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Pakistan Election 2024: इमरान नहीं तो फिर कौन है चुनावी मैदान में,क्या दांव पर,चुनाव में देरी क्यों

पाकिस्तान में ये लगातार तीसरा ऐसा चुनाव होगा, जिसमें कोई प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पा रहा है

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पाकिस्तान (Pakistan Election 2024) के लिए एक अभूतपूर्व समय से गुजर रहा है. पाकिस्तान में एक बार फिर संसदीय चुनाव दहलीज पर खड़ा है, ये लगातार तीसरा ऐसा चुनाव होगा, जिसमें कोई प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पा रहा है, क्योंकि वे या तो सैन्य हस्तक्षेप के आरोपों से घिर जाता है या किसी अन्य विवाद में फंस जाता है.

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पाकिस्तान में 8 फरवरी को 12वें आम चुनाव होने हैं. ऐसे में नवाज शरीफ की जीत पक्की होती दिख रही है, शरीफ तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री हैं जो हाल ही में आत्म-निर्वासन से लौटे हैं.

2018 के चुनाव से पहले भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने के बावजूद, शरीफ को लेकर चल रहे कानूनी मामले खत्म हो गए हैं, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि अब उन्हें इमरान खान की तुलना में पाकिस्तान की सेना द्वारा एक नेता के रूप में पसंद किया जाता है, क्योंकि इमरान खान अब समर्थन खो चुके हैं.

हालांकि, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और उसके नेता, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कई महीनों तक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. इस बात को लेकर भी चिंताएं हैं कि क्या कार्यवाहक सरकार और चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव करा पाएंगे.

महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव तब हो रहा है जब पाकिस्तान देश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है, जिसके कारण आसमान छूती महंगाई और तनावपूर्ण आंतरिक राजनीतिक स्थिति पैदा हो गई है.

कैंडिडेट नंबर 1: इमराम खान (?)

अप्रैल 2022 में अविश्वास मत में खान को प्रधानमंत्री पद से हटाने के बाद इमरान खान और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान को गोली मारी गई, उन पर दंगों से लेकर आतंकवाद तक के 180 आरोपों से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जा रहा है, और तोशखाना भ्रष्टाचार के दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल में रखा गया है, उन पर सरकारी उपहार बेचने का आरोप है. बड़े स्तर पर जन समर्थन होने के बावजूद, 71 साल के खान के लिए राजनीतिक वापसी की संभावनाएं कमजोर लग रही हैं.

कराची में पीटीआई के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर द क्विंट को बताया कि, "पाकिस्तान की सेना हमारे प्रमुख और पार्टी को किनारे करने के लिए कई रणनीति अपना रही है."

उन्होंने कहा कि, “उन्होंने उनके (इमरान खान के) नामांकन पत्रों को खारिज कर दिया, हमारे हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया, हमारे नेताओं को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया.”

हाल ही में इमरान खान को अपनी पार्टी का चुनाव चिन्ह क्रिकेट बैट के इस्तेमाल से भी रोक दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान की 40 फीसदी आबादी जो अशिक्षित है और चुनाव में चिन्हों को देख कर ही वोट देती है - खान उनका समर्थन कैसे जुटाएंगे. इस बैन के कारण पार्टी के कार्यकर्ता चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा भी नहीं ले पाएंगे और फिर वे निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मजबूर होंगे जिसमें उन्हें फेमस क्रिकेट बैट को छोड़कर रोलरकोस्टर, बकरी, सिक्के जैसे चुनावी चिन्हों का उपयोग करना पड़ेगा.
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कैंडिडेट नंबर 2: नवाज शरीफ

पाकिस्तान के तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अक्टूबर 2023 में अपने वतन लौट आए हैं, देश की सर्वोच्च अदालत ने शरीफ को अयोग्य ठहराने वाले 6 साल पुराने फैसले को पलट दिया था जिसके नवाज शरीफ का आत्म-निर्वासन समाप्त हुआ.

जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री को उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया था, जब वह लंदन में अपनी बीमार पत्नी की देखभाल कर रहे थे. अल-अजीजिया चीनी मिल मामले में शरीफ पर सात साल की कैद और 1.5 बिलियन का जुर्माना भी लगाया गया था.

अक्टूबर 2023 में, शरीफ को दो भ्रष्टाचार मामलों में जमानत दी गई थी, और एक अदालत ने तोशाखाना मामले में उनके गिरफ्तारी वारंट को निलंबित कर दिया था, जिससे देश में उनकी वापसी के लिए सभी कानूनी बाधाएं दूर हो गईं. उन्हें 2019 में चिकित्सा आधार पर चीनी मिल मामले में अंतरिम जमानत दी गई थी.

नवाज शरीफ की पुरानी पार्टी के घोषणापत्र में मुख्य रूप से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना, भारत के साथ शांति को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन को संबोधित करना और आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता का रुख अपनाना है.

