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UP पुलिस में 'अतिक्रमण' करने वालों पर बुलडोजर कब?

ऑपरेशन लंगड़ा, ठोको नीति, बुलडोजर राज के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश पुलिस पर एक के बाद एक बड़े आरोप लग रहे हैं.

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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः

जहां स्त्रियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं और जहां स्त्रियों की पूजा नहीं होती है, उनका सम्मान नहीं होता है वहां किये गये अच्छे काम भी बेकार हो जाते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि ये श्रीमान पत्रकारिता के साथ-साथ धार्मिक प्रवचन भी देने लगे क्या? तो आपको बता दें कि मनुस्मृति के ये श्लोक उत्तर प्रदेश सरकार के 'मिशन शक्ति' अभियान के एड में दिखा. लेकिन श्लोक लिखने और उसपर अमल करने में जमीन आसमान का फर्क दिख रहा है.

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ठोको नीति वाली यूपी पुलिस की शक्ति ऐसी बढ़ी है कि पुलिस के अपराध से न नारी शक्ति बच पा रही है न आम लोग. कहीं पुलिसवाले रावण बने फिर रहे हैं तो कहीं द्रौपदी की अस्मिता पर हाथ डालने वाले कौरवों की तरह हरकत कर रहे हैं. कहीं पुलिस पर 13 साल की गैंगरेप सर्वाइवर के साथ रेप करने का आरोप लगता है तो कहीं थाने में महिला की बेरहमी से पिटाई हो जाती है. जब पुलिस वाले ही अपराधी बनेंगे तो हम पूछेंगे जरूर जनाब ऐसे कैसे?

ऑपरेशन लंगड़ा, ठोको नीति, बुलडोजर राज के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश पुलिस पर एक के बाद एक बड़े आरोप लग रहे हैं. ललितपुर से लेकर अलीगढ़, चंदौली में पुलिस राज की डरावनी कहानी सामने आ रही है.
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ललितपुर में 13 साल की बच्ची का रेप

दरअसल, उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक 13 साल का बच्ची का रेप होता है, बच्ची शिकायत के लिए थाने जाती है तो वहां भी उसका रेप किया जाता है. नाबालिग सर्वाइवर की मां की तहरीर के मुताबिक, 22 अप्रैल को उनकी 13 साल की बच्ची को चार लड़के अगवा कर भोपाल ले गए, जहां पर उन्होंने इसके साथ दुष्कर्म किया. तीन दिन दुष्कर्म के बाद आरोपी बच्ची को 26 अप्रैल को ललितपुर छोड़कर भाग गए. आरोप है कि जब अगले दिन बच्ची को बयान दर्ज करने के लिए थाने बुलाया गया तब थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज अपने साथ कमरे में लेकर गए जहां उसके साथ दुष्कर्म किया.

ये मामला तब सामने आया जब बच्ची ने काउंसलिंग के दौरान जिले की चाइल्डलइन संस्था को अपने ऊपर हुई हैवानियत की दास्तां बयां की. ललितपुर एसपी निखिल पाठक की मानें तो 6 लोगों पर एफआईआर हुई है. SHO तिलकधारी सरोज को अब गिरफ्तार कर लिया गया है.

इस घटना के बाद भले ही एफआईआर हो गिरफ्तारी हो जाए, लेकिन सवाल उठता है कि पुलिस सेंसेटाइजेशन की बात क्यों नहीं हो रही. क्यों पुलिस वालों को हुमैनिटी का पाठ नहीं पढ़ाया जा रहा है? जब पुलिस वाले ही गुनाह करेंगे तो आम लोग अपनी शिकायत किसे सुनाएंगे?

आप पुलिस वालों के गुनाह की एक और कहानी सुनिए. अभी जिस ललितपुर पर मीडिया की नजरें हैं उसी ललितपुर में महरौनी कोतवाली में महिला की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है. महिला पर चोरी का आरोप लगाकर दो पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की. फिलहाल दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है.

चंदौली में एक लड़की की मौत, पुलिस पर आरोप

कानून की हिफाजत करने वाली पुलिस पर एक और आरोप चंदौली में लगा है. जहां सैयदराजा थाना क्षेत्र में एक 19 साल की लड़की की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई. दरअसल, चंदौली के मनराजपुर गांव के निवासी और बदर बालू के कारोबारी कन्हैया यादव को गुंडा एक्ट में पकड़ने के लिए पहुंची थी. आरोप है कि पुलिस टीम ने कारोबारी के परिवार को बुरी तरह पीटा, जिसके बाद कन्हैया यादव की एक बेटी की मौत हो गई.

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मामला बढ़ा तो सैयदराजा थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह को सस्पेंड कर दिया गया. हालांकि चंदौली के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल कह रहे हैं कि प्रथम दृष्टया पता चलता है कि ज्योति ने सुसाइड किया है फिर भी जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जाएगी. हालांकि लड़की के पिता ने साफ आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने लड़की की हत्या की है.

