शिखर पर सेंसेक्स-निफ्टी तो निवेशकों की खुशी क्यों नहीं दिखती

शिखर पर सेंसेक्स-निफ्टी तो निवेशकों की खुशी क्यों नहीं दिखती

ब्रेकिंग व्यूज

सेंसेक्स-निफ्टी रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे हैं तो फिर निवेशकों खाली हाथ और मायूस क्यों है? दिवाली क्यों नहीं मनाई जा रही है? मैं बताता हूं- उसकी वजह है कि निवेशकों का पैसा बनना तो दूर उनकी कमाई उल्टे घट रही है.

जैसे 24 जुलाई यानी कि बुधवार को सेंसेक्स शिखर पर पहुंच गया, निफ्टी भी 11,000 के ऊपर चला गया पर जश्न नहीं मनाने की वजह है कि ये तेजी पूरी तरह से छलावा है, भ्रम है दरअसल ज्यादातर शेयर तो कमाने के बजाए गवां रहे हैं.

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हम आपको समझाते हैं कि बाजार में आखिर हो क्या रहा है?

जो निफ्टी शिखर पर दिख रहा है उसकी सिर्फ 3-7 कंपनियां ही हैं, जिनकी वजह से बाजार चढ़ रहा है. निफ्टी की 50 कंपनियों में से सिर्फ 7 कंपनियों के शेयर भाग रहे हैं.बाकी 43 के नीचे चल रहे हैं.

छोटे और मझौले शेयरों में पैसा स्वाहा

सेंसेक्स निफ्टी इतनी ऊंचाई पर हैं लेकिन असली दर्द तो छोटे निवेशकों को हुआ है. क्योंकि मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में 20% से 50% तक की गिरावट आई है. शेयर बाजार में जो 80% शेयरों में ट्रेडिंग होती है उनमें अगर 50% तक की गिरावट होने का मतलब ही है कि दुख कितना गहरा है.

कई तो ऐसी कंपनियों के शेयर भी 80-90% तक गिरे हैं. जिनके नाम आप सुनते भी रहते हैं. जैसे- जेट एयरवेज, अडानी पावर, रिलायंस कम्युनिकेशन या जयप्रकाश पावर.

इनमें कुछ ऐसी भी कंपनियां हैं जिनमें कुछ गड़बड़ियों की बात भी सामने आई हैं. पीसी ज्वैलर्स, वक्रांगी जैसी कंपनियों में जांच की बात चल रही है. मतलब उल्टा हो रहा है बाजार में गिरावट काफी ज्यादा है लेकिन टॉप लाइन इंडेक्स दिखाता है कि बाजार में तो बड़ी दिवाली है. ये धोखे वाली दिवाली है क्योंकि रियल इकनॉमी की चिंताओं के बावजूद बाजार छलांग लगाता दिख रहा है.

निवेशकों का पैसा स्वाहा कराने वाले शेयर ( 20 जुलाई 2017 से 20 जुलाई 2018)

शेयर बाजार के लोग कहते हैं कि रुपये को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं. रुपये के टूटने के बाद विदेशी निवेशकों को जो कमाई हुई थी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि रुपया इस साल 8 परसेंट कमजोर हुआ है. इस दौरान सेंसेक्स सिर्फ 8 परसेंट बढ़ा है यानी जीरो रिटर्न मिला. यही वजह है कि विदेशी निवेशक पैसा निकालकर वापस चले गए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अमेरिका और दूसरे देशों के बाजार भारत से बेहतर हैं.

मुट्ठी भर शेयरों की चांदी और बाकी तबाह क्यों?

  1. मुट्ठी भर शेयरों की चांदी हुई और बाकी बाजार तबाह हो गया. इसके कुछ बड़े कारण हैं. पहला कारण है कि SEBI ने पिछले दिनों एडिशनल सर्विलेंस मैकेनिजम की शुरुआत की. यानी बहुत सारी कंपनियों जिनमें काफी उतार-चढ़ाव था. उन पर निगरानी सख्त कर दी गई. जिसकी वजह से बाजार का मूड खराब हुआ.
  2. दूसरी वजह है, बहुत सारी कंपनियों के ऑडिटर आजकल इस्तीफा दे रहे हैं. उन्हें बैलेंसशीट पर भरोसा नहीं है कि वो उस पर साइन करें या नहीं. क्योंकि सरकार ने कायदे काफी सख्त कर दिए हैं.
  3. तीसरी वजह है, म्यूचुअल फंड पर सख्ती की गई. क्योंकि पिछले दिनों लार्ज कैप की स्कीमों में लार्ज कैप की बजाय मिड और स्मॉल कैप में पैसा लगाने लगे. इस पर SEBI ने उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा कि वो ऐसा नहीं कर सकते. पांच क्लासिफिकेशन बना दिए गए. जिससे मार्केट में और मंदी आ गई.
  4. चौथी वजह है, रिजर्व बैंक ने कहा कि बाजार ओवर प्राइज्ड है. एक तरीके से रीटेल इनवेस्टर्स को चेतावनी देना सही था. लेकिन इसका बाजार में उल्टा असर पड़ा. पांचवां और आखिरी फैक्टर सरकारी बैंकों की खस्ताहालत है. एनपीए बढ़ रहे हैं. इस वजह से 10 लाख करोड़ के एनपीए का रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ा सामने आया उससे भी घबराहट है.

विदेशी निवेशकों की नजर क्रूड पर

ग्लोबल संकेत बहुत अच्छे नहीं हैं क्योंकि अमेरिका और चीन का ट्रेड वॉर किस तरफ जाएगा, अभी इसका किसी को भी अंदाजा नहीं है. आगे चुनाव आने वाले हैं और ऐसे में अगर सरकार कोई लोकलुभावन स्कीम लेकर आती है. यानी सरकारी खजाने और पैसा खर्च करती है, तो इससे विदेशी निवेशकों को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा. इन संकेतों से भी लगता है कि बाजार में बड़े स्तर में घबराहट है.

निवेशक अलर्ट रहें आगे खतरा है?

मुट्ठी भर शेयरों की वजह से ये तेजी ज्यादा दिन कायम नहीं रह सकती. यानी बाजार में आने वाले कुछ दिनों में बड़ी भारी गिरावट आ सकती है. छोटे निवेशकों को जो लगता है कि बाजार में पैसा कमा लें. उन्हें काफी सावधान रहने की जरूरत है.

बड़ी बात ये है कि जब बाजार में नकदी ही नहीं है तो पैसा बनेगा कैसे? कुछ ही लोग हैं जो बड़े शेयरों में पैसा लगा रहे हैं और बाजार को चला रहे हैं. एक बात और है, अगर आप लार्ज और मिड कैप शेयरों में निवेश करेंगे और उनकी बैलेंस शीट सही से नहीं पढ़ेंगे तो गलती हो सकती है.

कुल मिला कर हम ये कहना चाहते हैं कि हम एक विचित्र स्थिति में हैं. एक नकली स्टोरी प्लेआउट हो रही है. यह बाजार की असल तेजी नहीं है. बाजार का पूरा सेंटिमेंट सही नहीं हो रहा है. ये एक चिंता का विषय है. लोगों को इसे सावधानी से समझने की जरूरत है.

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