार और उसके दोस्तों के बारे में थीं.

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‘मालगुडी डेज’ का टाइटल सॉन्ग आज भी लोगों के जेहन में दर्ज हैं. आज भी इसकी धुन सुनते ही दूरदर्शन पर इसे देखने की यादें ताजा हो जाती हैं.

नारायण अपने सीधे-सादे अंदाज में व्यंग लेखन के लिए जाने जाते हैं. माना जाता है कि स्वामी का किरदार नारायण का 'ऑल्टर ईगो' था. मतलब एक शख्स की ‘दूसरी शख्सियत’.

नारायण की दूसरी रचनाओं में द बैचलर ऑफ आर्ट्स (1937), द डार्क रूम (1938), द इंग्लिश टीचर (1945), द फिनांशियल एक्सपर्ट (1952), द गाइड (1958), द मैन ईटर ऑफ मालगुडी (1961) और द गॉडमदर टेल हैं.

‘द गाइड’ किताब पर बॉलीवुड की मूवी ‘गाइड’ बनी थी. 1965 में रिलीज हुई इस फिल्म में मशहूर अभिनेता देव आनंद ने मुख्य किरदार निभाया था. आनंद और वहीदा रहमान की एक्टिंग ने फिल्म को ‘कल्ट क्लासिक’ बना दिया था.

आरके नारायण ने दुनिया को अंग्रेजी में भारतीय लेखन से रूबरू कराया था. अपनी रचनाओं के लिए नारायण को खूब वाहवाही और अवॉर्ड्स मिले. द गाइड के लिए साहित्य अकादमी, 1964 में पद्मभूषण और रॉयल सोसाइटी ऑफ लिटरेचर ने 1980 में उन्हें AC Benson Medal से नवाजा.

(अभिप्‍सा महापात्रा के इनपुट के साथ)

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