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एपल पर सरकार का यूटर्न: वॉट्सऐप और आईमैसेज के लिए IT नियमों में भेदभाव क्यों?

सरकार ने पहले एपल को IT नियमों के पालन के लिए लेटर भेजा, फिर वापस लिया

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एपल पर सरकार का यूटर्न: वॉट्सऐप और आईमैसेज के लिए IT नियमों में भेदभाव क्यों?
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हाल ही में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeiTy) ने भारत स्थित अमेरिका की बड़ी टेक कंपनी एपल (Apple) के ऑफिस में लेटर भेजा था. जिसमें कहा गया था कि एपल की आईमैसेज (iMessage) सर्विस नए आईटी नियम 2021 का पालन करे. लेकिन बाद में सरकार ने पत्र वासल ले लिया. सरकार के इस कदम से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं.

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iMessage वॉट्सऐप से अलग कैसे

सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्री (SSMI) को लेकर मंत्रालय किस आधार पर यह निर्णय ले रहा है कि किसे महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्री के रूप में वर्गीकृत किया जाए? आईमैसेज (iMessage) व्हाट्सएप (WhatsApp) से कैसे अलग है? क्या प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता है?

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मिनिस्ट्री के सूत्रों से उनकी चर्चा हुई जिन्होंने आईमैसेज को आईटी नियमों से बाहर रखने को सही बताया

यहां क्विंट इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अपार गुप्ता, सॉफ्टवेयर फाउंडेशन लीगल सेंटर (SFLC) के लीगल डायरेक्टर प्रशांत सुगथन और आईटी लॉ एक्सपर्ट एडवोकेट सत्या मुले से बात करके इस चीज को डिकोड करने की कोशित कर रहा है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री द्वारा किए गए दावे सही हैं.

दावा :

Apple के आईमैसेज (iMessage) को 'सोशल मीडिया मध्यस्थ' नहीं माना जाएगा, क्योंकि यह दो या दो से अधिक यूजर्स के बीच बातचीत करने के लिए "मुख्य रूप से या पूरी तरह से" एक त्वरित संदेश सेवा प्रदाता नहीं है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

इस पर सुगथन विस्तार से बताते हैं कि आईटी नियमों के अंतर्गत दी गई परिभाषा के अनुसार, एपल की आईमैसेज (iMessage) सर्विस या एप को 'सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्री' के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक मध्यस्थ है.

जो "मुख्य रूप से या पूरी तरह से दो या दो से अधिक यूजर्स के बीच ऑनलाइन बातचीत को सक्षम बनाता है. इसके साथ ही यूजर्स को इस सर्विस में क्रिएट, अपलोड और शेयर जैसे ऑप्शन मिलते हैं, जिससे वह जानकारी को संशोधित या एक्सेस करके उसे प्रसारित भी कर सकता है."

यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि आईमैसेज (iMessage) अपनी वेबसाइट पर यह स्पष्ट रूप से बताता है कि यह एक मैसेज-एक्सचेंजिंग प्लेटफार्म है जो आपको वाई-फाई या सेलुलर-डेटा नेटवर्क के माध्यम से किसी अन्य आईफोन, आईपैड, आईपॉड टच या मैक पर टेक्स्ट, फोटो या वीडियो भेजने में सक्षम बनाता है.
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दावा :

कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि चूंकि भारत में आईमैसेज के 5 मिलियन से कम यूजर्स हैं इसलिए यह सर्विस आईटी नियमों के दायर में नहीं आती है.

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं :

रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट और साइबरमीडिया की रिसर्च के आंकड़ों पर आधारित टेकक्रंच की एक रिपोर्ट बताती है कि एप्पल कंपनी देश में (भारत में) अपना मार्केट शेयर दोगुना करने में सफल रही है.

भारत में 760 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन यूजर हैं, वहीं स्टेटिस्टा के अनुसार जून 2020 में Apple के iPhone की हिस्सेदारी लगभग 3.54 प्रतिशत थी. यह आंकड़ा इस ओर इशारा करता है कि भारत में आईमैसेज (iMessage) के लिए लगभग 27 मिलियन यूजर्स हैं. iMessage सेवा आईफोन (iPhone) या मैक (Mac) ऑपरेट करने वाले किसी भी यूजर्स के लिए उपलब्ध है.

ऐसे में यदि हम भले ही यह मान लें कि देश की कुल iPhone चलाने वाली आबादी का पांचवां हिस्सा ही iMessage सर्विस का उपयोग करता है या केवल यह एप चालू रखता है तो भारत में यह आंकड़ा लगभग 5.4 मिलियन यूजर्स का होगा. इस तरह iMessage आईटी नियमों के दायरे में आता है और उसे आईटी कानूनों का पालन करना चाहिए.

