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Pregnancy Problems : प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को क्यों होती हैं ये 5 समस्याएं

5 ऐसी बातें जो ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाएं अनुभव करती हैं और एक्सपर्ट इस पर क्या कहती हैं?

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Pregnancy Problems : प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को क्यों होती हैं ये 5 समस्याएं
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प्रेगनेंसी एक स्त्री के जीवन का वो पड़ाव है, जब वो न केवल एक नया जीवन दुनिया में लाने जा रही होती है बल्कि इस सफर में उसके खुद के शरीर में इतने बदलाव आ रहे होते हैं कि कभी-कभी वो समझ नहीं पाती कि बदलाव नार्मल हैं भी या नहीं. हमारे दिमाग में बस एक ही बात आती है, ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं 5 ऐसी बातें जो ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाएं अनुभव करती हैं और एक्सपर्ट इस पर क्या कहते हैं.

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1. बार बार भूख लगना

प्रेगनेंसी के दौरान भूख का बढ़ना आम बात है. प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही हॉर्मोन्स में बदलाव के कारण आपको दिन में किसी भी समय भूख लग सकती है. जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपका शरीर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन में ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने में सक्षम होता है. इसलिए, आप पूरे दिन बहुत भूख महसूस कर सकती हैं. वास्तव में आपके शरीर को पहले छह महीनों के दौरान किसी अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता नहीं होती है. केवल तीसरी तिमाही में आपको एक दिन में अतिरिक्त 200 कैलोरी की आवश्यकता होती है. यह आश्चर्य की बात नहीं है अगर आप आधी रात में भूख महसूस करती हैं.

गर्भावस्था के दौरान भूख को कैसे मैनेज करें?

फाइबर से भरपूर आहार का सेवन और दिन के दौरान बहुत सारे तरल पदार्थ लेने से आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करने में मदद मिल सकती है. दिन के दौरान, खूब सारे फल और सब्जियां खाएं और सफेद के बजाय ब्राउन राइस और पास्ता या साबुत अनाज वाली ब्रेड चुनें. ये खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं और धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं, जिससे आप लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करती हैं और ये कब्ज को रोकने में भी मदद करते हैं.

"चीनी से भरपूर और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें. हालांकि ये आपको क्विक एनर्जी दे सकते हैं पर आपकी मॉर्निंग सिकनेस को और अधिक बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, उनमें वे आवश्यक पोषक तत्व नहीं होंगे, जिनकी आपको और आपके बच्चे को आवश्यकता है."
डॉ. अर्चना धवन बजाज - स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति विशेषज्ञ और आईवीएफ विशेषज्ञ, नर्चर क्लीनिक

सोने से पहले स्टार्च वाला भोजन, जैसे फास्टफूड खाने से आपका ब्लड शुगर स्तर बढ़ सकता है और फिर गिर सकता है. जब आपका ब्लड शुगर कम हो जाता है, तो आपको भूख का एहसास हो सकता है. इसलिए, यदि आप गर्भावस्था के दौरान अपने पसंदीदा टेक अवे खाने की लालसा रखती हैं, तो सुनिश्चित करें कि इसे दिन में सवेरे खाएं.

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2. आधी रात में जगना/रात में कम नींद आना

नींद अच्छे स्वास्थ्य का एक अनिवार्य हिस्सा है और यह तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब आप गर्भवती होती हैं. यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान पर्याप्त मात्रा में अच्छी नींद लेने के लिए संघर्ष कर रही हैं, तो आप अकेली नहीं हैं. प्रेगनेंसी के दौरान अनिद्रा (नींद की कमी) के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं. गर्भावस्था की पहली तिमाही में हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है, जो ज्यादातर असुविधा का कारण बनता है. मतली, उल्टी, हाई टेंपरेचर, सांस की तकलीफ, हाई हार्ट रेट, ब्रेस्ट सोरेनेस, रात में बार-बार पेशाब आना, पैर में ऐंठन सहित दूसरे कारण इसके पीछे हो सकते हैं.

धीरे-धीरे प्रेगनेंसी में, कुछ महिलाओं को पीठ दर्द का भी अनुभव होता है, जो रात के समय सोने की आरामदायक स्थिति खोजने में उनकी मौजूदा परेशानियों को और बढ़ा देता है, खासकर तब, जब बच्चा रात में लात मारना शुरू कर देता है.

स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा, डिलीवरी की चिंता, एक नई मां बनना और घर और काम की जिम्मेदारियों के साथ-साथ दूसरी चिंताएं भी रात में आपकी नींद चुरा सकती हैं.

