MP: दलित आंदोलन की आग BJP-कांग्रेस की उम्मीदों को करेगी धुआं-धुआं?

MP: दलित आंदोलन की आग BJP-कांग्रेस की उम्मीदों को करेगी धुआं-धुआं?

वीडियो

वीडियो प्रोड्यूसर- सोनल गुप्ता

वीडियो एडिटर- अाशुतोष भारद्वाज

दो अप्रैल को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में भारत बंद के दौरान विरोध प्रदर्शन के नाम पर जमकर तोड़फोड़ की गई थी. मध्य प्रदेश के ग्वालियर के थाटीपुर इलाके में विरोध प्रदर्शन जातिगत संघर्ष में बदल गया और जमकर गोलियां चली थीं. उस हिंसा को भले ही कई महीने बीत चुके हों, लेकिन उसकी कसक अब भी बाकी है और यही कसक आने वाले विधानसभा चुनाव  में शिवराज सिंह चौहान और बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है.

क्विंट ने उस हिंसा के दौरान मारे गए राकेश टमोटिया और दीपक के परिवार से बात की

3 बच्चों के पिता और दिहाड़ी मजदूर राकेश टमोटिया दो अप्रैल की सुबह रोजाना की तरह काम की तलाश में अपने परिवार को छोड़ कर घर से निकले थे, लेकिन फिर कभी नहीं लौटे. इनके परिवार को अब भी सरकार से मदद की आस है लेकिन उनका कहना है कि मदद के नाम पर नेता सिर्फ दिखावा कर रहे हैं. आनेवाले चुनाव में सिर्फ प्रचार-प्रसार के लिए ही इनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

तीन बच्चे हैं उनको पढ़ाएंगे लिखाएंगे या खिलाएंगे. सब लोग आते हैं मदद करेंगे.. मदद करेंगे कह कर चले जाते हैं. चुनाव हो जाएंगे सरकार बन जाएगी लेकिन हमारा क्या होगा.. कुछ नहीं..पति लौट कर तो आएगा नहीं.
रामवती, मृतक राकेश टमोटिया की पत्नी
नौकरी की बात कोई नहीं कर रहे, फोटो खिंचाने और माला डलवाने आए थे अपने समर्थकों के साथ. किसी ने हमसे ना ही मदद की बात की है ना ही मदद की है. उनके तो जुमले हैं, सरकार का काम झूठ बोलना है, उनको तो वोट लेना है. झूठ बोलते रहें..वो तो खुद ही बोलते थे कि हमारे वादे जुमले हैं तो फिर हम भी तो कहीं ना कहीं अपना ठिकाना ढूंढेंगे.
लाखन सिंह, मृतक राकेश टमोटिया का भाई

राकेश के अलावा दीपक की भी ‘जाति की जंग’ में हत्या हुई थी

ठाकुर लोगों ने दीपक को 3 गोली मारी थी. वे अभी भी दबाव देते हैं. सारे धंधे बंद हो गए हैं, हम भूखे मर रहे हैं. बीजेपी वाले, कांग्रेस वाले कोई नहीं आते.
मोहन, दीपक के पिता
बीजेपी अब अपने आपको दलितों के साथ इसलिए बता रही है क्योंकि इस समय उनको चुनाव दिख रहा है. ये बीजेपी का पैंतरा है. उन लोगों की यही सोच है कि उन्हें दलित वोट चाहिए. इसलिए वो नारा भी लगा रही है कि दलितों के हम हित में हैं और दलितों के साथ हैं.
प्रिंस, दीपक के रिश्तेदार

इन लोगों की बात सुनने के बाद एक सवाल जरूर उठता है कि दलित आंदोलन की आग इस चुनाव में किसके हाथ को जलाएगी, क्या आंदोलन के बाद बाकी रह गई तपिश बीजेपी के कमल के फूल को झुलसाएगी ?

ये भी देखें-

OPINION : दलित आंदोलन से पहले मीडिया की खामोशी के क्या मायने?

(यहां क्लिक कीजिए और बन जाइए क्विंट की WhatsApp फैमिली का हिस्सा. हमारा वादा है कि हम आपके WhatsApp पर सिर्फ काम की खबरें ही भेजेंगे.)

Follow our वीडियो section for more stories.

वीडियो

    वीडियो