क्या इस वक्त स्कूल खोलना सही है? सैम पित्रोदा से समझिए

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के सलाहकार सैम पित्रोदा से द क्विंट की खास बातचीत

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न्यूज वीडियो
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वीडियो एडिटर: दीप्ति रामदास

द क्विंट से खास बातचीत में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के सलाहकार सैम पित्रोदा (Sam Pitroda) ने देश में शिक्षा और उसके डिजिटाईजेशन (online Education) पर कहा है कि- अगर हम आज डिजिटल शिक्षा का विस्तार नहीं कर सकते तो हमें ये मान लेना चाहिए कि ये एक खाली साल है.

होम लर्निंग और ऑनलाइन एजुकेशन पर सैम कहते हैं कि- हमारे पास ब्रॉडबैंड के लिए विश्वसनीय पहुंच नहीं है जो आपके शिक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि शिक्षा सिर्फ टेक्स्ट, आवाज के बारे में नहीं है ये ग्राफिक्स, वीडियो, एनीमेशन और बातचीत के बारे में है.

हाल ही में किये गए एक सर्वे में पता चला कि 50% से ज्यादा यूनिवर्सिटी टीचर ऑनलाइन क्लास को लेकर अभ्यस्त नहीं हैं करीब 4.2% टीचर्स को ही ऑनलाइन क्लास की ट्रेनिंग मिली है 

वो आगे कहते हैं- सिर्फ इसलिए कि आप डिजिटल डिवाइस और एक्सेस दे रहे हैं ये आश्वस्त नहीं करता है कि आप शिक्षा दे पाएंगे क्योंकि शिक्षक खुद नहीं जानते कि कंप्यूटर कैसे चलाया जाता है, आप क्या कह रहे हैं? गांव के स्कूलों में, उन्होंने कभी भी डिजिटल डिवाइस नहीं चलाया है इसलिए, ये एक बहुत बड़ा काम है जिसे हम मानने के लिए तैयार नहीं हैं.

इससे बाहर निकलने के रास्ते पर सैम पित्रोदा बताते हैं-

  • जल्द ही भारत नेट की शुरुआत

पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी इसे भारत ब्रॉडबैंड या NOFN कहा जाता है हमें उस कार्यक्रम को शीघ्र पूरा करना चाहिए उस कार्यक्रम में कई सालों से देरी हो रही है तो, हर पंचायत में 100 MB बैंडविड्थ के साथ ब्रॉडबैंड होना चाहिए.

  • स्कूलों में नॉलेज नेटवर्क बढ़ाएं

फिर हमें दूसरे कार्यक्रम को देखने की जरूरत है जिसे राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क कहा जाता है जहां हमने भवन निर्माण में अरबों डॉलर खर्च किए हैं हमारे सभी विश्वविद्यालयों को जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचा आर एंड डी लैब उस बुनियादी ढांचे को स्कूलों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए, टीचर्स की ट्रेनिंग पर जोर देना होगा.

  • कंटेंट बनाना होगा

इसके साथ ही, हमें अपने शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है हमें सही कंटेंट बनाने की जरूरत है हमें सही प्लेटफार्म बनाने की जरूरत है, तो, आपको अभी कई मोर्चों पर शुरू करने की जरूरत है वित्तीय संसाधनों की भारी प्रतिबद्धता के साथ.

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