इस मामले पर सुगथन कहते हैं कि यदि एप के यूजर्स की संख्या तय सीमा को पार कर गई है तो उसे उन नियमों का पालन करना होगा जो सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्रीज (SSMIs) पर लागू होते हैं.

दावा :

अन्य मैसेजिंग एप्स जैसे व्हाट्सएप की तरह ही क्या कोई भी आईमैसेज को डाउनलोड करके इसका इस्तेमाल कर सकता है? यदि इस तर्क को लागू किया जाए तो इसमें फूड डिलेवरी एप और गेमिंग प्लेटफार्म भी शामिल हो जाएंगे क्योंकि इसमें भी यूजर्स व गेमर्स को चैट करने का विकल्प मिलता है. ऐसे में क्या उन्हें भी सोशल मीडिया मध्यस्थ माना जाना चाहिए?

इसका जवाब है - नहीं.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं :

यह स्पष्ट है कि एप्पल का iMessage एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है और यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है. इसके साथ ही यहां पर यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि फूड डिलेवरी एप्स में उसी एप के अन्य यूजर्स के साथ चैट करने की सुविधा नहीं है.

द क्विंट को इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अपार गुप्ता ने बताया कि चूंकि आईटी नियमों के तहत आने वाली परिभाषा स्पष्ट है, इसलिए iMessage को आईटी नियमों के तहत आने वाले एप्लिकेशन के दायरे से बाहर करने का कोई मतलब नहीं है.

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"भेदभावपूर्ण" आईटी नियम

जहां एक ओर नए आईटी नियम 2021 से व्हाट्सएप और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्री (SSMI) के सामने चुनौतियां हैं, वहीं दूसरी ओर नियमों के कार्यान्वयन को लेकर भारत सरकार के समक्ष भी समान रूप से चुनौतियां है.

अपार गुप्ता का मानना है कि आईटी मंत्रालय द्वारा iMessage को नॉन-सोशल इंटरमीडिएट घोषित करने का निर्णय अन्य एप्लीकेशन्स के लिए अनुचित है.

वे कहते हैं कि "मेरा मानना ​​है कि आईटी नियम सब्जेक्टिव ढंग से लिखे गए हैं, यह स्वयं पूरे कानून की अस्पष्टता को दर्शाता है. इस तरह के मामले आने से इस क्षेत्र के अन्य आवेदकों के लिए समान स्तर नहीं रह जाएगा, साथ ही इससे अपने आप ही नियामक असंतुलन पैदा होने लगेगा."

एप्पल इंडिया के इस मामले ने आईटी मंत्रालय ने नए आईटी नियमों के विरोधियों को काफी मौके दिए हैं.

आईटी लॉ एक्सपर्ट एडवोकेट सत्या मुले कहते हैं कि यदि आईटी नियम तर्कसंगत हैं और निष्पक्ष तौर पर लागू किए जाते हैं तो एप्पल के आईमैसेज को व्हाट्सएप जैसे अन्य प्लेटफार्म की तरह ही समान ट्रीटमेंट मिलना चाहिए.

अगर ऐसा नहीं होता तो प्रथम दृष्टया यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि नए आईटी नियमों के कुछ प्रावधान मौलिक अधिकारों के प्रावधानों जैसे कि अनुच्छेद 14 - समानता, कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया तथा नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों के प्रावधानों के खिलाफ हैं. जो भारत के संविधान के अंतर्गत गारंटीड हैं."
सत्या मुले, एडवोकेट, बॉम्बे हाईकोर्ट

सरकार कोई भी लीगल रिक्वेस्ट नहीं कर सकती

सभी कानूनी विशेषज्ञों ने यही बताया कि अगर एप्पल के आईमैसेज (iMessage) को सोशल मीडिया इंटरमीडिएट नहीं माना जाता है, तो इसका मतलब यह भी है कि संदेश के सोर्स की पहचान से संबंधित नियम कंपनी पर लागू नहीं होगा.

अपार गुप्ता कहते हैं कि इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव यूजर्स की च्वॉइस पर पड़ेगा. इससे यूजर iMessage जैसे एप्लीकेशन्स को प्राथमिकता देंगे, क्योंकि यह आईटी नियमों के दायरे में नहीं आते हैं.

अपार गुप्ता आगे कहते हैं कि "चूंकि एप्पल को सोशल मीडिया इंटरमीडिएट्री (SSMI) के रूप में नहीं माना जा रहा है, इसलिए एप्पल पर कोई भी जिम्मेदारी लागू नहीं होती है, इसलिए सरकार के पास एप्पल से कानूनी अनुरोध करने का भा पावर नहीं होगा".

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