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भारत में पॉर्न पर क्या है कानून, बैन नाकाम तो क्या रेगुलेट करना बेहतर होगा?

Raj Kundra Porn case: पुलिस का दावा पोर्न मुंबई में बनता था, लंदन में अपलोड होता था.

<div class="paragraphs"><p><strong>भारत में पॉर्न बनाना जुर्म</strong></p></div>
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पॉर्न फिल्म बनाने के आरोप में एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा (Raj Kundra) पुलिस की गिरफ्त में हैं. मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, राज कुंद्रा ने पोर्न फिल्म इंडस्ट्री में 8 से 10 करोड़ रुपए का निवेश किया है. आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे अपने रिश्तेदार के साथ केनरिन नाम की कंपनी बनाई और उसका रजिस्ट्रेशन विदेश में करवाया ताकि भारत के साइबर कानून से बच सकें.

पुलिस का कहना है कि पोर्न मुंबई में बनता था और लंदन में अपलोड होता था. अगर ये सच है तो इसका मतलब ये हुआ कि भले ही भारत में पोर्न पर बैन है, लेकिन यहां बन भी रहा है, देखा भी जा रहा है और लोग कमाई भी कर रहे हैं. ऐसे में सवाल आता है कि क्या भारत में पॉर्न पर बैन जारी रखना चाहिए या फिर इसे रेगुलेट करने की जरूरत है?

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भारत में पॉर्न बनाना जुर्म, लेकिन देखने की छूट

भारत में आईपीसी की धारा 292 के तहत पॉर्न बनाना और बेचना जुर्म है. अगर किसी पॉर्न क्लिप को आप एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाते हैं यानी शेयर करते हैं तो वह भी गैर कानूनी है। मजे की बात ये है कि भारत में पॉर्न देखना, पढ़ना या सुनना कानूनी है, वहीं बच्चों के लिए अलग नियम हैं. इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 की धारा 67 बी के तहत पूरे देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी गैर कानून है. चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी गैर कानूनी है.

पॉर्न को बैन करें या रेगुलेट करने की जरूरत?

ये सवाल उठने की बड़ी वजह ये है कि भारत में पॉर्न इंडस्ट्री जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है. चोरी छुपे भारत के ही विभिन्न हिस्सों में शूट किया जाता है. यानी भारत में पॉर्न इंडस्ट्री तो है ,लेकिन कागज पर नहीं. साफ है कि बैन कारगर नहीं है. अवैध तरीके से पॉर्न इंडस्ट्री चलने के कारण कई दिक्कत हैं. असुरक्षित तरीके से इंडस्ट्री चल रही है. जैसी मर्जी उस तरीके से चल रही है. बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंडस्ट्री रेगुलेट होगी तो नियम कायदों के साथ सुरक्षा से चलेगी.

भारत में पॉर्न बैन करवाने की पीछे तर्क

पॉर्न बैन के पीछे सबसे बड़ा तर्क ये है कि ये सेक्स को लेकर 'विकृत मानसिकता' को बढ़ावा देता है. यौन अपराध के लिए प्रेरित करता है. साल 2013 की बात है. इंदौर हाईकोर्ट के वकील कमलेश वासवानी ने भारत में पॉर्न वेबसाइटों को ब्लॉक करने के लिए एक जनहित याचिका लगाई. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने तर्क दिया कि इन एडल्ट साइटों को ब्लॉक कर देना चाहिए, क्योंकि कहा कि ये महिलाओं के प्रति हिंसा को बढ़ावा देती हैं और सेक्स क्राइम को प्रोत्साहित करती हैं.

उन्होंने अपनी याचिका में लिखा, पॉर्न हिंसा और बच्चों के शोषण को प्रोत्साहित करता है. महिलाओं की गरिमा को कम करता है. ऑनलाइन पोर्नोग्राफी देखने का महिलाओं के खिलाफ अपराधों से सीधा संबंध है.

जुलाई 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घर की गोपनीयता में घर के अंदर पोर्नोग्राफी देखना पूरी तरह से कानूनी है. इसे अपराध के रूप में नहीं गिना जाता है. हालांकि, अगस्त 2015 में इसके ठीक विपरीत हुआ. भारत सरकार ने 857 पोर्न साइटों को ब्लॉक करने का आदेश दे दिया.

