वेलेंटाइन डे: ज्यादा इतराइए मत, प्यार सिर्फ एक केमिकल लोचा है!
वेलेंटाइन डे: ज्यादा इतराइए मत, प्यार सिर्फ एक केमिकल लोचा है!
(फोटो: लिजोमोल जोसेफ/ द क्विंट)

वेलेंटाइन डे: ज्यादा इतराइए मत, प्यार सिर्फ एक केमिकल लोचा है!

वेलेंटाइन वीक शुरू हो गया है. इसी के साथ, गिफ्ट, फूल, और सॉफ्ट टॉय का बिजनेस निकल पड़ा है. दुनिया भर के लोग प्यार के नशे में सराबोर हैं. दुनियाभर में इतनी चॉकलेट्स बनाई जा रही हैं, कि अर्थव्यवस्था पर भी उसका असर दिख रहा है. हां, सचमुच कोकोआ की कमी हो गई है. कहा जा रहा है कि 2020 तक चॉकलेट्स खत्म हो जाएंगी.

लेकिन आपको किस बात की चिंता है, आप तो प्यार में हैं. लेकिन एक बात पर गौर फरमाएं कि, अगर इस वेलेंटाइंस डे पर आपके दिल में कुछ-कुछ होता है, और आप सोच रहे हैं कि आप प्यार में हैं? तो भूलिए मत, ये सब हार्मोंस का कमाल है.

प्यार होता क्या है?

दवा. दर्द. लत. 21वीं सदी ने अगर हमें कुछ सिखाया है, तो वो ये है कि प्यार के नाम पर जितने भी जुमले इस्तेमाल किए जाते हैं, उन सब को साइंस की रूखी भाषा में समझाया जा सकता है.

कई फिजिकल स्टडीज के मुताबिक, जब दो लोग मिलते हैं, तो एक-दूसरे को पहचानने के लिए लगभग 200 मिली सेकेंड का वक्त लेते हैं और पहला प्रभाव इसी बात पर बनता है कि वे कैसे दिख रहे हैं. कई स्टडीज दिखाती हैं कि लोग अक्सर सिमिट्रिकल चेहरों या अपने जैसे फिजिकल ट्रेट वालों के प्रति आकर्षित होते हैं.

आवाज और गंध भी अच्छा प्रभाव डालने में मदद करते हैं.

दिमागी खेल

अच्छा दिखना, अच्छा सुनाई देना और अच्छी खुशबू आपको पसंद आती है और उसके बाद का काम दिमाग कर लेता है. दिमाग से कुछ हार्मोन निकलते हैं और बस काम हो गया. डोपामाइन और नोरपिनेफ्राइन जैसे हार्मोंस की वजह से आप खुशी और उतावलापन महसूस करते हैं. आपका दिल तेजी से धड़कने लगता है, चेहरे से गर्मी निकलने लगती है और जरा सी देर में आपको पसीना आ जाता है.

हग करने या किस करने से डोपामाइन का फ्लो बना रहता है और आप खुश रहते हैं. ऐसे में एक और हार्मोन बनता है, ओक्सीटोस‍िन, जिसकी वजह से खुले घाव भरते हैं, एक मां अपने बच्चे से जुड़ाव महसूस करती है और यह सेक्सुअल अराउजल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक-दूसरे को गले लगाने से कोर्टिसोल भी कम होता है, जिससे तनाव कम होता है.

जो लोग प्यार में होते हैं, उनमें सेरोटोनिन भी कम हो जाता है. जिन लोगों को ऑबसेसिव कंपल्सिव डिसॉर्डर होता है, उनमें सेरोटोनिन ज्यादा बनता है.

और प्यार एक ‘ऑबसेशन’ है.

प्यार में नकार दिया जाना

जब किसी को प्यार में नकार दिया जाता है, तो ये ऑबसेशन और बढ़ जाता है. जब आप रूमानी तौर पर जुड़े रहते हैं, तो सेरोटोनिन का स्तर कम और डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आकर्षण बढ़ता है.

दिमाग इस आकर्षण को और बढ़ा देता है. जब नोरएपीनेफ्राइन का स्तर घटता है, तो आपके दिमाग का सामना सच्चाई से होता है. प्यार में नकार दिए जाना आपके लिए तनावपूर्ण होने लगता है. दिलचस्प बात यह है कि प्यार में नकारे जाने पर और शारीरिक चोट लगने पर दिमाग का एक ही हिस्सा एक्टिव होता है.

प्यार में दर्द होता है.

धीरे-धीरे आपके दिमाग को पता चल जाता है कि अब इसे नोरएपिफ्राइन या डोपामाइन की डोज नहीं मिलेगी और फिर सेरोटोनिन और ओबसेशन का स्तर कम होने लगता है. तो अगली बार जब आपके दिल में कुछ-कुछ हो, तो समझ जाएं कि ये सब आपके दिमाग के केमिकल लोचे का असर है.

क्या जनम-जनम के प्यार जैसी कोई चीज नहीं होती? मशहूर बाइलॉजिकल एंथ्रोपोलोजिस्ट डॉ. हेलेन फिशर ने ऐसे 10 पुरुषों और 7 महिलाओं पर MRI स्कैन के जरिए प्रयोग किया, जिनकी शादी को 21 से ज्यादा साल हो चुके थे. उन्होंने पाया कि लंबे चलने वाले रिश्तों में भी नए-नए प्यार जैसी गर्माहट हो सकती है.

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