टीम इंडिया ने पिछले साल टेस्‍ट सीरीज में इंग्‍लैंड को 4-0 से मात दी थी (फोटो: BCCI)
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विराट हैं कोहली: टीम इंडिया करेगी वर्ल्ड क्रिकेट पर राज

मॉडर्न क्रिकेट के सबसे सफल और चहेते कप्तानों में एक स्टीव वॉ ने कहा था कि रविचंद्रन अश्विन बॉलिंग के डॉन ब्रैडमैन हैं और इसे अब तक जज्ब नहीं कर पाए हैं. चेन्नई का यह लड़का वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे महान गेंदबाजों से भी आगे निकल गया है.

आंकड़ों की बात करें, तो वह डेनिस लिली, शेन वॉर्न, क्लैरी ग्रिमेट, माइकल होल्डिंग, बिल ओ राइली, बिशन सिंह बेदी, बीएस चंद्रशेखर, अनिल कुंबले, इमरान खान, वसीम अकरम, वकार यूनिस, अब्दुल कादिर, रिचर्ड हेडली और ग्लेन मैकग्रा से बेहतर हैं.

अश्विन ने 45 टेस्ट मैच में 250 विकेट लिए हैं. यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों से कम मैच खेले हैं.

वहीं, भारतीय क्रिकेट के नायकों में से एक कपिल देव कह चुके हैं कि अब तक उन्होंने जितने बल्लेबाज देखे हैं, उनमें विराट कोहली सबसे अच्छे हैं. कपिल ने यह भी कहा था कि कोहली में सचिन तेंदुलकर और विवियन रिचर्ड्स की मिली-जुली छाया दिखती है.

कुछ साल पहले सचिन तेंदुकर से किसी भारतीय बल्लेबाज की तुलना करने का साहस कोई नहीं जुटा सकता था. तब उन्हें क्रिकेट का भगवान माना जाता था.

क्रिकेट का भगवान कहलाने वाले भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (फोटो: फेसबुक/@SachinTendulkar)
क्रिकेट का भगवान कहलाने वाले भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (फोटो: फेसबुक/@SachinTendulkar)

क्या विराट और अश्विन देश की आज तक की सबसे महान टीम का हिस्सा हैं?

विराट का परफॉर्मेंस 2016 में शानदार रहा है. उन्होंने लगातार चार सीरीज में चार डबल सेंचुरी मारी और इस मामले में ब्रैडमैन से भी आगे निकल गए. विराट और अश्विन दोनों करियर के पीक पर हैं और उन्हें कई ऊंचाइयां छूनी हैं, लेकिन वॉ और कपिल के बयान से उस टीम की ताकत का भी पता चलता है, जिसका वे दोनों हिस्सा हैं.

कोहली की लीडरशिप में पिछले 19 टेस्ट मैचों में एक में भी हार नहीं हुई है और इनमें 15 में उसने जीत हासिल की है. यह एक रिकॉर्ड है. बतौर कप्तान 23 टेस्ट मैच के बाद कोहली इस मामले में सिर्फ स्टीव वॉ से पीछे हैं, जिन्होंने इतने मैचों में 17 में जीत हासिल की थी.

सौरभ गांगुली की टीम के पास सबसे अच्छी बैटिंग लाइनअप थी. उसमें वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और खुद गांगुली शामिल थे. उनकी तुलना सिर्फ ब्रैडमैन या क्लाइव लॉयड की टीम की बैटिंग से की जा सकती है. बहुत कम ऐसी टीमें रही हैं, जिनमें एक साथ इतने टैलेंटेड बल्लेबाज रहे हों. हालांकि उसे भारत की सर्वश्रेष्ठ टीम नहीं कहा जा सकता क्योंकि उसमें ऑल-राउंडर्स कम थे और निचले क्रम की बल्लेबाजी अच्छी नहीं थी.

क्या कोहली की टीम बैटिंग में कमजोर ?

आप चाहें तो कह सकते हैं कि कोहली की टीम बैटिंग डिपार्टमेंट में कुछ कमजोर है, लेकिन मैं यह नहीं मानता. अगर कपिल देव को लग रहा है कि कोहली सचिन से कुछ बेहतर हैं, तो चेतेश्वर पुजारा भी राहुल द्रविड़ की तरह भरोसेमंद बल्लेबाज हैं. पुजारा का 43 टेस्ट मैचों में प्रति इनिंग बैटिंग एवरेज 49 रनों का है, जबकि द्रविड़ का 162 मैचों में 52 का.

