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डायबिटीज के रोगियों के लिए टहलने से ज्यादा बेहतर है साइकिल चलाना

साइकिल चलाना लो-इंपैक्ट व्यायाम है, जिसका आनंद सभी उम्र के लोग ले सकते हैं.

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डायबिटीज के रोगियों के लिए जॉगिंग करना एक अच्छा व्यायाम है, पर साइकिल चलाना इससे भी बेहतर साबित हो सकता है.

जैसा कि हम जानते हैं, स्वस्थ रहने के लिए हमें शारीरिक रूप से सक्रिय रहना होता है. साइकिल चलाना एक सक्रिय, लो-इंपैक्ट व्यायाम है, जिसका आनंद सभी उम्र के लोग ले सकते हैं. यह टाइप-2 मधुमेह पीड़ितों के लिए टहलने से भी ज्यादा बेहतर व्यायाम है.

फायरफॉक्स बाइक्स ने एक बयान में कहा कि काम पर या मार्केट जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करके आप अपनी दिनचर्या में इस व्यायाम को शामिल कर सकते हैं. नियमित शारीरिक गतिविधियों से आपको गंभीर बीमारियां, जैसे मोटापा, दिल के रोग, कैंसर, मानसिक बीमारी, मधुमेह व अर्थराइटिस से सुरक्षा में मदद मिल सकती है.

एक अनुमान के मुताबिक, करीब एक अरब लोग प्रतिदिन आने-जाने, आनंद या खेल के लिए साइकिल चलाते हैं.

फायरफॉक्स बाइक्स के सीईओ शिव इंदर सिंह का कहना है,

एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में काम पर जाने या काम के लिए साइकिल का इस्तेमाल करने वाले लोगों में मोटापा, मधुमेह या उच्च रक्तचाप का खतरा कम होता है.

शिव इंदर सिंह ने कहा, “बाइक की सवारी करना टॉनिंग या मसल्स बनाने के लिए बहुत अच्छा है, खास तौर पर शरीर के निचले हिस्से में, आपके काल्व, आपकी थाई और आपके पीछे के हिस्से में इससे लाभ होता है. यह एक्सरसाइज का बहुत अच्छा लो-इंपैक्ट मोड भी है, उन लोगों के लिए जिन्हें ज्वाइंट की समस्या है. नियमित साइकल चलाना स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है.”

साइक्लिंग मुख्यत: एरोबिक एक्सरसाइज है, जिससे हृदय, रक्त कोशिकाओं और फेफड़ों का वर्कआउट होता है. इससे पूरे शरीर का फिटनेस लेवल सुधरता है.

बड़े पैमाने पर किए गए शोध में पाया गया है कि जो लोग प्रतिदिन 30 मिनट से ज्यादा साइकिल चलाते हैं, उन्हें मधुमेह होने का खतरा 40 प्रतिशत तक कम होता है.

रोज आधे घंटे साइकिल चलाने से एक सप्ताह में 1,000 कैलोरी जलाया जा सकता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहेगी और कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति अधिक प्रतिक्रियाशील रहेंगी.

तेजी से बढ़ रही है डायबिटीज के रोगियों की तादाद

अंतरराष्ट्रीय मधुमेह फेडरेशन (IDF) के अनुसार, दुनिया में 41.5 करोड़ लोगों को मधुमेह है और दक्षिण-पूर्व एशिया में 7.8 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं. साल 2040 तक यह आंकड़ा 14 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया है.

साल 2015 में भारत में मधुमेह के 6.91 करोड़ मामले थे. साल 2012 में इस बीमारी के कारण भारत में 15 लाख लोगों की जान चली गई और यह आंकड़ा बढ़ रहा है.

IDF ने यह संकेत देकर भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है कि करीब 52 फीसदी भारतीय लोगों को यह नहीं पता कि वे हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हैं. वर्तमान में भारत में 6.2 करोड़ मधुमेह पीड़ित हैं और एक साल में इस आंकड़े में 20 लाख का इजाफा हुआ है.

अनुमान के मुताबिक, साल 2030 तक भारत में मधुमेह के मामलों की संख्या 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी. भारत के नजदीकी पड़ोसियों की बात की जाए, तो मधुमेह के मामले में चीन को छोड़कर भारत सबसे आगे है.

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