घोषणापत्र में, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने भारत सहित पड़ोसी देशों को "शांति का संदेश" देने का वादा किया है, जिसमें नई दिल्ली द्वारा धारा 370 को निरस्त करने की बात कही गई है. अन्य प्रमुख एजेंडा में "सुरक्षित जल भविष्य" सुनिश्चित करना और बढ़े हुए एक्सपोर्ट के जरिए से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना शामिल है.

पीएमएल-एन संसदीय, प्रांतीय और लोकल सरकारी लेवल पर राष्ट्रीय राजनीति में युवा प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए भी प्रतिबद्ध है.

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कैंडिडेट नंबर 3: बिलावल भुट्टो जरदारी

पूर्व विदेश मंत्री और दो प्रधानमंत्रियों के परिवार से आने वाले 35 वर्षीय बिलावल भुट्टो जरदारी देश में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता को दूर करने के लिए नए विचारों और नेतृत्व की वकालत कर रहे हैं.

बिलावल, पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे हैं, बेनजीर की 2007 में हत्या कर दी गई थी. बिलावल की एक पहचान और है कि वो पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के पोते हैं जिन्हें 1979 में एक सैन्य तानाशाह द्वारा मार डाला गया था. यानी भुट्टो जरदारी पाकिस्तान के एक सम्मानित राजनीतिक परिवार की विरासत रखते हैं.

बिलावल की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने 'चुनो नई सोच को' नाम से अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें खुद की पार्टी को आर्थिक रूप से तनावपूर्ण देश में गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई को संबोधित करने के लिए एक व्यापक योजना वाली "एकमात्र पार्टी" के रूप में बताया.

पीपीपी का घोषणापत्र तत्काल प्राथमिकताओं के रूप में विकास, निवेश और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करके लोगों की आय को दोगुना करने का वादा करता है, गरीबी उन्मूलन और कामकाजी और निचले वर्गों की भलाई पर अपना ध्यान केंद्रित करता है, घोषणापत्र स्वास्थ्य सुविधाओं को संबोधित करता है , शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, और महिला सशक्तिकरण पर भी फोकस है.

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मतदान में देरी क्यों?

तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह के आधार पर, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा 10 अगस्त 2023 को नेशनल असेंबली को समय से पहले भंग करने के बाद पाकिस्तान में आम चुनाव शुरू में 90 दिनों के अंदर होने वाले थे. यानी चुनाव 8 नवंबर 2023 तक होने की उम्मीद थी.

लेकिन, 2023 डिजिटल जनगणना के परिणामों की मंजूरी के कारण, चुनावों में देरी का सामना करना पड़ा, क्योंकि सरकार ने जनगणना परिणामों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से परिसीमन की जरूरत का हवाला दिया था. तभी चुनाव फरवरी 2024 में प्रस्तावित थे.

चुनाव के संभावित स्थगन के बारे में अटकलों के बावजूद, पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने एक बयान जारी कर इस बात पर जोर दिया कि चुनाव स्थगित नहीं किया जा सकता है और तारीख राष्ट्रपति अल्वी के साथ परामर्श के बाद निर्धारित की गई थी.

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सेना, आर्थिक परेशानियां जारी हैं

एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान के 76 साल के इतिहास में तीन दशकों से अधिक समय तक, प्रभावशाली सेना ने देश पर काफी नियंत्रण रखा है. यहां तक ​​कि जब सेना आधिकारिक तौर पर सत्ता में नहीं थी, तब भी उसे राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप करने के आरोपों का सामना करना पड़ा था. जनरल अयूब खान (1958-1969), याह्या खान (1969-1971), जिया-उल-हक (1977-1988) और परवेज मुशर्रफ (1999-2008) के नेतृत्व में तख्तापलट के माध्यम से देश में सैन्य शासन देखा गया.

नवंबर 2022 में अपने विदाई भाषण के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने खुले तौर पर नवाज शरीफ को हटाने के बाद इमरान खान को सत्ता में लाने में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया था.

हालांकि, आगामी चुनाव सैन्य प्रभाव से परे है क्योंकि पाकिस्तान महत्वपूर्ण सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है.

हाल ही में ईरान द्वारा पाकिस्तानी-ईरानी सीमा पर आतंकवादी समूह जैश-अल-अदल को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों से तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और ईरान पर सैन्य हमले कर इसका जवाब दिया.

इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान को अफगानिस्तान में होने वाले आतंकवादी हमलों से खतरा है, जहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में तालिबान शासन स्थापित करना चाहता है.

देश आर्थिक चुनौतियों से भी जूझ रहा है, महंगाई दर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है, बिजली की कमी है, निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट है.

दुनिया के पांचवें सबसे अधिक आबादी वाले देश और परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र के रूप में, पाकिस्तान आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है.

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