फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस और थ्री इडियट्स जैसी फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग से बॉलीवुड में रातोंरात छा जाने वाले एक्टर बोमन ईरानी को संघर्ष के दिनों में वेटर की नौकरी करने से लेकर मुंबई की सड़कों पर तस्वीरें और इंश्योरेंस पॉलिसी बेचनी पड़ी थी.
‘सिग्ननेचर स्टार्टअप मास्टर क्लास’ ईरानी ने कहा,
जिंदगी में एक ऐसा पड़ाव भी था, जब उन्होंने महज 20-30 रुपये में तस्वीरें बेची. लेकिन जिस दिन उन्होंने फैसला किया कि मैं कुछ बड़ा करना चाहता हूं. बस उसी दिन से मेरे ऊपर मंजिल हासिल करने का जुनून सवार हो गया. ईरानी इसे जीरो मोमेंट कहते हैं.
जीरो मोमेंट यानी जोश और जुनून के साथ एक नई जिंदगी के शुरुआती पल. 32 साल की उम्र में बोमन ने एक नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया और फिर उन्होंने हिंदी फिल्मों दरवाजे पर दस्तक दी. इस दस्तक में दम था और फिर हिंदी फिल्म को मिला एक ऐसा सधा हुआ एक्टर जिसने सिल्वर स्क्रीन पर ऐसे रोल किए, जो माइल स्टोन बन गए.
सिग्नेचर स्टार्टअप मास्टर क्लास में बोमन ने जिंदगी का सामना करने के गुर बताए. यह भी बताया कि जिंदगी के इन्हीं छोटे-बड़े संघर्षों से मिले सबक एक्टिंग में भी काम आए. पहले फोटोग्राफी और अब एक्टिंग का जुनून. यह जुनून अब भी बोमन के सिर चढ़ कर बोल रहा है और उनकी खाते में एक से बढ़ कर एक रोल आते जा रहे हैं. बोमन कहते हैं, ‘जुनून है तो हर जंग जीतना मुमकिन है’.
बोमन ईरानी ने शुरुआत एड फिल्मों से की. फैंटा, सिएट और क्रैकजेक बिस्किट के विज्ञापन करने के बाद उन्हें एक छोटा रोल फिल्म ‘डरना मना है’ में मिला. लेकिन सैफ अली खान के साथ की गई इस फिल्म में उन्होंने जबरदस्त एक्टिंग की. बोमन को सबसे ज्यादा तारीफ राजकुमार हिरानी की फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस मिली. डॉक्टर अस्थाना का रोल निभाने के लिए उन्हें बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इसके बाद बोमन ने मैं हूं ना, लगे रहो मुन्ना भाई, खोसला का घोसला, थ्री इडियट्स और हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी फिल्मों से भी बेहतरीन एक्टिंग के झंडे गाड़े.
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