टिकैत को मीडिया ज्यादा तवज्जो देता है: किसान नेता दर्शन पाल

किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल से खास बातचीत

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किसान आंदोलन के तीन महीने पूरे हो गए. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल से क्विंट ने खास बातचीत की. जिसमें आंदोलन की भावी योजना, भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की भूमिका, नेता राकेश टिकैत, 26 जनवरी, और किसानों के विरोध का चुनावी नतीजा समेत तमाम मुद्दे शामिल हैं.

क्या कुछ दिनों में किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा?

लोगों की ग़लतफ़हमी है कि आंदोलन जल्द ख़त्म हो जाएगा. जब आंदोलन की शुरुआत हुई तभी हम ये सोच कर चले थे की ये लंबा चल सकता है. कटाई का सीज़न होने की वजह से किसान काम में लगे हुए हैं. दूसरे वर्ग भी किसानों के आंदोलन के साथ जुड़ रहे हैं. ऐसे में ये सिर्फ़ गलतफहमी ही है कि जल्द ख़त्म हो जाएगा.

लाखों लोग महापंचायत में शामिल हो रहे हैं, फिर दिल्ली बॉर्डर पर भीड़ क्यों कम हो रही है ?

26 जनवरी को जो हुआ उससे हमारा आंदोलन प्रभावित हुआ. हमारे आंदोलन से लोगों को निराशा हुई. हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड के लोग हमारे आंदोलन से किनारा करने लगे थे. लेकिन 28 जनवरी के बाद पंजाब, यूपी, हरियाणा के लोग बॉर्डर पर आने लगे. ये सही है कि भीड़ कम हो रही है लेकिन अगर कोई भी कदम उठाया जाता है तो बड़े पैमाने पर लोग एकत्रित हो जाएंगे.

राकेश टिकैत और किसान आंदोलन में उनकी भूमिका पर क्या सोचते हैं दर्शन पाल?

राकेश टिकैत का किसान आंदोलन में जितना रोल है मीडिया उससे ज़्यादा दिखा रहा है. राकेश टिकैत का बोलने का स्टाइल, काम करने का स्टाइल उनके किसान संगठनों जैसा है. पंजाब के किसान संगठनों का तरीक़ा अलग होता है.

तीन महीने से चल रहा आंदोलन सरकार के लिए क्या संदेश?

ये किसी फ़ैक्ट्री या गांव का आंदोलन नहीं है. ये मुद्दे पूरे देश से जुड़े हुए हैं. किसान समाज का रीढ़ की हड्डी है. बीजेपी को परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए

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