महाराष्ट्र कैबिनेट ने बिल्डरों को दी बड़ी राहत, MJ कॉन्सर्ट को छूट

माइकल जैक्सन कॉन्सर्ट मामले में इंटरटेनमेंट टैक्स में छूट देने का फैसला

Published
भारत
3 min read
माइकल जैक्सन कॉन्सर्ट मामले में इंटरटेनमेंट टैक्स में छूट देने का फैसला
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महाराष्ट्र की ठाकरे कैबिनेट ने बुधवार, 6 जनवरी को दो अहम फैसले लिए हैं. पहला फैसला 24 साल पुराने माइकल जैक्सन कॉन्सर्ट को लेकर लिया गया और इसके लिए इंटरटेनमेंट टैक्स में छूट को मंजूरी दे दी गई. इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट देने के लिए 31 दिसंबर तक डेवलपर्स के चुकाए जाने वाले प्रीमियम की दरों में 50 फीसदी की कटौती का फैसला लिया गया.

अब पहले अगर 24 साल पुराने माइकल जैक्सन कॉन्सर्ट की बात करें तो, इस कार्यक्रम का आयोजन तब (1996 में) शिव उद्योग सेना के मुखिया और मौजूदा एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने किया था. अब सत्ता में आने के बाद शिवसेना सरकार ने इस मामले में राहत देने का फैसला किया है.

दूसरी तरफ कैबिनेट बैठक में सरकार ने महाराष्ट्र में पिछले पांच साल में हुए कई सारे एंटरटेनमेंट शोज से टैक्स के रुप में सरकार को होने वाली आमदनी की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की सूचना राजस्व विभाग को दी है. जिसके जरिए सरकार ये जानने चाहती है कि तत्कालीन फडणवीस सरकार के वक्त कितनी कंपनियों को इस तरह का लाभ मिला था.

क्या है पूरा मामला?

शिवसेना-बीजेपी सरकार की अगुवाई में राज ठाकरे और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी विजक्राफ्ट ने माइकल जैक्सन के इवेंट का मुंबई में आयोजन किया था. उस वक्त हिंदुत्व की बात करने वाली शिवसेना पर विपक्ष ने वेस्टर्न कल्चल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. दिलचस्प बात ये है कि इस प्रोग्राम को क्लासिकल कॉन्सर्ट बताकर सरकार से एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट की अपील की गई थी. जिसे सरकार ने मंजूर भी कर लिया था.

कोर्ट में गया था मामला

लेकिन मुंबई ग्राहक पंचायत ने सरकार के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि जिस प्रावधान के तहत सरकार ने विजक्राफ्ट को 3 करोड़ 34 लाख रुपये की छूट दी है, दरअसल ये नियमों के तहत आता ही नहीं है. ग्राहक पंचायत की ओर से कोर्ट में दलील पेश की गई कि माइकल जैक्सन के 'पॉप शो' को क्लासिकल कॉन्सर्ट बताकर सरकार को गुमराह किया गया है. जिसके बाद कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए छूट की राशि कोर्ट की ट्रेजरी में जमा कर दी थी.

इस मामले में साल 2018 में भी राजस्व विभाग ने सुनवाई की थी. तत्कालीन फडणवीस सरकार के वक्त भी शिवसेना से मुख्यमंत्री बने मनोहर जोशी की सरकार ने इस फैसले को नियमों के तहत बताया था. जिसके चलते याचिकाकर्ता की दलील सुनते हुए कोर्ट ने फिर एक बार गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल दी थी. कोर्ट ने सरकार से कहा कि विजक्राफ्ट कंपनी को एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट दी जाए या नहीं ये सरकार तय करके बताए.

लेकिन 5 जनवरी को हुई इस कैबिनेट बैठक में आखिरकार ठाकरे सरकार ने 24 साल पुराने मामले में राहत दे डाली है. हालांकि मुंबई ग्राहक पंचायत ने सीएम को खत लिखते हुए छूट ना देने की मांग की है. कहा गया है कि इस राशि से किसी एक कंपनी लाभ पहुंचाने की बजाय कोरोना संकट की उपाय योजनाओं पर खर्च करने के लिए सीएम रिलीफ फंड में जमा कर दिया जाए.

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ा फैसला

महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक में 31 दिसंबर में 2021 तक रियल एस्टेट पर सभी प्रीमियमो में 50 % कटौती का फैसला किया गया है. लेकिन लाभ लेने वाले बिल्डरों को ग्राहकों की स्टाम्प ड्यूटी भरनी होगी. जिससे बिल्डरों के साथ घर खरीदने वालों को भी रियायत मिलेगी.

राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए दीपक पारिख समिति का गठन किया गया था. जिसके सुझाव के बाद कैबिनेट ने आज इस फैसले पर मुहर लगा दी. समिति ने निवेश बढ़ाने के लिए और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) की उपलब्धता बढ़ाने के सुझावों के साथ सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी.

प्रीमियम में रियायत 1 अप्रैल, 2020 या मौजूदा रेडी रेकनर रेट, जो अधिक हो उस हिसाब से वसूले जाने का प्रावधान है. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में लॉकडाउन की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा नुकसान हुआ है. ऐसे में रियल एस्टेट को बूस्ट देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने ये पहल की है.

बता दें कि प्रीमियम में बिल्डरों को छूट देने के फैसले का बीजेपी ने कड़ा विरोध किया है. फडणवीस ने कहा था कि चंद बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए ठाकरे सरकार ये कदम उठा रही है.

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