बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ गोवा के सीएम प्रमोद सावंत और कांग्रेस के बागी विधायक
बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ गोवा के सीएम प्रमोद सावंत और कांग्रेस के बागी विधायक(फोटोः PTI)
  • 1. क्यों पड़ी दलबदल विरोधी कानून की जरूरत?
  • 2. दलबदल विरोधी कानून कब बना?
  • 3. किस आधार पर अयोग्य ठहराए जा सकते हैं विधायक/सांसद?
  • 4. क्या इस कानून में अब तक कोई संशोधन हुआ है?
  • 5. क्या ये कानून दलबदल पर लगाम लगाने में कामयाब रहा?
दलबदल कानून की जरूरत क्यों पड़ी? कब और कैसे लाया गया, जानिए सबकुछ

चुनाव से पहले टिकट के लिए दल-बदल का खेल तो आम हो चुका था, लेकिन जब चुनाव जीतने के बाद भी विधायक या सांसदों की दलगत आस्था डगमगा जाए तो क्या कहेंगे? हाल ही में गोवा में 15 में से 10 कांग्रेस विधायक सत्ताधारी बीजेपी में शामिल हो गए. तेलंगाना में कांग्रेस के 16 विधायकों में से 12 सत्ताधारी टीआरएस में शामिल हो गए. उधर, कर्नाटक में भी सियासी संकट जारी है. सत्ताधारी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के विधायक इस्तीफा देकर विपक्षी दल बीजेपी के संपर्क में हैं. यानी कि अब बात सिर्फ टिकट के लिए दलबदल की नहीं, बल्कि इससे आगे की है.

लेकिन क्या देश में ऐसा कोई कानून है, जो विधायकों या सांसदों को निजी फायदे के लिए दलबदल से रोकता हो. जी हां, देश में दलबदल विरोधी कानून है. जो विधायकों या सांसदों को दल बदल से रोकता है.

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