हिंदी और अंग्रेजी भारत की राष्ट्रीय भाषाएं कैसे बनीं?
हिंदी और अंग्रेजी भारत की राष्ट्रीय भाषाएं कैसे बनीं? (फोटो: iStock)
  • 1. हिंदी, हिंदुस्तानी या अंग्रेजी? संविधान सभा में बहस
  • 2. दक्षिण भारत में विरोध और प्रधानमंत्री का आश्वासन
  • 3. कालान्तर में भाषाई विवाद कैसे पनपा?
  • 4. लेकिन हिंदी को जबरन लागू करना उल्टा क्यों पड़ा?
हिंदी, हिंदुस्तानी, अंग्रेजी: भारत की भाषाई राजनीति का पूरा इतिहास

“हमें एक कॉमन भाषा की भी आवश्यकता है. वर्णाकुलर भाषाओं के बदले नहीं, बल्कि उनका विस्तार करके. अमूमन माना जाता है कि ये भाषा हिन्दुस्तानी होनी चाहिए, जो हिंदी और उर्दू का मिश्रण हो. ये भाषा ना तो कठिन संस्कृतनिष्ठ हो और न भारी-भरकम फारसी और अरबी से प्रभावित हो.” (यंग इंडिया,1925)

अगस्त 1925 में गांधी जी ने एक सवाल का यही जवाब दिया था. उनसे पूछा गया था कि भारत की राष्ट्रीय भाषा क्या होनी चाहिए? उस समय से भारत की भाषा के सवाल पर संविधान सभा में कानून बने हैं, सड़कों पर प्रदर्शन हुए हैं और सोशल मीडिया में बहस हो रही है. 14 सितंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर “एक राष्ट्र, एक भाषा” की बहस को हवा दे दी. उन्होंने कहा, “भारत में एक भाषा होनी चाहिए, जो विश्व में भारत की नुमाइंदगी करे.” उन्होंने ये भी कहा कि हिंदी “देश को एकता के सूत्र में बांध सकती है.”

इस बहस का इतिहास क्या है? हिंदी और अंग्रेजी भारत की राष्ट्रीय भाषाएं कैसे बनीं? हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा बनाने के बारे में जवाहरलाल नेहरू और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के क्या विचार थे? जब हिंदी को लादने का सवाल आता है, तो इतिहास हमें क्या सबक सिखाता है? हम आपको विस्तार से बता रहे हैं.

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