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ध्यानचंद: ‘हॉकी का जादूगर’, जिन्होंने  दुश्मनों को धूल चटाई  

ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. 

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हॉकी के नामचीन खिलाड़ी और कप्तान रहे मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में हुआ. उन्‍हें भारत और विश्व हॉकी में सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल किया जाता है. मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन भारत में "नेशनल स्पोर्ट्स डे" के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन स्पोर्ट्स में खास परफॉर्मेंस दिखाने वाले खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है. साल 1956 में भारत सरकार ने मेजर ध्यानचंद को भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा. जानिए ध्यानचंद से जुड़ी कुछ खास बातें:

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1922 में ध्यानचंद 16 साल की उम्र में सेना में शामिल हो गए थे और वहीं से शुरू हुआ उनके हॉकी प्लेयर बनने का सफर-

ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. 

1928 में एम्सटर्डम ओलंपिक में उनके नाम 14 गोल दर्ज हैं. इसी टूर्नामेंट में जीत के बाद उन्हें 'हॉकी का जादूगर' नाम से जाना जाने लगा.

ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. 
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ध्यानचंद ने 1928,1932 और 1936 में देश को हॉकी में गोल्ड दिलाया. वो भारतीय टीम के हॉकी कप्तान भी रहे. उनकी कप्तानी में ही टीम ने ओलंपिक में गोल्ड जीता.

ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. 

नीदरलैंड्स में ध्यानचंद की हॉकी स्टिक तोड़कर चेक किया गया था कि कहीं इसमें चुंबक तो नहीं लगी.

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ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. 

ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक स्पोर्टस क्लब में ध्यानंचद की मूर्ति लगी हुई है इस मूर्ति में उनके चार हाथ हैं. इन चारों हाथों में हॉकी स्टिक है. यह मूर्ति उनके खेल का जादू दिखाने का परिचायक देने के लिए लगाई गई है कि उनकी हॉकी में कितना जादू था.

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ध्यानचंद को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 1956 में पद्मभूषण किया गया था. हालांकि अब तक उन्हें भारत रत्न अभी तक नहीं दिया गया है, लेकिन इसके लिए लगातार मांग की जा रही है.

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