डॉ. अर्चना धवन बजाज के अनुसार, अधिकांश महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान बताये गये लक्षणों में से कुछ का अनुभव होना आम बात है, लेकिन कभी-कभी ये नींद संबंधी विकार से जुड़े हो सकते हैं. नींद संबंधी विकार आगे चलकर मां या बच्चे के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं, इसलिए यदि आप किसी भी लक्षण का सामना कर रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करना जरूरी है. प्रेगनेंसी के दौरान नींद की कमी कई समस्याओं से जुड़ी होती है जैसे समय से पहले जन्म, प्रीक्लेम्पसिया, हाई ब्लड प्रेशर और प्रेगनेंसी से संबंधित दूसरी जटिलताएं.

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3. त्वचा में खुजली होना

"प्रेगनेंसी के दौरान आजकल त्वचा में खुजली होना आम समस्या हो गई है. कभी-कभी इसका कारण लीवर के एंजाइम में गड़बड़ी हो सकती है. ऐसे में डाक्टर को दिखाएं और खनू की जांच करवा कर दवा शुरू करें".
डॉ. नीति कौतिश, डायरेक्टर ऑब्सट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद

डॉ. अर्चना धवन बजाज बताती हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान त्वचा में खुजली होने के कई कारण हो सकते हैं. इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • सूखापन - गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोन परिवर्तन से आपकी त्वचा रूखी, खुजलीदार और परतदार हो सकती है.

  • हार्मोनल परिवर्तन - जब आप गर्भवती होती हैं, तो आपके शरीर में हार्मोन में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं जो ब्लड सर्कुलेशन से लेकर मूड और खुजली तक सब कुछ प्रभावित कर सकते हैं.

  • कपड़े या परफ्यूम - कुछ प्रकार के कपड़े और केमिकल आपकी त्वचा को गलत तरीके से रगड़ सकते हैं, जिससे आपको खुजली का एहसास हो सकता है.

प्रुरिटिक अर्टिकेरियल पपल्स (PUPPP) गर्भावस्था के बाद के चरणों के दौरान खिंचाव के निशान के आसपास देखा जाने वाला खुजली वाला दाने होते हैं.

कोलेस्टेसिस एक लिवर डिसऑर्डर है, जिसके कारण ब्लड में पित्त एसिड का निर्माण हो सकता है, जिससे पूरे शरीर में खुजली हो सकती है.

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपके शरीर पर आपको खुजली कहां महसूस हो रही है. ज्यादातर पेट, स्तनों के आसपास खुजली का अनुभव हो सकता है क्योंकि इन क्षेत्रों की त्वचा कई बदलावों से गुजर रही होती है. पीयूपीपीपी आपके खिंचाव के निशान के आसपास खुजली पैदा कर सकता है, जबकि हाथ या पैर में खुजली के लिए कपड़े जिम्मेदार हो सकते हैं.

हालांकि कुछ हद तक खुजली होना सामान्य है लेकिन आपके पेट, बाहों और पैरों के आसपास तीव्र खुजली एक संकेत है कि आपके शरीर को ध्यान देने की आवश्यकता है.

यदि आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान तीव्र या लंबे समय तक खुजली का सामना कर रही हैं, तो यह समय है कि आप अपने डॉक्टर से जांच कराएं और आवश्यक उपचार करें. इसके अलावा, कुछ को गर्भावस्था के दौरान योनि में खुजली का अनुभव हो सकता है, जिसका इलाज डॉक्टर द्वारा किया जाना चाहिए.

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4. बार-बार पेशाब लगना

बार-बार पेशाब आना प्रेगनेंसी के शुरुआती संकेत के रूप में चिह्नित किया जाता है और आमतौर पर गर्भाधान के बाद पहले कुछ हफ्तों में शुरू होता है. गर्भाशय में भ्रूण के इंप्लांटेशन के बाद, शरीर गर्भावस्था हार्मोन प्रोजेस्टेरोन और एचसीजी जारी करता है, जो दोनों अर्जन्सी का कारण बन सकते हैं. गर्भावस्था के दौरान, भ्रूण को सहारा देने के लिए शरीर में ब्लड की आपूर्ति बढ़ जाती है. बढ़ी हुई ब्लड आपूर्ति के साथ, गुर्दे को अतिरिक्त तरल पदार्थ को फ्लश करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पेशाब में वृद्धि होती है. दबाव एक अन्य कारक है, जो बार-बार पेशाब आने में का कारण बनता है. फैलता हुआ गर्भाशय मूत्राशय, मूत्रमार्ग और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर दबाव डालता है, जिससे पेशाब करने की इच्छा बढ़ जाती है.

