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World No-Tobacco Day: क्या है NRT जो तंबाकू छोड़ने में कर सकती है आपकी मदद?

World No-Tobacco Day: भारतीय युवा आबादी के लिए तम्बाकू के इस्तेमाल एक बड़े ख़तरे के रूप में सामने आ रहा है.

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Health News
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World No Tobacco Day: 31 मई को वर्ल्ड नो टोबैको डे है. विश्व स्वास्थ्य संगठन इस दिन लोगों को तंबाकू से होने वाले खतरे से आगाह करवाता है. WHO की एक रिपोर्ट बताती है कि तंबाकू का सेवन करने वाले करीब आधे लोग, जो इसे नहीं छोड़ते हैं उनकी मृत्यु इसकी वजह से हो जाती है. ऐसे में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Nicotine replacement therapy) मददगार हो सकती है. IANS की रिपोर्ट में कहा गया है कि NRT के जरिए तम्बाकू के सेवन में 70% तक की कमी की जा सकती है. आइये जानते हैं निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी क्या है और कैसे काम करती है?

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क्या है निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी?

तंबाकू से जुड़े सभी प्रोडक्ट में सबसे ज्यादा एडिक्टिव कंपोनेंट निकोटीन पाया जाता है. निकोटीन ब्लड के जरिए एड्रेनालाईन तक जाता है और एड्रेनालाईन ऐसे कैमिकल रिलीज करता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, इससे इंसान को कुछ देर के लिए बेहतर महसूस होता है. निकोटीन के कारण ही लोग तंबाकू का सेवन नहीं छोड़ पाते हैं.

IANS की एक रिपोर्ट में डॉ निखिल मोदी जो इंद्रप्रस्थ के अपोलो हॉस्पिटल में Respiratory Medicine के स्पेशलिस्ट हैं, बताते हैं , ''निकोटीन बहुत एडिक्टिव है और इसे छोड़ना काफी मुश्किल है, इसे इस्तेमाल करने वाले 70% लोग इसे छोड़ना चाहते हैं लेकिन केवल 2-3% ही इसमें सफल हो पाते हैं.''

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी में निकोटीन का ही उपयोग निकोटीन छोड़ने में किया जाता है. निकोटीन युक्त दवाओं को गम, ट्रांसडर्मल पैच, नोज स्प्रे, ओरल इनहेलर और टैबलेट के जरिए एडिक्टर्स को दिया जाता हैं.

इस थेरेपी में बहुत कम निकोटीन दिया जाता है. सिगरेट के विपरीत, NRT रक्त में निकोटीन के स्तर में धीरे-धीरे और बहुत कम वृद्धि प्रदान करता है, जिससे इसके दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं. एनआरटी का लक्ष्य निकोटीन डिलीवरी सिस्टम की मदद से लोगों को नशे की लत कम करके धूम्रपान छोड़ने में सक्षम बनाना है.

भारत में विश्व की दूसरी सबसे ज्यादा तम्बाकू प्रयोग करने वाली जनसंख्या रहती है. वहीं हमारे पास 19 तंबाकू निवारण केंद्र हैं.

World No-Tobacco Day: भारतीय युवा आबादी के लिए तम्बाकू के इस्तेमाल एक बड़े ख़तरे के रूप में सामने आ रहा है.

तंबाकू के सेवन से हर साल 8 मिलियन लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

(फोटोiStock)

NRT का दुनिया भर में सफल प्रयोग हो रहा है. US और कई यूरोपियन देशों को NRT के इस्तेमाल से सफलता मिली है. भारत में ऐसी सफलता के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि NRT को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.

दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसलटेंट डॉ पवन गुप्ता ने IANS को बताया कि अचानक तंबाकू छोड़ने से सिरदर्द, अनिद्रा, मूड स्विंग्स सहित कई समस्यायें सामने आ सकती हैं. ऐसे में NRT बेहतर ऑप्शन है.

डॉ पवन गुप्ता आगे कहते हैं कि एनआरटी धूम्रपान की तलब को धीरे-धीरे कम करने में कारगर है. NRT जैसे सुरक्षित विकल्पों को UK , ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और फ्रांस जैसे देशों में पर्याप्त सफलता मिली है. उन्होंने कहा, "एनआरटी की निर्बाध पूर्ति और पहुंच सुनिश्चित करने से भारतीय धूम्रपान करने वालों को इसे छोड़ने में काफी मदद मिल सकती है."

World No-Tobacco Day: भारतीय युवा आबादी के लिए तम्बाकू के इस्तेमाल एक बड़े ख़तरे के रूप में सामने आ रहा है.

Tobacco Eradication Centers in UP: लखनऊ जिला अस्‍पताल का तम्‍बाकू उन्‍मूलन केंद्र

Photo: क्विंट हिन्दी 

तम्बाकू कितना बड़ा खतरा?

WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल करीब 8 मिलियन लोग तंबाकू की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं. इस आंकड़े में 1.3 मिलियन वो लोग भी शामिल हैं जो खुद तम्बाकू का इस्तेमाल नहीं करते हैं बल्कि उनके आस पास के लोग ऐसा करते हैं. 2020 तक दुनिया भर में लोग तम्बाकू इस्तेमाल करने वालों की संख्या का प्रतिशत 22.3% था. जिसमें 36.7% पुरुष और 7.8% महिलायें शामिल हैं.

तंबाकू के लगातार सेवन या ऐसे लोगो से लगातार संपर्क जो तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं लंग कैंसर, स्ट्रोक, दिल की तमाम बीमारियों को जन्म दे सकता है.

भारत में मौत के सबसे बड़े करणों में से एक तंबाकू भी है. भारत में हर साल 1.35 मिलियन लोग तंबाकू की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. भारत की कुल युवा आबादी (15 साल से ऊपर के लोग) में करीब 29% लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि 266.8 मिलियन युवा आबादी तम्बाकू का इस्तेमाल करती है.

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