बैंकों को अपने लोन रेट एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने को कहा गया है. लोन कस्टमर को इसका फायदा होगा
बैंकों को अपने लोन रेट एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने को कहा गया है. लोन कस्टमर को इसका फायदा होगा( फोटो : रॉयटर्स) 
  • 1. कैसे जुड़ेगा लोन रेट एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से?
  • 2. क्या है मौजूदा व्यवस्था?
  • 3. आरबीआई को एक्सटर्नल बेंचमार्क की सिफारिश क्यों करनी पड़ी?
  • 4. क्या नई व्यवस्था से EMI कम हो जाएगी?
  • 5. क्या नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता?
  • 6. फिर भी अगर-मगर बना हुआ है?
  • 7.
1 अक्टूबर से लोन होगा सस्ता, रेपो रेट के साथ और भी हैं वजहें

आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे फ्लोटिंग पर्सनल, हाउसिंग या ऑटो लोन की ब्याज दरें एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ें ताकि ग्राहकों को रेपो रेट में कटौती का फायदा मिल सके. रिजर्व बैंक ने यह फैसला क्यों लिया? लोन की ब्याज दरों को रेपो रेट जैसे एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से जोड़ने से ग्राहकों को कितना फायदा होगा. आखिर इंटरनल और एक्सटर्नल रेट में क्या अंतर है. क्या एक्सटर्नल रेट से ग्राहक को हमेशा फायदा ही होगा. उनका EMI का बोझ अब क्या कम हो जाएगा. आइए समझते हैं.

  • 1. कैसे जुड़ेगा लोन रेट एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से?

    बैंकों को अपने लोन रेट एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने को कहा गया है. लोन कस्टमर को इसका फायदा होगा
    आरबीआई  ने लोन रेट को एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से जोड़ने को कहा है 
    (फोटो : रॉयटर्स) 

    1 अक्टूबर से अधिकतर बैंक यह कोशिश करेंगे कि आपके ऑटो, होम, पसर्नल लोन और एमएसएमई लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ दें. आरबीआई के ताजा सर्कुलर के मुताबिक बैंकों से कहा गया कि वे अब Maginal cost of funds-based lending rate यानी MCLR के बजाय लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ें. इनमें आरबीआई के रेपो रेट, ट्रेजरी बिल या फिर फाइनेंशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड- FBIL की ओर से पेश रेट शामिल हैं.

    बैंकों के पास चार ऑप्शन हैं- 1. रिजर्व बैंक का रेपो रेट. 2. FBILकी ओर से प्रकाशित भारत सरकार के तीन महीने के ट्रेजरी बिल पर दिया जाने वाला रेट 3. FBILकी ओर से प्रकाशित भारत सरकार के छह महीने के ट्रेजरी बिल पर दिया जाने वाला रेट और 4. FBILकी ओर से प्रकाशित कोई दूसरा बेंचमार्क रेट

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