चुनाव से पहले तमिलनाडु में हलचल, लौटकर अप्सरा AIADMK में आयीं

AIADMK से लेकर फिर AIADMK का सफर

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राज्य
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चुनाव से पहले तमिलनाडु में हलचल, लौटकर अप्सरा AIADMK में आयीं

दक्षिण भारत के एक बड़े राज्य तमिलनाडु में चुनाव होने वाले हैं और चुनावी हलचल बढ़ने लगी है. चर्चित ट्रांसजेंडर अप्सरा रेड्डी ने एक बार फिर से AIADMK पार्टी का हाथ थाम लिया है. पार्टी में वो किस जिम्मेदारी पर काम करेंगी अभी ये साफ नहीं है.

अप्सरा ने AIADMK में शामिल होने का ऐलान करते हुए ट्विटर पर लिखा कि- "पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम के जरिए मैं फिर से AIADMK में शामिल हो गई हूं. अब अम्मा की सरकार तमिलनाडु में तीसरी बार बनवाने के लिए तैयार हूं."

AIADMK से लेकर फिर AIADMK का सफर

बता दें कि अप्सरा को राजनीति में AIADMK की दिग्गज नेता रहीं जयललिता ही राजनीति में लेकर आई थीं, इसके बाद वो शशिकला दिनाकरण वाले हिस्से के साथ जुड़ गईं. हालांकि कुछ दिन बाद वे फिर से OPS-EPS गुट में आ गईं. अप्सरा रेड्डी ने 2019 लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस का भी दामन थामा था, उनको कांग्रेस पार्टी ने महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया था. लेकिन अब एक बार फिर वक्त का पहिया घूमा है और वो AIADMK में वापस आकर महिला विंग का कामकाज देखने वाली हैं.
कांग्रेस छोड़कर AIADMK में शामिल हुई अप्सरा
कांग्रेस छोड़कर AIADMK में शामिल हुई अप्सरा
(फोटो- ट्विटर/अप्सरा)

कठिन रहा शुरुआती जीवन

हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में अप्सरा ने अपनी पृष्ठभूमि के बारे तफसील से बताया है. अप्सरा का जन्म एक रूढ़िवादी दक्षिणभारतीय परिवार में हुआ, उनके पिता एल्कोहॉलिक थे लेकिन अप्सरा की मां से अच्छी बनती थी. मैंने खुद को कभी गे नहीं माना, मुझे शुरू में ही पता चल गया था कि मैं महिला हूं. मैंने कभी घर से भागने के बारे में नहीं सोचा, बल्कि मैं उन्हें समझाना चाहती थी. अप्सरा रेड्डी का इसके पहले नाम अजय रेड्डी था.

पेशे से पत्रकार रही हैं अप्सरा

अप्सरा ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है. उन्होंने मोनाश यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बी.ए. किया है. इसके साथ ही उन्होंने बॉडकास्टिंग पत्रकारिता में एम.ए. सिटी यूनिवर्सिटी, लंदन से किया है. रेड्डी लंबे वक्त तक पत्रकारिता भी कर चुकी हैं. उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, द हिंदू जैसे नामी संस्थानों में काम किया है.

जयललिता के निधन के बाद AIADMK में काफी कुछ बदला

आने वाले चुनाव में AIADMK 10 साल की एंटी-इंकम्बेंसी का भी सामना करेगी और 2016 में जयललिता की मौत के बाद पार्टी के नियंत्रण के लिए हुई उठापटक से भी पार्टी पूरी तरह उबर नहीं पाई है.

2016 में जयललिता की मौत के तुरंत बाद पन्नीरसेल्वम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे. शशिकला के AIADMK का नियंत्रण लेने के बाद कई घटनाओं का दौर चला और उन्हें सीएम पद से हटना पड़ा था.

तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री है पलानीसामी. पलानीसामी को एक वक्त शशिकला नटराजन की कठपुतली समझा जाता था. हालांकि, 2017 में मुख्यमंत्री बनने और आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला के जेल जाने के बाद पलानीसामी ने अपनी इस छवि को बदल दिया है. शशिकला के वफादार समझे जाने वाले पलानीस्वामी ने ही उन्हें AIADMK से बाहर किया था

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