"प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद केगेल व्यायाम करना सुरक्षित है. गर्भावस्था के दौरान रोजाना दस से बारह गिलास पानी पीकर हाइड्रेटेड रहना जरूरी है. हालांकि, प्रेगनेंसी के दौरान प्रवाह को कम करने के लिए आप कुछ चीजें कर सकते हैं, जिनमें कैफीनयुक्त पेय से परहेज करना, सोने से पहले तरल पदार्थों में कटौती करना, पेशाब करते समय आगे झुकना और बाथरूम ब्रेक रिकॉर्ड करने के लिए जर्नल रखना शामिल है."
डॉ. अर्चना धवन बजाज - स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति विशेषज्ञ और आईवीएफ विशेषज्ञ, नर्चर क्लीनिक

केगेल एक्सरसाइज, जिसे पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज के रूप में भी जाना जाता है, पेल्विस और यूरिन ट्रैक्ट की मांसपेशियों को मजबूत कर सकती है और यूरिनरी ब्लैडर को सहारा दे सकती है. कुछ लोगों को अपने यूरिन फ्लो पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकती है.

प्रेगनेंसी के दौरान बार-बार पेशाब आना सामान्य है. हालांकि, यह एक अंडरलाइनिंग मेडिकल प्रॉब्लम का संकेत भी हो सकता है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है. इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं जिन्हें दर्दनाक पेशाब के साथ यूरिन ट्रैक्ट के इन्फेक्शन के लक्षण पाए जाते हैं, उन्हें जल्द से जल्द अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

"जैसे-जैसे गर्भावस्था बढ़ती है, गर्भाशय का साइज बढ़ता है. इस बदलाव के चलते पेशाब की थैली पर दबाव बढ़ता है, इस कारण गर्भवती स्त्री को बार-बार पेशाब के लिए जाना पड़ता है और यह बिल्कुल सामान्य स्थिति है, लेकिन अगर इसके साथ पेशाब करते समय जलन या पेट में दर्द होता है, तो डाक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
डॉ. नीति कौतिश, डायरेक्टर ऑब्सट्रेटिक्स एंड गायनेकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद
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5. इमोशनल रोलर कोस्टर

डॉ. अर्चना धवन बजाज कहती हैं, "किसी भी दो महिलाओं को प्रेगनेंसी के समान लक्षण अनुभव नहीं होते हैं. किसी को मूड स्विंग अनुभव हो सकता है, तो कोई अपने पूरे नौ महीनों में भावनात्मक रूप से स्थिर महसूस कर सकती हैं. साथ ही, एक ही महिला को अपने अलग-अलग गर्भावस्था में मूड में अंतर देखने को मिल सकता है".

प्रेगनेंसी के सामान्य भावनात्मक उतार-चढ़ाव और प्रसवपूर्व डिप्रेशन के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है.

यदि आप समय के साथ उदास, निराश महसूस करती हैं, तो ये महत्वपूर्ण है कि आप, अपने और अपने बच्चे की भलाई के लिए अपने डॉक्टर से बात करें.

प्रेगनेंसी के मूड स्विंग को मैनेज करने के कुछ तरीके यहां दिए गए हैं, यदि वे घर पर, कार्यस्थल पर और हर जगह बीच-बीच में आपके दैनिक जीवन को बाधित कर रहे हैं.

  • अच्छी तरह से खाएं - स्वस्थ, पौष्टिक भोजन और पेट भरने वाले स्नैक्स आपके आंतरिक क्रोध को शांत करने, आपके शरीर को ईंधन देने और आपके मस्तिष्क को सक्रिय करने के लिए अद्भुत काम करते हैं. अपने शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने और अपने स्वाद को संतुष्ट करने के लिए दिन में बार-बार छोटे हिस्सों में खाना खाना सुनिश्चित करें.

  • हल्का व्यायाम करें - चलने या तैरने जैसे हल्के व्यायाम आपको अपने बेबी ब्लूज को दूर करने और अपने मूड को अच्छा करने में मदद कर सकते हैं. योग और ध्यान भी सहायक हैं, इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने का प्रयास करें.

  • नींद को प्राथमिकता दें – जब आप गर्भवती हों तो अच्छी नींद बहुत महत्वपूर्ण होती है. जैसे-जैसे आप प्रसव के करीब पहुंचती हैं, ऐसी गतिविधियों में शामिल हों जो आराम को बढ़ावा देती हैं, बिस्तर पर जाने से पहले सांस लेने के व्यायाम का अभ्यास करें और यदि आपको आराम से सोने में मदद करने के लिए आवश्यक हो तो तकिए का उपयोग करें.

  • अपने प्रियजनों या दूसरी प्रेग्नेंट महिलाओं से बात करें - सुनिश्चित करें कि आपके करीबी परिवार और दोस्तों को यह समझ में आ रहा है कि आप किस स्थिति से गुजर रहे हैं और आपकी जरूरत के समय में आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं. दूसरी गर्भवती माताओं से बात करने से आप सहज महसूस कर सकती हैं.

  • आप अगर अपने भावनात्मक रोलरकोस्टर से उबरने में असमर्थ हैं और यह गर्भावस्था के दौरान आपके दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करता है ,तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram चैनल से जुड़े रहिए यहां)

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