'चीन को समझें' विषय पर पैनल चर्चा

'चीन को समझें' विषय पर पैनल चर्चा

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)| भारत एवं चीन के बेहतर संबंधों के अध्ययन के लिए गठित इंडिया ग्लोबल सेंटर फॉर चाइनीज स्ट्डीज (आईजीसीसीएस) ने एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया जिसमें विशेषज्ञों ने 'सरकार, समाज और व्यापार' के स्तर पर चीन को और अधिक गहराई से समझने पर जोर दिया। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पैनल चर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध प्रकाशन 'ऑर्गनाईजर' के संपादक प्रफुल्ल केतकर एवं आईजीसीसीएस के निदेशक प्रसून शर्मा ने कहा, हमें यानी भारत को 'सरकार, समाज और व्यापार' जैसे तीन व्यापक एवं अलग-अलग स्तरों पर चीन को और अधिक गहराई में समझने की दरकार है।

इंटरनेशनल सोलर एलायंस सचिवालय के निदेशक (भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय) एवं आईएफएस अजय कुमार और जर्मनी में पूर्व भारतीय राजदूत गुरजीत सिंह ने कहा कि भारत और चीन जैसे दो महान देशों एवं अर्थव्यवस्थाओं से वैश्विक कूटनीति को भी रचनात्मक योगदान की आवश्यकता है, लेकिन समस्या यह है कि दोनों ही देशों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं।

बिड़ला इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. हरिवंश चतुवेर्दी एवं इंडिया ग्लोबल के संयोजक डॉ. निखिल ने पैनल चर्चा के दौरान शिक्षा, नवीनता और प्रौद्योगिकी के अलावा एआईए बिग डेटा सहित भारत और चीन दोनों के लिए सहयोग क्षमता पर प्रकाश डाला।

एचएसएस के संयोजक डॉ. राम वैद्य ने आईजीसीसीएस टीम को सुझाव दिया कि वे भारत-चीन के बीच के रिश्तों का गहराई से विश्लेषण करने और चीन जैसे देश के सभी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए विशेष सत्र और सम्मेलन आयोजित करे। इसके साथ ही उन्होंने भारत और चीन के बीच जुड़ने वाले लोगों के लिए काम करने की जोरदार पैरवी की।

इस विशेष पैनल चर्चा में हरियाणा रेन्यूबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (हरेडा) के चेयरमैन इंजीनियर शैलेंद्र शुक्ला, दक्षिण दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) संजय भाटिया ने भी भारत-चीन संबंधों को लेकर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए।

आईजीसीसीएस के मीडिया हेड रवींद्र झा ने बताया कि भारत और चीन के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों का अध्ययन एवं विश्लेषण करने के लिए आईजीसीसीएस मासिक गतिविधियों का आयोजन करेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी और भारतीय थिंक टैंक्स के साथ इस संबंध में नए अध्याय की शुरुआत करने के लिए आईजीसीसीएस को बेहतर सहयोग एवं प्रस्ताव भी हासिल हो रहे हैं।

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