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ऐसी आजादी और कहां!

स्‍वतंत्रता दिवस की सालगिरह पर हर ओर जश्‍न का माहौल है. कहीं समारोह में असली आजादी के मायने तलाशे जा रहे हैं, कहीं देश की तरक्‍की की राह दिखाई जा रही है.

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आजादी की सालगिरह के जश्‍न में डूबा देश

देशभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन

लालकिले से पीएम का भाषण मुख्‍य आकर्षण

कुछ नई योजनाओं का ऐलान मुमकिन

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एक झलक में सभी लेटस्ट अपडेट्स

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आजादी की सालगिरह के जश्‍न में डूबा देश

देशभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन

लालकिले से पीएम का भाषण मुख्‍य आकर्षण

कुछ नई योजनाओं का ऐलान मुमकिन

फंडे यंगिस्‍तान के 

स्‍मार्ट दिखना जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्‍यादा स्‍मार्ट तरीके से सोचना जरूरी है. इसलिए यंग जनरेशन के लिए हम लेकर आए हैं फंडे यंगिस्‍तान के. वैसे फंडे, जो आपको दिखाएंगे नई राह.

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ऑफिस में स्‍मार्ट तरीके से कैसे काम करें

लव मैरिज से पहले ये जानना जरूरी है

पति-पत्‍नी के बीच न आए पैसा

बेहतर भविष्‍य के लिए अभी से करें सेविंग

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शिखर पर शेयर बाजार

शेयर बाजार पिछले कुछ वक्‍त से नई ऊंचाइयां छूता नजर आ रहा है. ऐसे वक्‍त में निवेशकों को किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए, जानने के लिए आइए क्‍विंट हिंदी पर

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नई ऊंचाइयों की ओर शेयर बाजार

निवेशक समझदारी से करें फैसला

किन कंपनियों के शेयर ऊपर, किनके लुढ़के

क्‍या है बाजार की मौजूदा स्‍थ‍िति

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Soul खोल With देवदत्त पट्टनायक

इस दौर में हर नेता ‘तू बुरा-तू बुरा’ का शोर मचाता क्यों दिखाई देता है? ताजा राजनीतिक माहौल पर क्या सोचते हैं भारतीय पौराणिक कथाओं को नये नजरिये से देखने वाले देवदत्त पट्टनायक. जानिए, हर शुक्रवार सुबह 9 बजे, QuintHindi.com पर. 

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आज के राजनीतिक माहौल में जनता की फिक्र की बजाय सिर्फ आरोपों का शोर क्यों सुनाई-दिखाई देता है?

राजदरबारों में कवि और विदूषक की परंपरा होती थी. कवि गुणगान करता था तो विदूषक मजाक के लहजे में राजा की कमियां बताता था. आज के मीडिया के नजरिए से ये रोल किस तरह बदलते दिखते हैं?

ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देंगे माइथोलॉजिस्ट और बेस्टसेलर लेखक देवदत्त पट्टनायक

अपनी तरह का इकलौता शो- सोल-खोल में आपको जिंदगी के फलसफे तो समझाएगा ही, साथ ही आज के सामाजिक-राजनीतिक माहौल को बेहतर समझने में भी मदद करेगा

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आज के राजनीतिक माहौल में जनता की फिक्र की बजाय सिर्फ आरोपों का शोर क्यों सुनाई-दिखाई देता है?

राजदरबारों में कवि और विदूषक की परंपरा होती थी. कवि गुणगान करता था तो विदूषक मजाक के लहजे में राजा की कमियां बताता था. आज के मीडिया के नजरिए से ये रोल किस तरह बदलते दिखते हैं?

ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देंगे माइथोलॉजिस्ट और बेस्टसेलर लेखक देवदत्त पट्टनायक

अपनी तरह का इकलौता शो- सोल-खोल में आपको जिंदगी के फलसफे तो समझाएगा ही, साथ ही आज के सामाजिक-राजनीतिक माहौल को बेहतर समझने में भी मदद करेगा