साल 2018 में देहरादून में बलात्कार के एक आरोपी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में कहा कि उसने पॉर्न फिल्म देखने के बाद अपराध करने का प्रोत्साहन मिला. इसके बाद कोर्ट ने पॉर्न वेबसाइटों को बैन करने का आदेश दे दिया. कोर्ट ने कहा था, बच्चों के मन पर प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए पॉर्न साइटों तक पहुंच पर अंकुश लगाया जाना चाहिए.

'सारा पैसा दूसरे देशों की कंपनियों की जेब में जा रहा है'

द प्रिंट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में सेमी पॉर्न कंटेंट तैयार करने वाले यश जुनेजा कहते हैं, सारा पैसा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जेब में जा रहा है. इसी रिपोर्ट में पॉर्न फिल्मों के साथ काम कर चुके एक शख्स ने बताया, वहां के एक्टर-एक्ट्रेस (पश्चिम में) इसे अपनी मर्जी से कर रहे हैं. इसमें पैसा भी खूब है. उसने कहा, जिसे भूख लगी है वह ढूंढता रहेगा, जब तक उसकी भूख नहीं मिटती है. 'साइबर सेक्सी: रीथिंकिंग पोर्नोग्राफी' की लेखिका ऋचा कौल कहती हैं कि भारतीय, सेक्सुअल कंटेंट की तलाश करते हैं, क्योंकि हमारे पास भारत में पोर्न इंडस्ट्री नहीं है, इसलिए यह मांग अमेरिकी और बाकी देशों के एक्टर और एक्ट्रेस द्वारा पूरी की जाती है.

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पोर्न नहीं तो सॉफ्ट पोर्न सही

मनी कंट्रोल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, उल्लू, कूकू, देसी फ्लिक्स, हॉट शॉट्स, गुप चुप, Flizmov जैसे प्लेटफॉर्म पर लाखों भारतीय इरोटिक कंटेंट देखते हैं, जिनका अधिकांश कंटेंट मेरठ में शूट किया जाता है. इसी रिपोर्ट में दिल्ली के फिल्म निर्माता सुमित शॉ कहते हैं, OTT प्लेटफार्मों पर लगभग हर फिल्म में सॉफ्ट पॉर्न डाला जा रहा है.


फेनो मूवीज के मार्केटिंग मैनेजर शिवांक खंडेलवाल कहते हैं, इरोटिक फिल्मों को देखने का एक बड़ा दर्शक वर्ग है. उनकी कुछ मांगें रहती हैं, जिन्हें हम अपने शो में पूरा करने की कोशिश करते हैं. अगर वे हमारी आने वाली सीरीज में किसी विशेष एक्ट्रेस को लेने के लिए कहते हैं, तो हम कोशिश करते हैं उसे पूरा करें. कभी-कभी सीरीज में अधिक 'फोरप्ले' दिखाने की मांग की जाती है. हमने अपने दर्शकों की उस मांग को भी पूरा किया.

लॉस एंजेल्स में तो कंडोम से जुड़ा कानून बदलना पड़ा

बात साल 2012 की है. लॉस एंजेल्स में एक नियम बनाया गया, जिसके मुताबिक, पॉर्न फिल्मों की शूटिंग के वक्त एक्टर को कंडोम पहनना अनिवार्य कर दिया गया. नतीजा ये हुआ कि अगले 4 साल में पॉर्न परमिट लेने वालों की संख्या में 95% की गिरावट देखी गई. राज्य और स्थानीय टैक्स रेवेन्यू में कमी आने के कारण कानून को रद्द कर दिया गया. इस कानून को लाने का मकसद सेक्सुअली डिशेज से बचाना था, लेकिन पॉर्न फिल्ममेकर्स ने कहा कि ऐसे में पॉर्न फिल्मों का मजा खराब हो जाता है.

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वे देश जहां पोर्नोग्राफी कानूनी है

कनाडा में 18 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति हार्डकोर पोर्नोग्राफी नहीं बेच सकता है. लेकिन 18 से ऊपर का कोई भी व्यक्ति पोर्नोग्राफी बेच सकता है. उसका मालिक हो सकता है. अमेरिका में पोर्नोग्राफी संघीय स्तर पर वैध है. अधिकांश यूरोपीय देशों में भी पोर्नोग्राफी कानूनी है.

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