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Char Dham Yatra 2022: केदारनाथ से यमुनोत्री तक- जानिए कितने करोड़ का कारोबार हुआ

Uttarakhand चार धाम यात्रा अपने आखिरी पड़ाव पर, यमुनोत्री में घोड़े खच्चरों वालों का हुआ 21 करोड़ का कारोबार

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न्यूज
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Uttarakhand में चार धाम यात्रा अपने आखिरी पड़ाव पर है. बाबा केदार के कपाट गुरुवार, 27 अक्टूबर को विधि विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए,  वहीं यमनोत्री के कपाट भी विधिविधान के साथ से बंद कर दिए गए. इधर सरकार के प्रयासों से कोरोना काल के बाद चार धाम यात्रा की रौनक पुन: पटरी पर लौटती हुई नजर आई. चारधाम यात्रा ने इस साल तमाम रिकॉर्ड तोड़ कर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं.

इस बार केदारनाथ और यमुनोत्री यात्रा में सिर्फ घोड़ा खच्चरों, हेली टिकट और डंडी कंडी के यात्रा भाड़े से लगभग 211 करोड़ के आस- पास कारोबार हुआ है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा के सफल संचालन को लेकर खुशी जताते हुए कहा कि

प्रधानमंत्री जी के कथनानुसार आने वाला दशक उत्तराखण्ड है, उसकी शुरूआत आज से ही हो चुकी है.
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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इस बार की चार धाम की यात्रा बहुत उत्साह भरी रही है. प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है. प्रधानमंत्री जी द्वारा धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थ यात्रियों को स्थानीय उत्पादों को खरीद पर पांच प्रतिशत खर्च करने के लिए अपील की गई है. आने वाले समय में हम स्थानीय उत्पादों के बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे. मानस खंड कारीडोर के मास्टर प्लान का काम भी शीघ्र प्रारम्भ किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य समस्त पौराणिक मंदिरों को संवारने का है और उसको पर्यटन से जोड़ना है.

उन्होंने कहा कि, सरकार के प्रयासों व बेहतर यात्रा प्रबंधन की वजह से 46 लाख यात्रियों ने इस साल चार धाम यात्रा की. पिछले दो दशक में यह सबसे अधिक आंकड़ा है, वहीं श्री केदारनाथ धाम में 15 लाख 36 हजार तीर्थ यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन किए. आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को भी यात्रा ने साकार किया है. चारधाम यात्रा प्रदेश की आर्थिकी की लाईफ लाईन है.

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यमुनोत्री में घोड़े खच्चरों वालों का हुआ 21 करोड़ का कारोबार

इधर यमुनोत्री में घोड़े खच्चरों वालों का लगभग 21 करोड़ का कारोबार इस साल हुआ है. यमनोत्री धाम में लगभग 2900 घोड़े खच्चर पंजीकृत हैं. जि़ला पंचायत के अनुसार इस साल यात्रा काल में 21 करोड़ 75 लाख का कारोबार हुआ है. यह आँकड़ा रिकॉर्ड तोड़ है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि "प्रधानमंत्री जी ने देश की सांस्कृतिक विरासत को पुनस्र्थापित किया है. और विजन के अनुरूप केदारनाथ व बदरीनाथ धाम का पुनर्विकास किया जा रहा है."

केदारनाथ में हुआ 190 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार

इस वर्ष केदारनाथ यात्रा स्थानीय व्यवसाइयों के लिए काफी बेहतर रही. सिर्फ यात्रा के टिकट, घोड़ा खच्चरों और हेली और डंडी कंडी के यात्रा भाड़े की बात करें तो करीब 190 करोड़ के आस-पास यह कारोबार हुआ है. केदारनाथ धाम इस बार घोड़े खच्चर व्यवसाइयों ने करीब 1 अरब 9 करोड़ 28 लाख रुपए का रिकॉर्ड कारोबार किया. जिससे सरकार को भी 8 करोड रुपए से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ.

यात्रा सुगम बनाने को लेकर प्रशासन ने 4302 घोड़ा मालिकों के 8664 घोड़े खच्चर पंजीकृत किए थे इस सीजन में 5.34 लाख तीर्थयात्रियों ने घोड़े खच्चरों की सवारी कर केदारनाथ धाम तक यात्रा की.

वही डंडी-कंडी वालों ने 86 लाख रुपए की कमाई की और हेली कंपनियों ने 75 करोड़ 40 लाख रुपए का कारोबार किया. इधर सीतापुर और सोनप्रयाग पाकिर्ंग से लगभग 75 लाख का राजस्व सरकार को प्राप्त हुआ.

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GMVN की अनुमानित आय भी 50 करोड़ रुपये के करीब

इसके अलावा चारधाम यात्रा में यात्रा मार्ग के सभी होटल / होमस्टे, लाज और धर्मशालाएं भी पिछले छ: माह तक बुक रही. पिछले सालों तक जीएमवीएन (Garhwal Mandal Vikas Nigam) जहां आर्थिक नुकसान झेल रहा था इस साल अगस्त तक 40 करोड़ की आय कर चुका है. GMVN के प्रबंध निदेशक बंशीधर तिवारी ने बताया कि यह आँकड़ा 50 करोड़ के करीब जाने का अनुमान है. इसके अलावा चारधाम यात्रा से जुड़े टैक्सी व्यवसायों ने भी पिछले सालों की औसत आय से तीन गुना अधिक का कारोबार किया है.

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प्रधानमंत्री ने यात्रा खर्चे का 5 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च करने का आह्वान किया

प्रधानमंत्री ने बीते 21 अक्टूबर को बद्रीनाथ धाम स्थित माणा गाँव में Vocal for Local का जिक्र करते हुए देशवासियों से आग्रह किया कि जहां भी जाएं एक संकल्प करें कि यात्रा पर जितना भी खर्च करते हैं उसका कम से कम 5 प्रतिशत वहां के स्थानीय उत्पाद खरीदने पर खर्च करें.

इन सारे क्षेत्रों में इतनी रोजी रोटी मिल जायेगी. आप कल्पना भी नहीं कर सकते ऐसे में अब भविष्य को देखते हुए चारधाम यात्रा में स्थानीय उत्पादों को भी बड़ा मार्केट मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

इस मायने में भी खास रही यात्रा

गौरीकुण्ड-केदारनाथ व गोविंदघाट-हेमकुण्ट साहित्य रोपवे परियोजनाओं का भी प्रधानमंत्री ने शिलान्यास किया था. इनके बनने से श्रद्धालुओं की घंटों की यात्रा मिनटों में पूरी होगी.

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