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यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल 65 घंटे बाद खत्म, ऊर्जा मंत्री से बनी सहमति

यूपी उर्जा मंत्री एके शर्मा के साथ तीन राउंड की बैठक के बाद बिजली कर्मचारियों को मिला आश्वासन.

Published
भारत
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यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल करीब 65 घंटे बाद खत्म हो गई है. संघर्ष समिति ने ये हड़ताल एक दिन पहले ही खत्म करने की घोषणा कर दी. समिति ने 72 घंटे कार्य के बहिष्कार की घोषणा की थी, जिसे सरकार के आश्वासन के बाद खत्म कर दिया गया. हड़ताल खत्म होने के बाद ऊर्जा मंत्री ने सघर्ष समिति के पदाधिकारियों से कहा है कि बिजली सप्लाई जल्द से जल्द शुरु की जाए. चलिए जानते हैं सरकार से क्या आश्वासन मिला है. उनकी क्या मांग थी?

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कर्मचारियों को सरकार से क्या मिला आश्वासन?

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कर्मचारी संगठनों की जो भी मांग या भावनाए हैं. उन सब पर बात करके सार्थक परिणाम तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे. इसके साथ ही इस आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को वापस लेने का निर्देश दे दिया है.

बैठक के बाद बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया और काम पर वापस जाने की बात कही. सरकार की ओर से भरोसा मिला है कि जिन 3000 लोगों को निकाला गया था, 22 लोगों पर एस्मा लगाया था, 29 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, उन सबको सरकार वापस लेगी.

कर्मचारी क्यों कर रहे थे हड़ताल?

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के मुताबिक, 3 दिसम्बर 2022 को योगी सरकार और बिजलीकर्मियों के बीच एक समझौता हुआ था. जिसमें कई बिन्दुओं पर सहमति बनी थी.

  • ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक का चयन समिति द्वारा किया जाना.

  • तीन प्रमोशन पदों के समयबद्ध वेतनमान का आदेश किया जाना.

  • बिजली कर्मियों के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉईज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाना.

  • बिजली उत्पादन इकाइयों का निजीकरण.

  • ऊर्जा निगम अध्यक्ष का नियम विरुद्ध चयन.

  • नोएडा जैसे शहरों में प्राइवेट कंपनियों से बिजली सप्लाई का ठेका वापस लेने की मांग.

  • ओबरा और अनपरा की नई विद्युत उत्पादन इकाइयों को NTPC को देने पर असहमति.

  • विद्युत उपकेन्द्रों के परिचालन और अनुरक्षण की आउटसोर्सिंग को बंद करना समेत अन्य कई बिंदु शामिल थे.

मुख्यमंत्री के आह्वान, ऊर्जा मंत्री के आश्वासन और हाईकोर्ट के सम्मान में हड़ताल वापस हुई है. हालांकि, एक बार फिर से हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला है. मगर, ऊर्जा मंत्री ने समझौते का आश्वासन दिया है.
शैलेंद्र दुबे, समिति के संयोजक

सरकार की तरफ से ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने समझौते के बिंदुओं को लागू करने के लिये 15 दिन का समय मांगा था. अब तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन समझौते पर कोई अमल नहीं किया गया. इसलिए ये आंदोलन शुरु हुआ.

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क्या है कर्मचारियों की मांग?

  • बिजली कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिले.

  • कई वर्षों से लंबित बोनस का भुगतान किया जाए. 

  • ट्रांसफॉर्मर वर्कशॉप के निजीकरण का आदेश वापस हो. 

  • 746/400/220 KV विद्युत उपकेंद्रों को आउटसोर्सिंग के जलिए चलाने का निर्णय रद्द हो.

  • आगरा फ्रेचाईजी और ग्रेटर नोएडा का निजीकरण रद्द हो.

  • पावर सेक्टर इम्पलॉइज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए. 

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