क्या राहुल गांधी का प्रवासियों से मिलना एक नाटक था? गलत है दावा

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ये दावा किया

Published27 May 2020, 09:12 AM IST
वेबकूफ
2 min read

16 मई को, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास कुछ प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की. उन्होंने प्रवासियों के साथ बातचीत की और उनकी यात्रा की व्यवस्था भी की. हालांकि सत्ताधारी बीजेपी के अधिकांश नेताओं ने राहुल गांधी के इस कदम को फोटो-ऑपुरचिनिटी करार दिया.

अब, सोशल मीडिया पर कई ऐसी फोटो शेयर की जा रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी जिन प्रवासी मजदूरों से मिले थे, वो मजदूर नहीं बल्कि कांग्रेस के ही कार्यकर्ता हैं.

हालांकि, ये दावा गलत है. राहुल गांधी ने जिनके साथ मुलाकात की थी, वो वास्तव में प्रवासी मजदूर हैं, न की कांग्रेस के कार्यकर्ता.

दावा

राहुल गांधी ने जिन प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की थी, उनकी कुछ फोटो को लगातार सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. इन लोगों को एक कार में बैठे देखा जा सकता है और ऐसा दावा किया जा रहा है कि ये प्रवासी मजदूर नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही लोग हैं, जिन्होंने पूरा सेटअप तैयार किया.

 क्या राहुल गांधी का प्रवासियों से मिलना एक नाटक था? गलत है दावा
(फोटो : ट्विटर/स्क्रीनशॉट)
 क्या राहुल गांधी का प्रवासियों से मिलना एक नाटक था? गलत है दावा
(फोटो : ट्विटर/स्क्रीनशॉट)
 क्या राहुल गांधी का प्रवासियों से मिलना एक नाटक था? गलत है दावा
(फोटो:स्क्रीनशॉट)

हमें जांच में क्या मिला?

हमने कांग्रेस के ट्विटर हैंडल की जांच की, जहां हमें 2 प्रवासी मजदूरों की फोटो मिली जिनके बारे में ये दावा किया जा रहा था.

द टाइम्स ऑफ इंडिया और फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बातचीत के बाद, राहुल गांधी ने 25 प्रवासियों को उनके घर भेजने की व्यस्था की.

हमें न्यूज एजेंसी एएनआई का एक ट्वीट भी मिला, जिसमें बताया गया है कि कांग्रेस नेता ने प्रवासियों को उनके घर पहुंचने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की है. इस ट्वीट में उन 2 प्रवासी मजदूरों को भी साफ देखा जा सकता है, जिन्हें लेकर ये दावा किया जा रहा है.

इंडिया टीवी द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो में, प्रवासियों को कारों के अंदर बैठे देखा जा सकता है. वीडियो में 1 मिनट और 29 सेकंड पर, दो लोगों को कार में प्रवेश करते देखे जा सकते हैं.

जाहिर है, जिन लोगों को कांग्रेस का कार्यकर्ता बताया जा रहा है, वो दरअसल प्रवासी मजदूर ही हैं, जो अपने घर जाने के लिए उस कार में बैठे है.

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