इसमें शक नहीं कि सहवाग ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर बहुत आक्रामक थे, लेकिन मुरली विजय, शिखर धवन और लोकेश राहुल की तिकड़ी सहवाग और गौतम गंभीर की जोड़ी से कम नहीं है. लक्ष्मण महान बल्लेबाज थे, लेकिन अजिंक्य रहाणे भी संकट के वक्त उतने ही स्टायलिश, असरदार और भरोसेमंद हैं. 33 टेस्ट मैचों में उनका एवरेज 48 का है और यह लक्ष्मण के पूरे करियर के 45.97 के औसत से अच्छा है.

लोअर ऑर्डर में इस टीम के पास ऋद्धिमान साहा, अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे लोग हैं. अश्विन 4 शतक लगा चुके हैं, जबकि साहा 2. दोनों का बैटिंग एवरेज 32 से अधिक है, जो ऑलराउंडर के लिहाज से अच्छा है.

जडेजा के नाम चार हाफ सेंचुरी दर्ज हैं. टीम में तीन भरोसेमंद ऑल राउंडर होने से न सिर्फ बल्लेबाजी की ताकत बढ़ी है, बल्कि इससे एक एक्स्ट्रा गेंदबाज की जगह भी बनी है. गांगुली और धोनी के पास यह लग्जरी नहीं थी. बॉलिंग ऑलराउंडर्स के चलते कोहली की टीम गांगुली और धोनी की टीम पर भारी पड़ती है.

कोहली की टीम गांगुली और धोनी की टीम पर भारी पड़ती है (फोटो: Twitter)
कोहली की टीम गांगुली और धोनी की टीम पर भारी पड़ती है (फोटो: Twitter)

तेज गेंदबाजी के मामले में भी इस टीम के पास अधिक विकल्प हैं. यह टीम सिर्फ एक तेज गेंदबाज के भरोसे नहीं है. श्रीनाथ और जहीर खान के दौर में ऐसा नहीं था. उन्हें दूसरे छोर से सपोर्ट देने वाले अच्छे फास्ट बॉलर नहीं थे. विराट के पास कम से कम पांच तेज गेंदबाज एक जैसी क्षमता वाले हैं, जो लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से बॉलिंग कर सकते हैं. बुमराह, उमेश, शमी, भुवनेश्वर और इशांत के बीच आज हेल्दी कॉम्पिटीशन है.

आशीष नेहरा को भूलने की गलती न करें

हमें आशीष नेहरा को भी नहीं भूलना चाहिए, जो सिर्फ एकदिवसीय मैच खेलते हैं, वहीं वरुण एरॉन अक्सर घायल रहते हैं. हमें उस दौर को नहीं भूलना चाहिए जब भारतीय टीम के पास एक भी अच्छा मीडियम पेसर नहीं था. कुछ ओवर की रस्मअदायगी के बाद तब गेंद स्पिनर्स को थमा दी जाती थी. कपिल के आने के बाद हालात बदले, लेकिन अच्छे तेज गेंदबाज हाल के कुछ वर्षों में ही मिले हैं.

इस टीम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके पास आज तक की सबसे अच्छी बेंच स्ट्रेंथ है. टीम में जो लोग खेल रहे हैं, उनकी जगह लेने के लिए बाहर एक से अधिक तैयार खड़े हैं.

अगर धवन फॉर्म में नहीं हैं, तो केएल राहुल उनकी जगह आसानी से ले सकते हैं. वह बहुत टैलेंटेड बल्लेबाज हैं और उनका टेस्ट मैच में सर्वश्रेष्ठ स्कोर 199 है. वहीं पुजारा फिट नहीं हैं, तो विराट के पास रोहित शर्मा जैसा ऑप्शन है. अजिंक्य की भरपाई करुण नायर कर सकते हैं, जिनके नाम एक ट्रिपल सेंचुरी दर्ज है.

सहवाग के बाद करुण अकेले भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एक इनिंग में 300 रन बनाए हैं. इसके बावजूद उनके लिए टीम में जगह नहीं है. वहीं, साहा जब फिट नहीं होते, तो पार्थिव उनकी आसानी से जगह ले सकते हैं.

अब इस लेख का काउंटर व्यू पढ़िए- विराट हैं कोहली, लेकिन अभी अग्निपरीक्षा बाकी है

(आशुतोष आम आदमी पार्टी के प्रवक्‍ता हैं. इस आलेख में प्रकाशित विचार उनके अपने हैं. आलेख के विचारों में क्‍व‍िंट की सहमति होना जरूरी नहीं है.)