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कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री में क्या फर्क? कौन ज्यादा पावरफुल?

मोदी सरकार की नई कैबिनेट में 30 मंत्री हैं जबकि 5 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए हैं, वहीं 36 राज्य मंत्री हैं.

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भारत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की मंत्रिमंडल की घोषणा हो चुकी है. इस बार 71 सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. इसके साथ ही सभी के बीच मंत्रालयों का बंटवारा भी हो गया है.

मोदी सरकार की कैबिनेट में 30 मंत्री हैं जबकि 5 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाए गए हैं, वहीं 36 राज्य मंत्री हैं.

अब आप इस उलझन में पड़ गए होंगे कि ये कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री के बीच का फर्क क्या है? और ये स्वतंत्र राज्य मंत्री किस बात को लेकर स्वतंत्र है?

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हम आपके सब आसान भाषा में समझाएंगे लेकिन इससे पहले जानते हैं कि मंत्रिपरिषद के गठन के लिए क्या नियम-कायदे हैं.

संविधान के 91 वें संशोधन के मुताबिक, किसी भी सरकार में लोकसभा के कुल सदस्यों के 15 फीसदी को ही केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.

फिलहाल एनडीए गठबंधन वाली पीएम मोदी की सरकार में 71 सासंदों को मंत्री बनाया गया है, यानी अभी भी 9 लोगों को मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि कई सदस्यों को एक से ज्यादा मंत्रालय दिए गए हैं.

कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और स्वतंत्र राज्य मंत्री में क्या अंतर?

कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य में मंत्री में सबसे निचले पायदान पर होता राज्य मंत्री.

राज्य मंत्री

किसी भी राज्य मंत्री का काम होता है उस विभाग के कैबिनेट मंत्री की मदद करना. राज्य मंत्री कैबिनेट बैठक में नहीं जा सकते हैं. इन्हें कैबिनेट मंत्री को रिपोर्ट करना होता है. कैबिनेट मंत्री की अनुपस्थिति में राज्य मंत्री को ही मंत्रालय का प्रभार दिया जाता है.

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किसी कैबिनेट मंत्री के अधीन नहीं होते है. इनका विभाग स्वतंत्र होता है और इस मंत्रालय का सारा जिम्मा स्वतंत्र राज्य मंत्री के हाथ में होता है. स्वतंत्र राज्य मंत्री सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है. हालांकि स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री भी कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं.

कैबिनेट मंत्री

कैबिनेट मंत्री वो पद है जो सरकार के सभी फैसले में अहम भूमिका होता है. कैबिनेट मंत्री को कैबिनेट बैठक में शामिल होना अनिवार्य होता है.

किसी भी मंत्रालय का सारा दारोमदार कैबिनेट मंत्री पर होता है. कैबिनेट मंत्री के नीचे उसका राज्य मंत्री होता है जो उसके सहायक के तौर पर काम करता है.

गौरतलब है कि मंत्री बनने के बाद सासंदों को सांसद भत्ता के अलावा भी वेतन में इजाफा हो जाता है और इसके अलावा कई और सुविधाएं मिलती हैं.

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