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"जलता छोड़ भाग गए"- कानपुर बुलडोजर एक्शन में आग से जिंदा बचे शख्स ने सुनाई आपबीती

Kanpur Bulldozer Fire Death: कानपुर में डेमोलिशन अभियान के दौरान आग से मां-बेटी की जलकर मौत

Published
भारत
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उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात (Kanpur Dehat) में प्रशासन के बुलडोजर एक्शन के दौरान एक झोपड़ी में "फंसी" मां और बेटी की जलकर मौत हो गई. यह हादसा कानपुर देहात के रूरा थाने की सीमा के अंदर आने वाले मडौली गांव में सोमवार, 13 फरवरी की दोपहर एक अतिक्रमण विरोधी अभियान (Kanpur anti-encroachment) के बीच हुआ. मृतकों के परिवार ने आरोप लगाया है कि सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ज्ञानेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने उनकी झोपड़ी में आग लगा दी थी और उन्हें जलता छोड़ भाग गए थे.

मरने वालीं मां-बेटी की पहचान प्रमिला दीक्षित (44) और नेहा दीक्षित (21) के रूप में हुई है. घटना में प्रमिला के पति कृष्ण गोपाल दीक्षित भी झुलस गए, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

इसके बाद, कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षक (SP) बीबीजीटीएस मूर्टी, कानपुर के ADG (जोन) आलोक सिंह सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया.

परिजनों की शिकायत के आधार पर SDM ज्ञानेश्वर प्रसाद, थानाध्यक्ष दिनेश कुमार गौतम, गांव के ही पीड़ित परिवार के विरोधियों व राजस्व व पुलिस विभाग के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ हत्या व आईपीसी की अन्य संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गयी है. राज्य पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.

"SDM, लेखपाल ने घर में लगाई आग"

मृतकों के पीड़ित परिवार ने दावा किया कि अधिकारी उनके विरोधियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे. पिछले महीने ही 14 जनवरी को, "ग्राम सभा" की भूमि पर अवैध निर्माण की शिकायतों का हवाला देते हुए पीड़िता के घर को अधिकारियों ने कथित रूप से गिरा दिया था.

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हालांकि 14 जनवरी के डेमोलिशन के दौरान, अधिकारियों ने एक घास-फूस की झोपड़ी को छोड़ दिया था और परिवार को इसे खुद हटाने के लिए कहा था. इसके बाद परिवार ने राहत के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. डेमोलिशन के पहले दौर के एक महीने बाद, बुलडोजर के साथ पुलिस 13 फरवरी को फिर से लौटी.

FIR के अनुसार आग लगी झोपड़ी से बच निकलने वाले बेटे शिवम दीक्षित ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि एसडीएम प्रसाद के इशारे पर उनकी अस्थायी झोपड़ी को बुलडोजर से तोड़ दिया गया और आग लगा दी गई. हादसे के ऑनलाइन सामने आए एक कथित वीडियो में, एक झोपड़ी के अंदर महिलाओं को चिल्लाते और जोरदार विरोध करते हुए सुना जा सकता है, जबकि मौके पर मौजूद पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दे रहे हैं.

मीडिया से बात करते हुए शिवम ने कहा, "SDM, लेखपाल और अन्य लोगों ने घर में आग लगा दी. हम अंदर थे. मैं और मेरे पिता किसी तरह बाहर निकले. मेरी मां और बहन की जलकर मौत हो गई. आग लगने के बाद अधिकारी वहां से भाग गए."

"सब भाग गए. उसके बाद हम अंदर घुसे फिर भी उन्हें (मां और बहन) बाहर नहीं निकाल पाए. वजन इतना था कि उन्हें हम उठा ही नहीं पाए."
बेटा शिवम दीक्षित
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"प्रशासन के लोग हमें जलते हुए छोड़ के भाग गए"

घटना में मृतका प्रमिला के पति कृष्ण गोपाल दीक्षित भी झुलस गए हैं. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा

"गांव के काफी लोग आए. उन्होंने कहा कि आग लगा दो जबकि हम अंदर थे. हम लोग बड़ी मुश्किल से बाहर निकल आये.. प्रशासन के लोग हमें जलते हुए छोड़ के भाग गए. "

"क्या आप इससे पहले प्रशासन से मिलने गए थे?" इस सवाल पर कृष्ण गोपाल दीक्षित ने कहा कि "इससे पहले डीएम हमसे नहीं मिलीं जबकि एसपी साहब हमें मारने दौड़े थे, उन्होंने हमें डांट कर भगा दिया.

"मां और बेटी ने दरवाजा बंद कर खुद को जला लिया"- पुलिस का दावा 

कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षक (SP) बीबीजीटीएस मूर्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "प्रथम दृष्टया हमें यह जानकारी मिली है कि जब पुलिस वहां हटाने के लिए पहुंची तो मां और बेटी ने अंदर से दरवाजा लगा लिया था और खुद को जला लिया. हम पूछताछ कर रहे हैं. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. हम उचित कार्रवाई करेंगे."

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"बीजेपी ने बुलडोजर को अपनी गैरकानूनी ताकत दिखाने का प्रतीक बना लिया है"

समाजवादी पार्टी ने इस घटना को लेकर सूबे की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है. मामले के आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग करते हुए पार्टी ने ट्वीट किया कि "बीजेपी ने बुलडोजर को अपनी गैरकानूनी ताकत दिखाने का प्रतीक बना लिया है! कानपुर देहात में SDM और लेखपाल ने गरीब परिवार का घर बुलडोजर से किया ध्वस्त, आग लगने के कारण मां बेटी की जिंदा जलकर हुई मौत. इस दिल दहला देने वाली वारदात से पूरा प्रदेश स्तब्ध है. दोषियों को मिले सख्त सजा."

SP नेता मनोज पांडेय के नेतृत्व में पार्टी के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 14 फरवरी को घटनास्थल पर जाकर जीवित परिजनों से मुलाकात करने की योजना बनाई थी. हालांकि पार्टी ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रशासन ने रोक दिया है और यह बेहद निंदनीय है.

कांग्रेस ने भी योगी सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसकी बुलडोजर नीति ने दो लोगों की जान ले ली. कांग्रेस ने ट्वीट कर लिखा है, "यूपी में तानाशाही चरम पर है. कानपुर में ब्राह्मण परिवार का मंदिर तोड़ दिया गया, घर पर बुलडोजर चला दिया गया. ब्राह्मण परिवार अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ाता रहा... एक न सुनी गई. आखिर में परेशान होकर घर की महिलाओं ने खुद को आग लगा ली... मौत हो गई. योगी के बुलडोजर ने 2 जान ले ली."

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