पुलिसियातंत्र की कई कहानी

ये तो कुछ ताजा मामले हैं. याद है आपको कैसे अक्टूबर 2021 में गोरखपुर में एक व्यापारी मनीष गुप्ता की हत्या हुई थी. कानपुर के रहने वाले मनीष गुप्ता अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर का 'विकास' देखने आए थे, लेकिन वहां पुलिस के कारनामों ने उनकी जिंदगी छीन ली थी. यही नहीं पुलिस ने तो यहां तक कह दिया था कि हड़बड़ाहट में कमरे में गिरने से चोट लग गई. पुलिस इलाज के लिए उसे अस्पताल ले गई, जहां उसकी मौत हो गई. वो तो मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनकी बर्बरता से पिटाई की गई थी. और तो और पुलिस अधिकारी गुनहगारों को पकड़ने के बजाए मामले को रफादफा करने और FIR दर्ज नहीं कराने के लिए परिवार को समझा रहे थे. इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया था.

एक और घटना याद कीजिए. नवंबर 2021 में कासगंज में पुलिस कस्टडी के दौरान अल्ताफ नाम के एक युवक की मौत हो गई थी. पुलिस कस्टडी में अल्ताफ की मौत का कारण पुलिस ने आत्महत्या बताया था. कहा गया कि अल्ताफ खुद बाथरूम की टोटी से लटककर मर गया. पुलिस के इस दावे पर सबसे बड़ा सवाल उठा कि आखिर ढाई फीट ऊंची टोंटी से लटक कर 5 फीट का आदमी कैसे आत्महत्या कर सकता है?

सोचिए , पुलिस अपने गुनाहों को छिपाने के लिए कैसे कैसे तर्क दे रही है. ये तो वो मामले हैं जो सामने आ सके हैं, ऐसे कितने मामले हैं जिसमें आरोपी का आरोप साबित होने से पहले ही पुलिस उसे अपराधी साबित कर देती है.

भले ही 'अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस', 'अपराधी राज्य छोड़कर भाग गए' जैसे बयानों की पैकेजिंग कर मीडिया चैनल की दुकानों पर बेचे जा रहे हों, लेकिन ये घटनाएं बता रही हैं कि झूठ की मार्केटिंग में झोल है.

हमने अपने पिछले जनाब ऐसे कैसे के सीरीज में भी पुलिस रिफॉर्म का मुद्दा उठाया था, एक बार फिर कह रहे हैं, अगर पुलिस रिफॉर्म नहीं हुआ तो राज्य दर राज्य पुलिसिया स्टेट बन जाएंगे.

पुलिस रिफॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कुछ अहम बातें कही थीं, जिसमें कोर्ट ने स्टेट पुलिस कंपलेंट्स अथॉरिटी (SPCA) के गठन की सिफारिश की थी जहां लोग पुलिस को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में स्टेट सेक्योरिटी कमिशंस (SSC) बनाने का भी निर्देश दिया गया था. इसका काम पुलिस के कामकाज पर नजर रखना होगा.

पुलिस को जेंडर सेंसेटाइजेशन, मानवाधिकार, मेंटल हेल्थ जैसी चीजों पर काम क्यों नहीं हो रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपराध की विवेचना और कानून व्यवस्था के लिये अलग-अलग पुलिस की व्यवस्था की जाए, फिर इसे क्यों नहीं लागू किया जा रहा है?

बार-बार ये लॉजिक दिया जाता है कि पुलिस पर काम का प्रेशर है, होली-दिवाली तक में पुलिस वाले छुट्टी नहीं ले पाते हैं. पुलिस अपराध करने लग जाए इसके पीछ ये कारण कतई नहीं हो सकता लेकिन जहां तक काम के बोझ का सवाल है तो फिर सवाल है कि देश में खासकर उत्तर प्रदेश में पुलिस डिपार्टमेंट में एक लाख पद खाली क्यों हैं?

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसी साल मार्च के महीने में लोकसभा में बताया था कि देश भर के कई पुलिस स्टेशनों में लगभग 5.3 लाख पद खाली पड़े हैं. ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के आंकड़ों के अनुसार पुलिस की स्वीकृत संख्या 26,23,225 है, वास्तविक संख्या 20,91,488 है और 1 जनवरी, 2020 तक 5,31,737 पद खाली पड़े हैं. इनमें सबसे ज्यादा पद यूपी में खाली हैं.

अब सवाल है कि यूपी पुलिस की ठोक देने वाली सोच पर लगाम कैसे लगेगा? क्यों गुनहगार पुलिसवालों पर एक्शन लेकर नजीर साबित नहीं किया जा रहा है? कानून का बुलडोजर ऐसे पुलिस वालों पर क्यों नहीं चल रहा है? इसलिए हम पूछ रहे हैं जनाब ऐसे कैसे?

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