‘मुझे बताए बगैर पति अमेरिका लौट गए और मैसेज पर तलाक भेज दिया’

‘मुझे बताए बगैर पति अमेरिका लौट गए और मैसेज पर तलाक भेज दिया’

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वीडियो एडिटर: मोहम्मद इब्राहिम

जब 40 साल की रेशमा अजीज अपने पति के साथ बेंगलुरु आईं, तब उन्हें बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि उन्हें भारत में छोड़ देने के लिए लाया गया है. रेशमा अपने पति जावेद के साथ क्विंसी, इलिनोइस में अपने दो बच्चों के साथ रह रही थीं.

रेशमा ने कहा कि उन्हें ये जान कर बहुत बड़ा धक्का लगा कि उनके पति उन्हें बिना बताए क्विंसी लौट गए हैं.

मैं और मेरे पति शुक्रवार 30 नवंबर को बेंगलुरु पहुंचे. हर बार की तरह इमिग्रेशन की प्रक्रिया के बाद मैंने अपना पासपोर्ट अपने पति को दे दिया. बेंगलुरु आने के बाद मैंने देखा कि मेरे पति को कुछ और भी काम थे, उन्होंने मुझे अपने परिवार के पास जाने के लिए ये कह कर मजबूर कर दिया कि वो मेरे परिवार और मुझसे 2-3 दिन में मिलने आएंगे, ताकि शादी में जो मतभेद हैं, उसे सुलझाया जा सके. मुझे बाद में पता चला कि मेरे पति अमेरिका पहुंच चुके हैं, मुझे बताए बगैर, मेरे पास ड्राइविंग लाइसेंस के अलावा कुछ और डॉक्यूमेंट नहीं है.
रेशमा 

रेशमा को बेंगलुरु में छोड़ देने के बाद जावेद ने रेशमा को तलाक का टेक्स्ट मैसेज और वॉइस मैसेज भेजा.

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इससे पहले कि मैं उन्हें कॉल करती, मेरे पास तलाक का एक ऑडियो और टेक्स्ट मैसेज आया. उन्होंने मुझे बेसहारा छोड़ दिया है, तो अब मैं पूरी तरह अपने परिवार पर निर्भर हूं. सिर्फ एक फोन कॉल के लिए भी, मैं उन पर निर्भर हूं. उन्होंने मेरा नंबर बंद कर दिया है, उनके फोन पर मेरा नंबर भी ब्लॉक कर दिया है, यहां तक कि मेरे बच्चों के फोन और घर के फोन पर भी मेरा नंबर ब्लॉक है.
रेशमा 

फ्लोरिडा में 10 साल रहने के बाद ये कपल अपनी 13 साल की बेटी और 10 साल के बेटे के साथ 2017 में क्विंसी, इलिनोइस शिफ्ट हो गए, लेकिन कॉल्स ब्लॉक के बाद रेशमा को काफी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पढ़ रहा है. रेशमा ने अपनी दोस्त की मदद लेकर अपने बच्चों को कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की...

वो बहुत मासूम है और उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मैं उनसे शायद 2017 की गर्मियों में मिली थी, मैंने शेरिफ से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने कहा कि ये गैर कानूनी नहीं .है एक फिजिशियन के तौर पर उनके पति की छवि शहर में अच्छी है तो ये अभी पुलिस केस नहीं है
रेशमा की दोस्त

क्विंट ने जावेद खान से बात करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है.

अब रेशमा बेंगलुरु में रह कर यूएस वापस जाने के लिए कागजात इकट्ठा कर रही हैं. अपने पास रखी सिर्फ एक पासबुक की मदद से रेशमा ने आधार कार्ड के लिए भी अप्लाई कर दिया है और उनका कहना है कि वो जल्द से जल्द यूएस जाएंगी और यूएस में अपनी लड़ाई लड़ेंगी.

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