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Hijab Protest: भारत हो या ईरान, महिलाओं की मर्जी का सम्मान होना चाहिए

ये जो दुनिया है ना, यहां अगर हम औरतों की इज्जत करते हैं तो उनकी मर्जी की भी इज्जत करनी होगी.

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ईरान (Iran) की ये महिलाएं नहीं चाहतीं कि उन्हें जबरन हिजाब (Hijab) पहनाया जाए. ये हिजाब जला रही हैं, विरोध में अपने बाल काट रही हैं. ये कहना चाहती हैं कि हिजाब या नो हिजाब, इनकी मर्जी है और इसकी कद्र होनी चाहिए.

कर्नाटक (Karnataka) की लड़कियां हिजाब पहनकर कॉलेज जाना चाहती हैं. ये उनकी मर्जी है और इसकी भी कद्र होनी चाहिए. अमेरिका की ये महिलाएं गर्भपात (Abortion) का अधिकार चाहती हैं. ये उनकी मर्जी है और इसकी इज्जत होनी चाहिए.

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अगर पाकिस्तान महिला फुटबॉल टीम की लड़कियां शॉर्ट्स पहनाना चाहती हैं तो ये उन लड़कियों की मर्जी है.

अगर फिनलैंड की प्रधानमंत्री घर में अपने दोस्तों के साथ पार्टी करना चाहती हैं तो ये इनकी मर्जी है.और अगर भारत में कोई भी पति अपनी पत्नी की मर्जी के बगैर उस से सेक्स करता है तो ये मैरिटल रेप है. और इसे अपराध माना जाना चाहिए. क्योंकि सेक्स करना या ना करना, ये पत्नी की भी मर्जी है और पति को उस मर्जी की इज्जत करनी चाहिए.

सऊदी अरब में अगर कोई महिला शादी करना चाहती है, तो उसे इजाजत लेनी पड़ती है, एक पुरातन ‘गार्डियनशिप’ कानून के तहत. जब की शादी कब करनी है, किससे करनी है, या शादी करनी भी है या नहीं, ये सब उस महिला की मर्जी होनी चाहिए.

ये जो दुनिया है ना, यहां अगर हम औरतों की इज्जत करते हैं तो उनकी मर्जी की भी इज्जत करनी होगी

लेकिन ईरान से दुखद खबरें आ रही हैं. 22 साल की महसा अमीनी की ईरान की मोरल पुलिस के हाथों हत्या पर जो प्रदर्शन हो रहें हैं. कई प्रदर्शनकारियों को भी मारा गया है. ज्यादातर औरतें जिन में से कई नाबालिग थीं. क्या महिलाओं को अपनी मर्जी की अहमियत बताने के लिए मरना पड़ेगा?

और भारत में भी यह इतना मुश्किल क्यों है? कुछ मुस्लिम लड़कियां हिजाब पहन कर कॉलेज या स्कूल जाना चाहती हैं. जब सोच विचार कर वो अपनी मर्जी बता रही हैं, तो हमें उनकी मर्जी स्वीकार करनी चाहिए. लेकिन उल्टा, उनकी मर्जी पर रोक लगाकर कर्नाटक सरकार ना सिर्फ उनकी मर्जी को नजरअंदाज कर रही है, बल्कि उनके शिक्षा के अधिकार का भी हनन कर रही है. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में छात्रों को अपनी ही सरकार से अपनी मर्जी मनवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ रहा है.  

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अमेरिका में भी, गर्भपात के मुद्दे पर देश बंटा हुआ है. कुछ महिलाएं गर्भपात को अपना अधिकार मानती हैं तो कुछ इसे गलत मानती हैं. लेकिन कुछ लोग गर्भपात पर कानूनी रोक चाहते हैं. फिर से सवाल वही है, गर्भपात पर रोक क्यों? गर्भपात करो या न करो. क्यों ना इन दोनों विकल्पों की इज्जत की जाए?

और यह बात जरुरी क्यों है? क्योंकि महिलाओं की मर्जी की बात, लैंगिक समानता, यानी जेंडर इक्वालिटी की बुनियाद है. अगर आप किसी महिला से उसकी मर्जी का अधिकार छीन लेते हैं तो वहीं पर लैंगिंग समानता का अंत हो जाता है. और इसिलए हमारे अपने देश में.. मैरिटल रेप को अपराध न बनाया जाना बताता है कि अभी इंडिया में जेंडर इक्वालिटी बड़ी दूर की बात है. आखिर, मैरिटल रेप क्या है? शादी में यौन हिंसा, एक पति का पत्नी के साथ जबरदस्ती करना. वो सेक्स करना चाहती है या नहीं, उसे यह चुनने का अधिकार न देना. और इस मर्जी के बिना, शादी को बराबरी का रिश्ता नहीं कहा जा सकता.

एक प्रधानमंत्री अपनी दोस्तों के साथ पार्टी करती है और उसे गलत कहना पाखंडबाज है. एक महिला फुटबॉल टीम का शॉर्ट्स पहनना. इसे गलत कहना पाखंडबाज है. सऊदी अरब में किसी युवा महिला को अपनी मर्जी से शादी ना करने देना। यह भी पाखंडबाज है. दोगलापन है.

ये जो दुनिया है ना...यहां आज ईरान हो या अमेरिका, भारत हो या पाकिस्तान या फिर फिनलैंड या सऊदी अरब...हमारे पास महिलाओं की च्वाइस की इज्जत करने के सिवा कोई च्वाइस नहीं है.

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