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कोलकाता में ममता VS सीबीआई, इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ ?

पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में सीबीआई की एंट्री पर ‘पाबंदी’ लगा दी थी

Updated
कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार पर चिटफंड घोटाले में शामिल होने का आरोप.
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कोलकाता में सीबीआई और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं. रविवार को चिटफंड घोटाला मामलों की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम रविवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंची.

पांच लोगों की सीबीआई टीम जब कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर पहुंची तो कोलकाता पुलिस ने टीम को घर के बाहर ही रोक दिया और वारंट दिखाने को कहा. कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के पांच अधिकारियों को हिरासत में ले लिया और फिर छोड़ दिया. इसके बाद पूरा मामला तूल पकड़ता जा रहा है.

मामले में अबतक क्या-क्या हुआ, देखिए वीडियो

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क्या है मामला?

पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए पिछले दिनों कोलकाता आए चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में भी हिस्सा नहीं लिया था.

रविवार को कोलकाता पुलिस ने एक बयान जारी कर उन खबरों को सिरे से खारिज किया था कि कुमार ड्यूटी से गायब हैं. पुलिस ने कहा, ‘‘कृपया गौर करें कि कोलकाता के पुलिस कमिश्नर न केवल शहर में मौजूद हैं, बल्कि रोजाना ऑफिस भी आ रहे हैं. सिर्फ 31 जनवरी 2019 को वो ऑफिस नहीं आए, क्योंकि उस दिन उन्होंने छुट्टी ली थी."

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बंगाल में CBI की No Entry

इससे पहले पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में सीबीआई की एंट्री पर 'पाबंदी' लगा दी थी. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सीबीआई को ''सामान्य सहमति'' देने से इनकार कर दिया है. इसके आधार पर ही सीबीआई किसी राज्य में जांच कर सकती है या छापे मार सकती है.

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क्या है सारदा चिटफंड घोटाला?

ऐसा आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने अवैध तरीके से अपने इन्वेस्टर्स से पैसे उगाहे और फिर उनको पैसे वापस नहीं किया गया. अप्रैल 2013 में इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब पैसे की हेराफेरी को लेकर कई एजेंटों ने अपनी जान तक दे दी थी. पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए इस घोटाले को लेकर उनकी सरकार पर भी सवाल उठे थे. ऐसा अनुमान है की लगभग दस लाख से अधिक निवेशकों को शारदा ग्रुप कंपनी के इस घोटाले से नुकसान हुआ.

इस घोटाले में संलिप्तता के आरोप में ममता सरकार के कई मंत्री और नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था. इस घोटाले के तार ओडिशा और असम में भी फैले हुए थे. तीन राज्यों में फैले इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गयी. 2014 में सुप्रीम कोर्ट के पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम के पुलिस को सीबीआई के इस जांच में सहयोग देने का आदेश दिया.

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