JNU: सेक्सुअल हैरेसमेंट पर VC की चुप्पी, अब राष्ट्रपति से गुहार

JNU: सेक्सुअल हैरेसमेंट पर VC की चुप्पी, अब राष्ट्रपति से गुहार

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वीडियो एडिटर: विशाल कुमार

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की 1,500 छात्राओं ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से कैंपस के अंदर सेक्सुअल हैरेसमेंट केस की सुनवाई करने वाली व्यवस्था को लेकर हस्तक्षेप की मांग की है. इसे लेकर छात्राओं ने राष्ट्रपति के पास एक याचिका भेजी है.

उनका कहना है कि कैंपस के अंदर ऐसे मामलों की जांच को लेकर लापरवाही हो रही है. खास तौर से प्रोफेसर अतुल जौहरी के मामले में, जहां जेएनयू की आंतरिक शिकायत समिति ने प्रोफेसर को निर्दोष करार दिया है क्योंकि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं है.

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“इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता. हमारे जेएनयू जैसे कैंपस में सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोपी प्रोफेसर को सुरक्षा दी जाती है. शिकायत करने वाले को सुरक्षा दी जानी चाहिए ताकि उनको कंप्लेन वापस लेने के लिए कोई डराए-धमकाए नहीं.”
स्वाति, जेएनयूएसयू काउंसिलर  

छात्राओं ने अपनी दलील में राष्ट्रपति को सेक्सुअल हैरेसमेंट के खिलाफ जीएसकैश (GSCASH) को बहाल करने के लिए भी कहा है. उनका कहना है कि ये कैंपस के अंदर सेक्सुअल हैरेसमेंट केस की जांच और निपटारा करने वाली लोकतांत्रिक कमिटी थी.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अधिनियम 1966 (1966 का 53) और विश्वविद्यालय कानून के तहत भारत के राष्ट्रपति जेएनयू के विजिटर हैं. 

याचिका की 1,500 हस्ताक्षर वाली काॅपी क्विंट के पास है.

जेएनयू के छात्रों द्वारा भारतीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेजी गई याचिका
जेएनयू के छात्रों द्वारा भारतीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेजी गई याचिका
(फोटो: द क्विंट)

याचिका में जेएनयू के डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फ्रंट (डीएसएफ) के छात्रों ने कहा है कि “GSCASH का गठन जेएनयू के छात्रों, शिक्षकों और अन्य वर्गों द्वारा किए गए संघर्ष के बाद हुआ था. उसे 2017 में मौजूदा वीसी जगदीश कुमार मामीडाला ने अवैध रूप से हटा दिया था."

सेक्सुअल हैरेसमेंट के केस पर सुनवाई करने के लिए कैंपस में जीएसकैश (GSCASH) को हटाकर आंतरिक जांच कमिटी-आईसीसी लाई गई है. छात्रों का कहना है कि उन्हें आईसीसी पर भरोसा नहीं है.

आईसीसी हैरेसर को बचाती है और विक्टिम को सजा देती है. ऐसे में अगर कुछ हो जाए तो ये मुझे सामने आने से रोकने का काम करता है. अगर मेरे या मेरी किसी दोस्त के साथ कुछ हो तो हम कंफ्यूज हो जाएंगे और असुरक्षित महसूस करेंगे कि कहां जाएं. क्योंकि आईसीसी कंप्लेन करने वाले को सजा देती है. ये हमारे अंदर एक डर बना रहा है. इस वजह से हैरेसर ज्यादा सुरक्षित और आजाद महसूस कर रहे हैं.  
अदिति अग्रवाल, एमए स्टूडेंट, जेएनयू

स्टूडेंट्स ने इस याचिका में जेएनयू के प्रोफेसर अतुल जौहरी का जिक्र किया है जिन्हें आईसीसी ने क्लीन चिट दे दी थी. जौहरी जेएनयू के लाइफ साइंस विभाग में प्रोफेसर हैं और इस विभाग की 8 छात्राओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

बाद में छात्राओं से छेड़छाड़ करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने जौहरी के खिलाफ 8 मुकदमे दर्ज किए थे. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था.

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