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कर्नाटक के प्रखर ने कूच बिहार फाइनल में खेली 404 रन की नाबाद पारी, युवी का रिकॉर्ड टूटा

Prakhar Chaturvedi ने युवराज सिंह का 25 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है

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भारत के घरेलू क्रिकेट में सोमवार,15 जनवरी को युवराज सिंह का 25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा. कर्नाटक की ओर से खेलने वाले प्रखर चतुर्वेदी (Prakhar Chaturvedi) ने अंडर-19 पुरुषों के लिए भारत के प्रमुख मल्टी-डे टूर्नामेंट कूच बिहार ट्रॉफी के फाइनल में मुंबई के खिलाफ 400 रन बनाकर भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया.

आइए पहले आपको उनके रिकॉर्ड को बताते हैं और फिर आपको उसके अबतक के क्रिकेट करियर से रूबरू कराते हैं.

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25 साल बाद टूटा युवराज सिंह का रिकॉर्ड 

मुंबई और कर्नाटक के बीच खेले गए अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी मैच में प्रखर चतुर्वेदी ने नाबाद 404 रनों की पारी खेलकर इतिहास रच दिया है. 404 रन बनानें के लिए उन्होंने 638 गेंदों का सामना किया. जिसमें उन्होंने 46 चौके और 3 छक्के भी जड़े है. इस दौरान प्रखर ने भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह का फाइनल में सबसे अधिक 358 रन बनानें का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है.

दरअसल युवराज सिंह ने साल 1999 में पंजाब की ओर से खेलते हुए फाइनल में बिहार के खिलाफ ये रिकॉर्ड बनाया था. इस मैच में एमएस धोनी भी शामिल थे.

प्रखर चतुर्वेदी का नाबाद 404 रन अब अंडर-19 कूच बिहार टूर्नामेंट के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया है. 2011-12 सीजन में असम के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए विजय जोल ने सर्वाधिक 451 रन बनाए थे.

कैसा रहा मैच का हाल, जिसमें प्रखर चतुर्वेदी ने 404* रनों की पारी खेली

15 जनवरी को मुंबई और कर्नाटक के बीच कूच बिहार ट्रॉफी का फाइनल मैच चल रहा था. मतलब साफ था जो भी टीम मैच जीतती वो ट्रॉफी अपने साथ ले जाती. कर्नाटक ने टॉस जीतकर मुंबई को बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई की टीम ने आयुष म्हात्रे की शानदार 145 रनों की पारी की बदौलत 380 रन बनाए.

अब बारी थी कर्नाटक की, ओपनिंग करने आए प्रखर चतुर्वेदी और कार्तिक ने अच्छी शुरुआत दी. दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 109 रनों की साझेदारी की. कार्तिक पचासा मार के आउट हो गए. तीसरे नंबर पर उतरे हर्शिल धर्मानी और प्रखर ने मिलकर 290 रनों की पार्टनरशिप की, जिसमें हर्शिल 169 रन बनाकर आउट हो गए थे. कार्तिकेय केपी ने 72 रन बनाए. प्रखर चतुर्वेदी ने सभी बल्लेबाजों के साथ मिलकर अंत तक बैटिंग की. प्रखर चतुर्वेदी ने इस दौरान 223 ओवर तक बल्लेबाजी की, और टीम के स्कोर को 890 तक लेकर गए. प्रखर मैच में 404 रन बनाकर नाबाद लौटे. दोनों टीमों के बीच मैच ड्रा रहा. पहली पारी में 510 रनों की बढ़त की वजह से कर्नाटक टीम को विजेता घोषित किया.

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प्रखर, प्रतिदिन 80 किलोमीटर सफर तय कर एकेडमी जाते थे

प्रखर चतुर्वेदी एक पढ़े-लिखे फैमिली से आते हैं. प्रखर के पिता बेंगलुरु में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. प्रखर की मां रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक हैं. जिस कारण प्रखर को भी इकोनॉमिक्स में बेहद रुचि है.

espncricinfo की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रखर चतुर्वेदी क्रिकेट खेलने के लिए 80 किलोमीटर सफर करते थे. प्रखर का घर इलेक्ट्रॉनिक सिटी में है. क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए वे 40 किलोमीटर दूर देवनहल्ली शहर की एक एकेडमी में जाते थे.

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