JNU के पंकज को ‘मोईनुद्दीन’ बताकर सर्कुलेट की जा रही तस्वीर  

भ्रामक दावों के साथ JNU के कई प्रदर्शनकारी छात्रों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं.

Published21 Nov 2019, 05:40 PM IST
वेबकूफ
2 min read

जेएनयू के छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान फर्जी खबर फैलाने वालों ने यूपी के 30 वर्षीय पंकज मिश्रा को केरल के 47 वर्षीय मोइनुद्दीन के तौर पर पेश कर दिया.
जेएनयू के छात्रों ने नए हॉस्टल मैनुअल का विरोध जारी रखा है. ऐसे में प्रदर्शनकारी छात्रों को फेक न्यूज फैक्ट्रियों द्वारा टार्गेट किया जा रहा है. भ्रामक दावों के साथ कई प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलाई गई हैं.

ऐसे ही एक मामले में, 30 वर्षीय पंकज मिश्रा की तस्वीर गलत दावे के साथ सोशल मीडिया में शेयर हो रही हैं. दावा किया जा रहा है कि तस्वीर में दिखने वाला जेएनयू छात्र केरल का रहने वाला 47 वर्षीय मोइनुद्दीन है. साथ में यह भी दावा किया गया है कि वह 1989 से यानी 30 वर्षों से जेएनयू में पढ़ रहा है.

 JNU के पंकज को ‘मोईनुद्दीन’ बताकर सर्कुलेट की जा रही तस्वीर  

हालांकि पंकज केरल से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से हैं और इसी साल उन्होंने जेएनयू में एडमिशन लिया है. मौजूदा समय में वह सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ में एमफिल कर रहे हैं.

द क्विंट से बात करते हुए उन्होंने कहा, “ मेरी छवि को धूमिल करने की कोशिश में इस पोस्ट को बीजेपी नेताओं, आरएसएस विचारकों ने रीट्वीट किया है. यह एक व्यक्ति पर हमला है.”  

पंकज और उनके परिवार पर फेक न्यूज का असर

पंकज ने आगे बताया कि कैसे उनके माता-पिता तब से फिक्रमंद हैं, जब से वह फर्जी खबरों का शिकार बने हैं. वो बताते हैं, "मेरे माता-पिता खाना नहीं खा पाए हैं. वे चिंतित हैं कि क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है और मुझपर क्यों दाग लग रहा है. मेरे दोस्तों ने ये पूछने के लिए 20-30 बार फोन किया है कि क्या मैं ठीक हूं. मैं पिछले 2-3 दिनों से उदास हूं,”

सोशल मीडिया पर ट्रोल होना फिलहाल उनकी एकमात्र चिंता नहीं है. उन्हें डर है कि वह "सरकार के खिलाफ प्रदर्शन" करने के लिए मुसीबत में पड़ सकते हैं.

“आपने मुझे 47 वर्षीय मोइनुद्दीन के रूप में पहचाना है ... कल को अगर मैं कहीं सड़क पर जा रहा हूं, तो कोई भी मुझसे सिर्फ यह कहते हुए मारपीट सकता है कि मैं एक जेएनयू छात्र हूं जो सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है. हम ऐसा नहीं कर रहे हैं. देश के खिलाफ प्रदर्शन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन दो अलग-अलग चीजें हैं.”
-पंकज मिश्रा, जेएनयू छात्र

फर्जी खबरें फैलाने वालों के लिए पंकज के पास एक मैसेज है :

“आप एक तस्वीर में घेरा लगा सकते हैं और इसके साथ कुछ भी लिख सकते हैं. इससे आपके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन एक व्यक्ति और उनके परिवार पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए.”

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