ये कैसा ‘मोतीचूर’ है जिसे खुद उसका ‘हलवाई’ ही कड़वा बता रहा है?

ये कैसा ‘मोतीचूर’ है जिसे खुद उसका ‘हलवाई’ ही कड़वा बता रहा है?

एंटरटेनमेंट

एंकर: दीपशिखा यादव

वीडियो एडिटर: वीरू कृष्ण मोहन

फिल्म ‘मोतीचूर चकनाचूर’ दर्शकों को कुछ खास पसंद नहीं आई और फिल्म को लेकर अब एक कंट्रोवर्सी भी हो गई है. फिल्म की डायरेक्टर देबमित्रा बिस्वाल लोगों से इस फिल्म को ना देखने की अपील कर रही हैं.

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फिल्म 'मोतीचूर चकनाचूर' को बॉक्स ऑफिस पर भी लड्डू मिला, लेकिन कड़वा... मतलब फ्लॉप. स्टार एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी को देखकर जो दुकान ऊंची नजर आ रही थी उसका पकवान फीका निकला. फिल्म का फ्लॉप होना तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि फिल्म की डायरेक्टर खुद फिल्म को बेकार बता रही हैं.

अब आप सोच रहे होंगे कि अपनी दही को कौन सा दुकानदार खट्टी कहता है, ठीक उसी तरह अपनी फिल्म को कौन डायरेक्टर फ्लॉप कराना चाहेगा? लेकिन ऐसा हुआ है.

15 नवंबर को फिल्म 'मोतीचूर चकनाचूर' रिलीज हुई और फिल्म के रिलीज से ठीक एक दिन पहले 14 नवंबर की शाम डायरेक्टर देबमित्रा बिस्वाल फेसबुक पर मोतीचूर के दानों को बिखेरने लगीं. उन्होंने फेसबुक पर एक लंबा सा पोस्ट लिखा और लोगों से अपील कर डाली की आप लोग ये फिल्म मत देखें.


हैं ना ये अजीब बात... जहां डायरेक्टर अपनी औनी-पौनी फिल्म को भी हिट कराने के लिए शहर दर शहर भटकते हैं. रियलिटी शो में जाकर कभी डांस करते हैं, तो कभी कॉमेडी. कुछ लोग तो मंदिर और दरगाह पर भी दुआ मांगते हैं. दर्शकों से कहते हैं प्लीज हमारी फिल्म देखने जरूर आइएगा, लेकिन देबमित्रा तो खुद ही फिल्म ना देखने की अपील करने लगीं.

वजह ये है कि देबामित्रा फिल्म के फाइनल वर्जन से खुश नहीं हैं. उन्होंने अपने फेसबुक पर अपने पोस्ट में लिखा-

‘मोतीचूर चकनाचूर’ वो फिल्म नहीं है, जो मैंने बनाई थी. फिल्म के कई दमदार सींस हटा दिए गए हैं. मैंने बहुत मेहनत से ये फिल्म बनाई थी, लेकिन प्रोड्यूसर्स ने ना सिर्फ ये फिल्म बर्बाद की है, बल्कि मेरा करियर भी बर्बाद कर दिया है.

देबामित्रा ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में भी अपना ये दर्द बयां किया.

खबरें तो ये भी हैं कि डायरेक्टर देबामित्रा ने ये फिल्म उन्होंने अपने कुछ परिचितों को बिना डबिंग और बिना फाइनल प्रोडक्शन के दिखाई थी. सबने फिल्म की खूब तारीफ की और इसे  प्री रिलीज स्क्रीनिंग में तालियां भी खूब मिलीं. लेकिन फिल्म जब पर्दे पर आई तो सब गुड़गोबर हो चुका था.

अगर देबामित्रा के आरोपों को सही मानें तो ये बॉलीवुड में, बाजार के नाम पर होने वाले क्रिएटिविटी के शोषण की क्लासिक कहानी है. बॉलीवुड में फिल्म बनाना किसी के लिए आसान नहीं होता ऊपर से नवाज जैसा बड़ा स्टार मिल जाए और साथ में सुनील शेट्टी जैसे स्टार की बेटी आथिया, लेकिन देबमित्रा के गुस्से का अंदाजा आप  इस बात से लगा सकते हैं कि वो ये सब भूलते हुए डायरेक्टर के क्रेडिट तक से अपना नाम हटाने की मांग कर रही हैं.

वैसे इस फिल्म से विवाद काफी पहले से जुड़ा है. डायरेक्टर देबमित्रा ने पहले आरोप लगाए थे कि प्रोड्यूसर्स ने उनके ड्यूज क्लियर नहीं किए हैं. अपने इस आरोप के साथ वो कोर्ट पहुंच गई और फिल्म की रिलीज पर स्टे लगवा दिया. उनके वकील ने कहा था कि प्रोड्यूसर्स और देबमित्रा के बीच तीन फिल्में बनाने का एक कॉन्ट्रेक्ट हुआ. इनमें से ‘मोतीचूर चकनाचूर’ पहली फिल्म थी.

पहली फिल्म के लिए देबमित्र को 11 लाख रुपए मिलने थे. जबकि मिले सिर्फ 6 लाख. इसके बाद उनके पास एक मेल आया. उसमें मेकर्स ने कॉन्ट्रेक्ट खत्म करने की बात लिखी थी. जब देबमित्रा ने कॉल किया तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

यही नहीं मीडिया में ऐसी खबरें भी आईं कि आथिया शेट्टी के पापा सुनील शेट्टी रिलीज से पहले फिल्म की फाइनल कॉपी देखना चाहते थे, लेकिन उनका स्टार पावर भी काम नहीं आया. फिल्म के मेकर्स ने बकायदा मैग्जीन में कानूनी नोटिस छपवाकर सुनील शेट्टी को इस फिल्म में दूर करवा दिया. पर्दे पर आई फिल्म को क्रिटिक्स ने भी कुछ खास पसंद नहीं किया है.

कमाई की बात करें तो फिल्म ने ओपनिंग डे पर 1.80 करोड़ की कमाई की थी, फिल्म रिलीज को एक हफ्ता पूरा होने को है और अभी तक फिल्म 20 करोड़ भी नहीं कमा पाई है.

भई..  अब जब बनाने वाले ही इतने कड़वे मन से लड्डू बनाएंगे तो भले ही वो मोतीचूर का हो, दर्शकों को तो कड़वा लगेगा ही

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